चक्रवात 'मुरासु' का खौफ: बंगाल की खाड़ी से उठा 'युद्ध का नगाड़ा', आंध्र प्रदेश-ओडिशा समेत 9 राज्यों में भारी तबाही का अलर्ट
बंगाल की खाड़ी में इन दिनों कुदरत का रौद्र रूप देखने को मिल रहा है। एक हफ्ते के भीतर ही देश के तटीय इलाकों को दूसरे बड़े चक्रवाती तूफान का सामना करना पड़ रहा है। चक्रवात 'अर्नब' की तबाही के निशान अभी मिटे भी नहीं थे कि अब एक नया और भयंकर चक्रवात 'मुरासु' (Cyclone Murasu) आंध्र प्रदेश के तट की ओर बेहद तेजी से बढ़ रहा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने इसे लेकर हाई अलर्ट जारी कर दिया है। हवाओं की डराने वाली गड़गड़ाहट और समुद्र की उफनती लहरें इस बात का संकेत दे रही हैं कि तटीय राज्यों के लिए अगले कुछ घंटे बेहद भारी होने वाले हैं।
कब और कहाँ टकराएगा तूफान? (Landfall Details) मौसम विभाग की ताजा बुलेटिन के अनुसार, सोमवार सुबह 5:30 बजे यह चक्रवात तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई से 200 किलोमीटर और आंध्र प्रदेश के नेल्लोर से महज 210 किलोमीटर की दूरी पर था। यह तूफान 25 किलोमीटर प्रति घंटे की तेज रफ्तार से जमीनी इलाकों की तरफ बढ़ रहा है।
आशंका जताई जा रही है कि आज (सोमवार) रात 11:30 बजे से लेकर मंगलवार तड़के 4 बजे के बीच यह चक्रवात आंध्र प्रदेश के ओंगोल के पास तट से टकराएगा (Landfall)। जब यह तूफान तट से टकराएगा, तब हवाओं की रफ्तार 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है। इतनी तेज हवाएं बड़े पेड़ों को उखाड़ने और कच्चे मकानों को भारी नुकसान पहुंचाने के लिए काफी हैं।
राज्यवार 'मुरासु' का असर और प्रशासन की तैयारी
1. आंध्र प्रदेश: सबसे ज्यादा खतरे में, NDRF की टीमें मुस्तैद तूफान का सबसे सीधा और भयानक असर आंध्र प्रदेश पर पड़ने वाला है, खासकर बापटला, कृष्णा और प्रकाशम जिलों में। नेल्लोर के मयपाडु बीच पर अभी से ही समुद्र में कई फीट ऊंची लहरें उठने लगी हैं। तेज हवाओं के चलते विजयवाड़ा एयरपोर्ट पर 10 उड़ानों को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया गया है। राहत और बचाव कार्य के लिए तमिलनाडु के रणिपेट जिले (अरक्कोनम) से NDRF की चौथी बटालियन की तीन टीमें (कुल 90 जवान) आंध्र प्रदेश भेजी गई हैं। इन जवानों को नेल्लोर, प्रकाशम और मार्कापुरम के सबसे संवेदनशील इलाकों में तैनात किया गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।
2. तमिलनाडु: 24 घंटे में भारी बारिश, चेन्नई जलमग्न हालांकि मुरासु का लैंडफॉल आंध्र में होगा, लेकिन इसका व्यापक असर तमिलनाडु में भी दिख रहा है। चेन्नई, चेंगलपट्टू और तिरुवल्लूर में रविवार रात से ही मूसलाधार बारिश का दौर जारी है। पिछले 24 घंटों के आंकड़ों पर नजर डालें तो चेन्नई के माधवरम में सबसे ज्यादा 11 सेंटीमीटर, जबकि एन्नोर पोर्ट और नुंगमबक्कम में 10-10 सेंटीमीटर बारिश दर्ज की गई है। भारी बारिश के कारण शहर के 22 में से दो बड़े सबवे पूरी तरह पानी में डूब गए हैं। हालात को देखते हुए स्कूल बंद कर दिए गए हैं और चेन्नई नगर निगम ने जलभराव निकालने के लिए हैवी-ड्यूटी पंप और स्पेशल फील्ड टीमों को मोर्चे पर लगा दिया है। तिरुवल्लूर के पझावेर्काडु इलाके में समुद्र में 6 फीट ऊंची लहरें लोगों को खौफजदा कर रही हैं।
