अकाली नेता मजीठिया को नहीं मिली राहत, 4 दिन बढ़ी रिमांड

अकाली नेता मजीठिया को नहीं मिली राहत, 4 दिन बढ़ी रिमांड

पंजाब में आय से अधिक संपत्ति केस में पकड़े गए पूर्व मंत्री व सीनियर अकाली नेता बिक्रम मजीठिया की रिमांड बढ़ा दी गई है। विजिलेंस ने मोहाली कोर्ट में बताया कि जांच के दौरान कई अहम सवालों पर मजीठिया सहयोग नहीं कर रहे हैं। एजेंसी ने अदालत से यह भी कहा कि उन्हें अब पंजाब से बाहर उत्तर प्रदेश के गोरखपुर ले जाकर पूछताछ करनी पड़ सकती है।

करीब 4 घंटे चली सुनवाई के बाद कोर्ट ने चार दिन की रिमांड मंजूर की और अगली पेशी 6 जुलाई तय की गई। इस दौरान अदालत परिसर को पूरी तरह घेरा गया था। मीडिया को दूर रखने के लिए जहां गाड़ियों की बैरिकेडिंग की गई, वहीं कोर्ट के चारों ओर तिरपाल लगाकर हर दिशा से दृश्यता बंद कर दी गई।

इससे पहले कोर्ट में पेशी के दौरान माहौल तनावपूर्ण हो गया था। मजीठिया की गिरफ्तारी के विरोध में अकाली दल के प्रधान व पूर्व मुख्यमंत्री सुखबीर बादल समर्थकों संग मोहाली पहुंच गए। कोर्ट की तरफ आते देख पुलिस ने उन्हें घेर लिया। इसके बाद उन्हें हिरासत में ले लिया गया। इस दौरान सुखबीर बादल और पंजाब पुलिस के अधिकारियों से जमकर बहस हुई। पुलिस ने उन्हें कहा कि सुरक्षा कारणों की वजह से वह कोर्ट की तरफ नहीं जा सकते। इसके बाद अकाली वर्कर भड़क उठे। बादल ने इस दौरान आरोप लगाए कि पंजाब के पूरे तंत्र को अरविंद केजरीवाल ने अपने कब्जे में ले लिया है। सब कुछ उनके इशारों पर ही हो रहा है।

बता दें कि मजीठिया को अमृतसर स्थित उनके घर से पकड़ा गया था। उन पर आय से 540 करोड़ रुपए ज्यादा की संपत्ति रखने का आरोप है। विजिलेंस को गिरफ्तारी के बाद मजीठिया की 7 दिन की रिमांड मिली थी। इसके बाद आज उन्हें फिर कोर्ट में पेश किया जा रहा है। विजिलेंस ने कहा कि मजीठिया सहयोग नहीं कर रहे, इसलिए उनकी और रिमांड दी जाए।

सरकारी वकील प्रीत इंदर पाल सिंह ने कोर्ट को बताया कि मजीठिया ने अपनी शिमला स्थित संपत्ति की जानकारी अधूरी दी थी। पुलिस जांच और दस्तावेजों से यह बात सामने आई कि डीड में दर्ज विवरण और वास्तविक स्थिति में फर्क है। इसी वजह से मजीठिया को जांच के दौरान शिमला ले जाया गया और यह तथ्य अदालत में पेश किए गए।

सरकारी वकील ने कहा कि जांच में सामने आया है कि मजीठिया की कुछ संपत्तियां गोरखपुर में भी हैं। इसके अलावा दिल्ली में ‘सैनिक फॉर्म’ नाम से एक फार्महाउस है, जिसे पहले नीलाम किया गया था लेकिन बाद में मजीठिया के पिता द्वारा दोबारा खरीदा गया। यह लेन-देन उस समय हुआ जब मजीठिया पंजाब सरकार में मंत्री थे।

कोर्ट को बताया गया कि जालंधर में ‘ग्रीन एवेन्यू’ नाम की एक सोसाइटी विकसित की गई है, जिसमें मजीठिया की पत्नी की 25% हिस्सेदारी है। वहीं, सैनिक फॉर्म की मौजूदा कीमत सैकड़ों करोड़ आंकी गई है। सरकारी वकील के अनुसार, जब कोर्ट में दस्तावेज पेश किए गए तो यह स्पष्ट हुआ कि संपत्तियों के मामलों में पूरे परिवार की मिलीभगत रही है।

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सरकारी वकील ने कहा कि मजीठिया को जो पैसा मिला, वह केवल ड्रग्स से नहीं जुड़ा। कई और चैनलों से पैसा सर्कुलेट होकर उनके पास पहुंचा है। यह रकम केवल खातों के जरिए नहीं आई, बल्कि अलग-अलग तरीकों से ट्रांसफर हुई। बाकी स्रोतों की जांच अभी जारी है और आगे खुलासे होंगे।

 

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