पंजाब में छाया एलपीजी संकट: किल्लत के बीच ₹4000 तक पहुँचा सिलेंडर, दिल्ली में कांग्रेस का 'चूल्हा मार्च'
पंजाब में छाया एलपीजी संकट: किल्लत के बीच ₹4000 तक पहुँचा सिलेंडर, दिल्ली में कांग्रेस का 'चूल्हा मार्च'
पंजाब में एलपीजी की भारी किल्लत से हाहाकार, कालाबाजारी में सिलेंडर के दाम दोगुने; विरोध में कांग्रेस का दिल्ली में प्रदर्शन।
नई दिल्ली/चंडीगढ़:
देशभर में रसोई गैस (LPG) की किल्लत ने आम जनता की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। पंजाब से आ रही तस्वीरें बेहद चिंताजनक हैं, जहाँ लोग गैस एजेंसियों के बाहर सिलेंडर लेकर भागते और लंबी कतारों में संघर्ष करते दिख रहे हैं। संकट का फायदा उठाकर कालाबाजारी करने वाले सक्रिय हो गए हैं, जिसके चलते ₹2000 का सिलेंडर कथित तौर पर ₹4000 तक बेचा जा रहा है। इस बीच, विपक्षी दल कांग्रेस ने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए दिल्ली में 'मिट्टी के चूल्हे' जलाकर अनोखा विरोध प्रदर्शन किया है।

पंजाब में 'गैस की लूट' जैसे हालात :
पंजाब के विभिन्न जिलों, विशेषकर लुधियाना, जालंधर और अमृतसर में एलपीजी सिलेंडर की भारी कमी देखी जा रही है। सरकारी दावों के विपरीत, धरातल पर उपभोक्ताओं को 15 से 20 दिनों की लंबी वेटिंग का सामना करना पड़ रहा है। कई स्थानों पर जब ट्रक गैस एजेंसी पहुँचते हैं, तो लोग आपाधापी में सिलेंडर खुद उठाने की कोशिश कर रहे हैं। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि जो सिलेंडर सरकारी रेट पर उपलब्ध होना चाहिए, वह अब ब्लैक मार्केट में दोगुने से भी अधिक दामों पर मिल रहा है। मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए अब खाना पकाना एक विलासिता जैसा हो गया है।
दिल्ली की सड़कों पर उतरी कांग्रेस :
इस संकट के खिलाफ कांग्रेस पार्टी ने दिल्ली में जोरदार प्रदर्शन किया। अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की कार्यकर्ताओं और कई दिग्गज नेताओं ने सड़क पर बैठकर 'मिट्टी के चूल्हे' जलाए और उन पर रोटियां सेंकी। यह विरोध प्रदर्शन सांकेतिक रूप से यह दिखाने के लिए था कि मोदी सरकार के दौर में देश एक बार फिर "धुएँ वाले पुराने युग" में लौट रहा है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि 'उज्ज्वला योजना' के तहत दिए गए सिलेंडर अब खाली पड़े हैं क्योंकि आम आदमी के पास उन्हें भरवाने की हिम्मत नहीं बची है।
संकट का कारण: आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान
विशेषज्ञों और पेट्रोलियम मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, इस संकट के पीछे वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव (विशेषकर मध्य-पूर्व का संघर्ष) और आपूर्ति श्रृंखला में आई रुकावटें प्रमुख कारण हैं। हालांकि, सरकार ने हाल ही में घरेलू रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए हैं, लेकिन इसका असर अभी तक बाजारों में नहीं दिख रहा है।
सियासी वार-पलटवार :
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी ने सरकार को घेरते हुए कहा कि जब देश में गैस और ईंधन की कमी थी, तब सरकार ने पहले से तैयारी क्यों नहीं की। दूसरी ओर, सरकार ने जनता से अपील की है कि वे घबराएं नहीं और 'पैनिक बाइंग' (जरूरत से ज्यादा खरीदारी) से बचें। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी विपक्षी दलों पर भ्रम और डर फैलाने का आरोप लगाया है।
आम जनता पर दोहरी मार :
वर्तमान में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की आधिकारिक कीमतों में ₹60 की बढ़ोतरी के बाद अब किल्लत ने लोगों को पूरी तरह तोड़ दिया है। व्यावसायिक (Commercial) सिलेंडरों की किल्लत से छोटे ढाबे और होटल भी बंद होने की कगार पर हैं, जिससे बेरोजगारी का खतरा भी मंडरा रहा है।


