रोहतक नगर निगम में 'महासंग्राम' : 'बिकाऊ' शब्द सुनते ही आपा खो बैठे वाइस चेयरमैन, महिला मेयर के सामने पार्षद को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा; वीडियो वायरल

मर्यादा तार-तार: सरेआम पकड़ा पार्षद का कॉलर, गालियां दीं और सदन में ही शुरू कर दी धुनाई; तमाशबीन बने रहे अधिकारी।

रोहतक नगर निगम में 'महासंग्राम' : 'बिकाऊ' शब्द सुनते ही आपा खो बैठे वाइस चेयरमैन, महिला मेयर के सामने पार्षद को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा; वीडियो वायरल

रोहतक नगर निगम : 'बिकाऊ' कहने पर वाइस चेयरमैन ने पार्षद को दौड़ाकर पीटा, वीडियो वायरल। मेयर के सामने मर्यादा हुई तार-तार।

सदन की गरिमा तार-तार :

हरियाणा के रोहतक में नगर निगम की बैठक उस समय किसी अखाड़े जैसी नजर आने लगी जब शहर के विकास पर चर्चा करने के बजाय जनप्रतिनिधि आपस में ही भिड़ गए। मंगलवार को आयोजित इस बजट बैठक में मर्यादा की सारी सीमाएं तब टूट गईं जब नगर निगम के वाइस चेयरमैन ने एक पार्षद पर हमला कर दिया। यह हमला केवल मौखिक बहस तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सदन के भीतर ही पार्षद को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा गया। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि यह सब कुछ सदन की लेडी चेयरमैन (मेयर) और वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में हुआ।

विवाद का मुख्य कारण: एक शब्द और भड़का आक्रोश

जानकारी के अनुसार, बैठक की शुरुआत सामान्य ढंग से हुई थी। एजेंडे के मुताबिक विकास कार्यों और बजट आवंटन पर चर्चा चल रही थी। इसी दौरान वार्ड के मुद्दों को लेकर वाइस चेयरमैन और एक पार्षद के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। आरोप है कि बहस के दौरान पार्षद ने वाइस चेयरमैन के लिए 'बिकाऊ' शब्द का इस्तेमाल कर दिया। यह शब्द सुनते ही वाइस चेयरमैन का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। उन्होंने न आव देखा न ताव, और सीधे अपनी सीट से उठकर पार्षद की ओर लपके।

सरेआम पिटाई और गाली-गलौज

वाइस चेयरमैन ने आव देखा न ताव और पार्षद का कॉलर पकड़ लिया। सदन के भीतर ही गंदी-गंदी गालियां दी जाने लगीं। माहौल इतना तनावपूर्ण हो गया कि वाइस चेयरमैन पार्षद को मारने के लिए उनके पीछे दौड़ पड़े। पार्षद अपनी जान बचाने के लिए सदन की कुर्सियों के बीच से भागते नजर आए, लेकिन वाइस चेयरमैन ने उन्हें पकड़ लिया और उनके साथ हाथापाई की। लेडी चेयरमैन बीच-बचाव की कोशिश करती दिखीं, लेकिन वाइस चेयरमैन का गुस्सा इतना ज्यादा था कि वे किसी की सुनने को तैयार नहीं थे।

अधिकारियों और महिला मेयर की मौजूदगी

यह पूरी घटना उस समय हुई जब मंच पर लेडी चेयरमैन और निगम के बड़े अधिकारी बैठे हुए थे। सदन में मौजूद अन्य पार्षदों ने जब यह मंजर देखा तो वे सन्न रह गए। कुछ पार्षदों ने बीच-बचाव कर दोनों को अलग करने की कोशिश की, लेकिन तब तक सदन की गरिमा को भारी ठेस पहुंच चुकी थी। सरकारी दफ्तर के भीतर इस तरह की गुंडागर्दी ने कानून-व्यवस्था और जनप्रतिनिधियों के आचरण पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

आगे की कार्रवाई और राजनीतिक प्रतिक्रिया

इस घटना के बाद पीड़ित पार्षद ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराने और उच्चाधिकारियों से वाइस चेयरमैन की बर्खास्तगी की मांग करने की बात कही है। दूसरी ओर, विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष को घेरना शुरू कर दिया है। उनका तर्क है कि अगर सदन के भीतर ही जनप्रतिनिधि सुरक्षित नहीं हैं और इस तरह का व्यवहार किया जा रहा है, तो आम जनता की सुरक्षा का क्या होगा?

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निष्कर्ष

नगर निगम जैसी संस्थाएं लोकतंत्र की बुनियादी इकाइयां होती हैं, जहाँ शिष्टाचार और संवाद के जरिए समस्याओं का समाधान होना चाहिए। रोहतक की इस घटना ने यह साबित कर दिया है कि जब अहंकार और व्यक्तिगत आक्षेप हावी हो जाते हैं, तो लोकतांत्रिक मर्यादाएं गौण हो जाती हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस हिंसक आचरण पर क्या सख्त कदम उठाता है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

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