ईरान-इसराइल महायुद्ध: 13वां दिन — मोजतबा खामेनेई ने संभाली कमान विश्व में फैला संकट
12 मार्च, 2026 | तेहरान और यरूशलम के बीच जारी संघर्ष की विस्तृत रिपोर्ट
मोजतबा खामेनेई ने कमान संभाली; ईरान-इसराइल युद्ध और हॉर्मुज़ संकट से तेल कीमतें $100 पार, वैश्विक अर्थव्यवस्था और सुरक्षा पर गहरा संकट।
मध्य पूर्व में जारी युद्ध अब अपने सबसे विनाशकारी चरण में पहुंच चुका है। 28 फरवरी, 2026 को शुरू हुए सैन्य अभियानों के बाद से आज 13वें दिन भी तनाव चरम पर है। यह संघर्ष अब केवल दो देशों तक सीमित न रहकर एक वैश्विक संकट का रूप ले चुका है, जिससे अंतरराष्ट्रीय राजनीति और अर्थव्यवस्था की दिशा बदल गई है।
ईरान में सत्ता परिवर्तन और सैन्य रणनीति
इस युद्ध के बीच सबसे बड़ी खबर ईरान के आंतरिक नेतृत्व से आई है। सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मृत्यु (या सैन्य कार्रवाई में हत्या) के बाद, उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को आधिकारिक तौर पर ईरान का नया सर्वोच्च नेता घोषित कर दिया गया है। मोजतबा ने कमान संभालते ही 'अंतिम युद्ध' का आह्वान किया है। रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने तेहरान के सुरक्षित बंकरों से सेना को आदेश दिया है कि वे इसराइल के प्रमुख शहरों और अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर अपनी सबसे आधुनिक 'फतह-2' हाइपरसोनिक मिसाइलों का इस्तेमाल करें।
हॉर्मुज़ जलडमरूमार्ग : दुनिया की दुखती रग
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़' (Strait of Hormuz) में बड़े पैमाने पर समुद्री सुरंगें (Naval Mines) बिछा दी हैं। यह जलमार्ग दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग 20% वहन करता है। ईरान की इस कार्रवाई से वैश्विक तेल आपूर्ति श्रृंखला पूरी तरह टूट गई है। कच्चे तेल (Brent Crude) की कीमतें $100 प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गई हैं, जिससे भारत सहित कई विकासशील देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भारी उछाल की आशंका पैदा हो गई है।
नागरिक हताहत और मानवीय संकट
सैन्य ठिकानों के अलावा, यह युद्ध अब घनी आबादी वाले इलाकों तक पहुंच गया है। तेहरान के उत्तर में स्थित रिहायशी इलाकों और इसराइल के हाइफा शहर में भारी तबाही देखी गई है। मीनाब (ईरान) में एक स्कूल पर हुए मिसाइल हमले में 170 से अधिक छात्राओं की मौत की खबर ने दुनिया को झकझोर दिया है। संयुक्त राष्ट्र ने इस हमले को 'युद्ध अपराध' की श्रेणी में रखने की चेतावनी दी है। वहीं, लेबनान और सीरिया में भी इसराइली हवाई हमलों ने बुनियादी ढांचे को मलबे में तब्दील कर दिया है।
भारत और खाड़ी देशों पर प्रभाव
भारत के लिए यह स्थिति अत्यंत चिंताजनक है। खाड़ी देशों (यूएई, कुवैत, ओमान) में लाखों भारतीय प्रवासी रहते हैं। दुबई और मस्कट के पास हुए ड्रोन हमलों ने इन नागरिकों की सुरक्षा को खतरे में डाल दिया है। भारत सरकार ने 'ऑपरेशन घर वापसी' के तहत अपने नागरिकों को सुरक्षित निकालने के लिए नौसेना के जहाजों को तैनात करने की योजना बनाई है। साथ ही, हॉर्मुज़ मार्ग बंद होने से भारत के ऊर्जा आयात पर सीधा असर पड़ा है।
शांति की धुंधली उम्मीदें
हालाँकि रूस और चीन ने मध्यस्थता की पेशकश की है, लेकिन ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक इसराइल उसके परमाणु ठिकानों पर हमले नहीं रोकता और हर्जाना नहीं देता, तब तक युद्ध विराम संभव नहीं है। दूसरी ओर, इसराइल का कहना है कि वह ईरान के परमाणु खतरे को हमेशा के लिए खत्म किए बिना पीछे नहीं हटेगा।

निष्कर्ष: 12 मार्च 2026 की स्थिति के अनुसार, दुनिया परमाणु युद्ध के मुहाने पर खड़ी है। यदि आने वाले 48 घंटों में कोई कूटनीतिक समाधान नहीं निकला, तो यह संघर्ष एक पूर्ण क्षेत्रीय युद्ध में बदल सकता है।