3. ओडिशा: बड़े पैमाने पर रेस्क्यू और लोगों का पलायन ओडिशा सरकार किसी भी तरह का जोखिम लेने के मूड में नहीं है। प्रशासन ने गंजाम, गजपति, रायगड़ा, कोरापुट और मलकानगिरी जिलों से निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर निकालने (Evacuation) का काम तेज कर दिया है। पुरी जिले में सोमवार सुबह से ही भारी बारिश और तेज हवाओं ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। रायगढ़ा में सभी 11 फायर स्टेशनों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। इसके अलावा, NDRF, ODRAF और ओडिशा फायर सर्विस के 300 से ज्यादा बचाव दल पूरी तरह से मुस्तैद हैं। गंजाम और गजपति में 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने और भारी बिजली चमकने का अनुमान है।
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4. अन्य राज्यों में भी दिखेगा 'मुरासु' का प्रभाव चक्रवात सिर्फ तटीय राज्यों तक सीमित नहीं रहेगा। मौसम विभाग के अनुसार, इसका गहरा दबाव मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, केरल, तेलंगाना, कर्नाटक और महाराष्ट्र के मौसम पर भी पड़ेगा। इन राज्यों में अगले कुछ दिनों तक भारी बारिश और तेज आंधी की चेतावनी जारी की गई है।
क्या है 'मुरासु' का अर्थ? (Meaning of Cyclone Murasu) तूफानों के नामकरण की अंतरराष्ट्रीय प्रक्रिया के तहत इस चक्रवात का नाम भारत ने दिया है। तमिल भाषा में 'मुरासु' (Murasu) का अर्थ होता है 'युद्ध का नगाड़ा' (War Drum)। जिस तेजी से यह तूफान तबाही मचाने आगे बढ़ रहा है, उसे देखकर यह नाम बिल्कुल सटीक बैठता है। 1 नवंबर को बंगाल की खाड़ी में एक कम दबाव के क्षेत्र के रूप में जन्मा मुरासु महज 24 घंटे के भीतर एक गंभीर चक्रवाती तूफान (Severe Cyclonic Storm) में तब्दील हो गया।
चक्रवात 'अर्नब' के जख्म अभी हरे हैं बंगाल की खाड़ी के तटीय इलाकों के लिए यह हफ्ता किसी बुरे सपने जैसा है। 28 अक्टूबर की रात 3:30 बजे चक्रवात 'अर्नब' 125 से 135 किमी प्रति घंटे की हवाओं के साथ आंध्र प्रदेश के तट से टकराया था। उस तूफान ने भयंकर तबाही मचाई थी, जिसमें आंध्र प्रदेश और ओडिशा में 6 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी। अर्नब के कारण 31 घर पूरी तरह तबाह हो गए थे, 57 हजार से ज्यादा लोगों को रातों-रात रिलीफ कैंपों में शिफ्ट करना पड़ा था। यातायात बुरी तरह चरमरा गया था—50 ट्रेनें और विजयवाड़ा-विशाखापट्टनम एयरपोर्ट पर 21 फ्लाइट्स रद्द हुई थीं। 16 जिलों के स्कूलों पर ताले लग गए थे।
निष्कर्ष (Conclusion) लगातार दो तूफानों ('अर्नब' और अब 'मुरासु') का आना इस बात का संकेत है कि बंगाल की खाड़ी में जलवायु परिवर्तन (Climate Change) का असर साफ नजर आ रहा है। फिलहाल, तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों से अपील की गई है कि वे समुद्र के किनारे बिल्कुल न जाएं, मछुआरे अपनी नावें सुरक्षित स्थानों पर बांध दें और प्रशासन के निर्देशों का सख्ती से पालन करें। 'युद्ध का नगाड़ा' बज चुका है, अब देखना यह है कि प्रशासन की तैयारी इस प्राकृतिक आपदा के सामने कितनी कारगर साबित होती है।


