मजीठिया की जमानत पर साढ़े 4 घंटे चली बहस ,जानिए पूरा मामला

मजीठिया की जमानत पर साढ़े 4 घंटे चली बहस ,जानिए पूरा मामला

शिरोमणि अकाली दल के सीनियर नेता और पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया की जमानत याचिका पर आज मोहाली की अदालत में सुनवाई हुई। करीब साढ़े 4 घंटे तक दोनों पक्षों के वकीलों ने अपनी-अपनी दलीलें दीं। अदालत ने अब अगली सुनवाई 4 अगस्त को तय की है। इससे पहले भी पिछली सुनवाई में साढ़े चार घंटे बहस चली थी।

इधर, 31 जुलाई को मजीठिया और उनके समर्थकों पर अमृतसर में विजिलेंस ब्यूरो के काम में रुकावट डालने का एक और मामला दर्ज किया गया है। इस पर अकाली दल का कहना है कि सरकार पहले वाले केसों में कुछ साबित नहीं कर पाई, इसलिए अब नए केस बनाकर उन्हें फंसाने की कोशिश की जा रही है।

वहीं, जिला बार एसोसिएशन फतेहगढ़ साहिब के मेंबरों ने इस मामले को लेकर चीफ जस्टिस से मुलाकात की। उन्होंने बताया मजीठिया की जब मोहाली अदालत में पेशी होती है, तो अदालत को छावनी में बदल दिया जाता है। अदालतों में जाने से वकीलों से लेकर अन्य लोगों को रोक दिया जाता है। जो कि पूरी तरह गलत है। उन्होंने फतेहगढ़ साहिब और रूपनगर में हुई बेअदबी के केसों के आरोपी को अदालत में पेश करने का मामला भी उठाया। उन्होंने बताया कि वहां पर आपातकाल जैसे हालत पैदा कर दिए। इस दिशा में कार्रवाई की मांग की गई है।

मजीठिया को विजिलेंस ब्यूरो ने 25 जून को अमृतसर से गिरफ्तार किया था। उन पर आरोप है कि उन्होंने अपनी आय से अधिक संपत्ति जुटाई है। इससे पहले 2021 में कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में मजीठिया पर एनडीपीएस एक्ट के तहत भी केस दर्ज हुआ था।

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जिसमें अब तक पूर्व डीजीपी सिद्धार्थ चटोपाध्याय और ईडी के पूर्व डिप्टी डायरेक्टर समेत 6 लोगों के बयान दर्ज हो चुके हैं। पंजाब, हिमाचल, दिल्ली और यूपी में मजीठिया की संपत्तियों पर छापेमारी हो चुकी है। सरकार का कहना है कि उसके पास पुख्ता सबूत हैं, जबकि मजीठिया के वकील इसे राजनीति से प्रेरित और बेबुनियाद मामला बता रहे हैं।

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बिक्रमजीत सिंह मजीठिया नाभा जेल में बंद हैं। अकाली दल का आरोप है कि उनके नेताओं को जेल में मिलने दिया जा रहा है। पहले शिरोमणि अकाली दल के नेता सुखबीर बादल उनसे मिलने गए थे। लेकिन उनकी उनकी मुलाकात नहीं हो पाई थी। इसी तरह डॉ दलजीत सिंह चीमा व तीन अन्य नेता भी मजीठिया से मिलने पहुंचे थे। लेकिन यह मुलाकात नहीं हो पाई है। अकाली नेताओं का कहना है कि मानवाधिकारों का हनन है।

 

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