होर्मुज जलडमरूमार्ग में महायुद्ध की आहट: ईरान का जहाजों को 'संपर्क' करने का अल्टीमेटम, अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर पर हमले का दावा
अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते सीधे टकराव से विश्व में तेल आपूर्ति पर गहराया संकट, होर्मुज में आमने-सामने आईं दोनों सेनाएं।
ईरान ने होर्मुज से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों को चेतावनी दी है और अमेरिकी युद्धपोत पर हमले का दावा किया।
मध्य पूर्व (Middle East) में तनाव अब एक पूर्ण विकसित युद्ध की कगार पर पहुंच गया है। ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे सीधे सैन्य टकराव ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग—होर्मुज जलडमरूमध्य—को एक 'वॉर जोन' में तब्दील कर दिया है। ईरानी नौसेना ने एक अप्रत्याशित कदम उठाते हुए साफ कर दिया है कि इस खाड़ी से गुजरने वाले किसी भी जहाज को अब सीधे तौर पर उनसे संपर्क साधना होगा और अपनी पहचान स्पष्ट करनी होगी। इस बीच, अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर पर मिसाइल हमले के दावों ने अंतरराष्ट्रीय बिरादरी की चिंताएं बढ़ा दी हैं।
ईरानी नौसेना की चेतावनी:
"हमसे बात करें, वरना..." ईरानी सशस्त्र बलों की केंद्रीय संचालन कमान 'खातम अल-अनबिया' और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने सरकारी टेलीविजन पर एक कड़ा बयान जारी किया है। ईरान का कहना है कि संयुक्त राज्य अमेरिका, इजरायल या उनके किसी भी सहयोगी देश के जहाज, या वह जहाज जो इनका तेल ले जा रहे हैं, उन्हें अब एक "वैध सैन्य लक्ष्य" माना जाएगा।
ईरानी नौसेना ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों को ईरानी रेडियो फ्रीक्वेंसी पर जवाब देना होगा। इसके पीछे ईरान की मंशा इस क्षेत्र पर अपना पूर्ण नियंत्रण जताना और अमेरिका द्वारा बनाए जा रहे दबाव का कूटनीतिक और सैन्य जवाब देना है। ईरानी सैन्य अधिकारियों ने चुनौती देते हुए कहा है कि यह जलडमरूमध्य इजरायल और अमेरिका की शत्रुतापूर्ण नीतियों का परिणाम भुगतेगा और वे जरूरत पड़ने पर इस रास्ते को पूरी तरह से ब्लॉक कर सकते हैं।

रोजाना 130 जहाजों की आवाजाही: दुनिया की जीवनरेखा
होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी (Persian Gulf) को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। यह दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण 'एनर्जी चोकपॉइंट' है। आंकड़ों के अनुसार, यहां से हर रोज औसतन 130 व्यापारिक और तेल से लदे जहाज गुजरते हैं। वैश्विक तेल व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा (20%) और भारी मात्रा में लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) इसी रास्ते से होकर जाती है। ईरान की धमकी का सीधा अर्थ है—पूरी दुनिया की ऊर्जा सप्लाई को बंधक बनाना। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह मार्ग कुछ हफ्तों के लिए भी बाधित होता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकती हैं, जिससे वैश्विक मंदी का खतरा पैदा हो जाएगा।
अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर पर मिसाइल अटैक का दावा
तनाव के इस माहौल में सबसे चौंकाने वाली खबर अमेरिकी नौसैनिक बेड़े पर हमले की है। ईरानी सेना और उनके समर्थित विद्रोही गुटों ने दावा किया है कि उन्होंने लाल सागर और होर्मुज के आसपास तैनात अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर (जिसमें यूएसएस जेराल्ड आर. फोर्ड और यूएसएस अब्राहम लिंकन का नाम उछाला गया है) को निशाना बनाकर कई बैलिस्टिक मिसाइलें और कामिकेज (Kamikaze) ड्रोन दागे हैं।
ईरानी जनसंपर्क कार्यालय के मुताबिक, उनके मिसाइल और ड्रोन हमलों के खौफ से अमेरिकी युद्धपोतों को अपनी जगह बदलने पर मजबूर होना पड़ा है। हालांकि, अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) ने इस हमले में अपने किसी भी एयरक्राफ्ट कैरियर को गंभीर नुकसान पहुंचने की पुष्टि नहीं की है। अमेरिका का कहना है कि उनके उन्नत एयर डिफेंस सिस्टम ने ईरान द्वारा दागी गई अधिकतर मिसाइलों और ड्रोन्स को हवा में ही इंटरसेप्ट करके नष्ट कर दिया है।
अमेरिका का पलटवार और माइन-लेइंग जहाजों का खात्मा
ईरान की इन आक्रामक गतिविधियों को देखते हुए अमेरिका ने भी अपनी सैन्य कार्रवाई तेज कर दी है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में 'डेथ वैली' बनाने की साजिश रच रहा है। सैटेलाइट इमेज और खुफिया रिपोर्ट्स में यह खुलासा हुआ कि ईरानी नौसेना छोटी नावों (USVs) का उपयोग करके समुद्र के नीचे भारी मात्रा में 'सी-माइंस' (समुद्री बारूदी सुरंगें) बिछा रही है ताकि अमेरिकी और व्यापारिक जहाजों को डुबाया जा सके।
जवाब में, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने एक बड़ा ऑपरेशन चलाते हुए ईरान के 10 से 16 इनएक्टिव माइन-लेइंग (बारूदी सुरंग बिछाने वाले) जहाजों को मिसाइल स्ट्राइक से पूरी तरह तबाह कर दिया है। अमेरिका ने ईरान को खुली चेतावनी दी है कि वह वैश्विक ऊर्जा सप्लाई मार्ग को बाधित करने की कोई भी कोशिश न करे। व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया है कि आतंकवादियों और उपद्रवियों को दुनिया के व्यापार को बंधक बनाने की इजाजत नहीं दी जाएगी।
अब आगे क्या होगा ?
मौजूदा हालात बता रहे हैं कि कोई भी पक्ष पीछे हटने को तैयार नहीं है। ईरान पहली बार होर्मुज में ड्रोन बोट (USV) और अंडरवाटर हथियारों का इस्तेमाल कर रहा है, जो कम लागत में भारी तबाही मचाने में सक्षम हैं। दूसरी ओर, अमेरिका किसी भी कीमत पर इस 'चोकपॉइंट' को खुला रखना चाहता है। यह सिर्फ दो देशों की लड़ाई नहीं रह गई है; यह एक ऐसा भू-राजनीतिक संकट है जो यूरोप से लेकर एशिया तक के देशों की अर्थव्यवस्था को सीधे तौर पर प्रभावित कर रहा है। आने वाले दिनों में अगर कूटनीतिक बातचीत के जरिए समाधान नहीं निकाला गया, तो यह संघर्ष एक विनाशकारी क्षेत्रीय युद्ध में बदल सकता है।


