हरियाणा में गेस्ट टीचर्स का पक्का होने के लिए संघर्ष जारी, सरकार के साथ वार्ता रही विफल
हरियाणा में 10 हजार से अधिक गेस्ट टीचर्स (अतिथि अध्यापकों) और राज्य सरकार के बीच तनातनी बढ़ती जा रही है। गेस्ट टीचर्स लंबे समय से हाईकोर्ट के फैसले को लागू कर अपनी नौकरी पक्की करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार ने स्पीकिंग ऑर्डर (Speaking Order) जारी कर उन्हें पक्का करने से साफ इनकार कर दिया है। इसके बाद से ही दोनों पक्षों में आमना-सामना की स्थिति बनी हुई है।
मुख्य प्रधान सचिव राजेश खुल्लर के साथ बैठक बेनतीजा
गेस्ट टीचर्स को पक्का करने के मुद्दे पर 2 नवंबर को चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव (Chief Principal Secretary) राजेश खुल्लर और गेस्ट टीचर्स के प्रतिनिधिमंडल के बीच एक अहम बैठक हुई। करीब आधा घंटा चली यह बातचीत किसी भी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। सरकार के साथ सहमति न बन पाने के बाद अब गेस्ट टीचर्स ने अपने आंदोलन को तेज करने और आगे की रणनीति बनाने की तैयारी शुरू कर दी है।
कॉलेज लेक्चरर्स को पक्का किया, तो हमें क्यों नहीं?
गेस्ट टीचर्स का आरोप है कि सरकार उनके साथ भेदभाव कर रही है। उनका तर्क है कि 2014 की पॉलिसी के तहत हारट्रोन (Hartron) के माध्यम से लगे 58 कर्मचारियों को पक्का कर दिया गया है। इसके अलावा, गेस्ट टीचर्स और कॉलेज लेक्चरर्स के मामले को सुलझाने के लिए एक कमेटी बनाई गई थी। कमेटी की सिफारिशों के आधार पर विज्ञापनों के जरिए नियुक्त हुए कॉलेज लेक्चरर्स को तो पक्का कर दिया गया, लेकिन स्कूलों में पढ़ा रहे गेस्ट टीचर्स को उनके अधिकारों से वंचित रखा गया है।
कोर्ट का केस जीतने के बावजूद न्याय का इंतजार
गेस्ट टीचर्स संयुक्त संघर्ष मोर्चा के मीडिया प्रभारी अजय लोहान ने स्पष्ट किया कि वे हाईकोर्ट से अपना केस जीत चुके हैं। इसके बावजूद सरकार फैसले को लागू करने से बच रही है। लोहान ने कहा, "सरकार को हमारे खिलाफ स्पीकिंग ऑर्डर जारी करने के बजाय 3 साल की पॉलिसी के तहत हमें तुरंत पक्का करना चाहिए था।"
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2031 तक रिटायर हो जाएंगे 90% गेस्ट टीचर्स
गेस्ट टीचर्स यूनियन और स्कूल शिक्षा निदेशालय (DSE) के आंकड़ों के मुताबिक, वर्तमान में पक्का होने की राह देख रहे गेस्ट टीचर्स की कुल संख्या 10,757 (लगभग 10,857) है। संघर्ष के इस लंबे दौर में 400 से ज्यादा गेस्ट टीचर्स की मृत्यु हो चुकी है। यूनियन ने एक चौंकाने वाला आंकड़ा साझा करते हुए बताया है कि साल 2029 तक 50 प्रतिशत से ज्यादा गेस्ट टीचर्स रिटायर हो जाएंगे। वहीं, 2031 तक करीब 90 प्रतिशत गेस्ट टीचर्स अपनी सेवाएं पूरी कर सेवानिवृत्त हो जाएंगे। ऐसे में अगर सरकार जल्द कोई फैसला नहीं लेती है, तो अधिकांश शिक्षकों का पक्का होने का सपना अधूरा ही रह जाएगा।


