हरजोत सिंह बैंस द्वारा पंजाबियों को अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस की बधाई; पंजाबी भाषा के विकास के लिए किए प्रयासों पर डाला प्रकाश
चंडीगढ़, 21 फरवरी:
पंजाब के शिक्षा और भाषा मंत्री स.हरजोत सिंह बैंस ने अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस मौके लोगों को शिक्षा, संचार, सभ्याचार संभाल और टिकाऊ विकास में मातृ भाषा की महत्वपूर्ण भूमिका का हवाला देते मातृभाषा पंजाबी को अपने रोज़ाना के जीवन में अपनाने का न्योता दिया।
लोगों को अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस की शुभकामनाएं देते स.हरजोत सिंह बैंस ने ज़ोर देकर कहा कि सभी भाषाएं बराबर सम्मानीय है। उन्होंने पंजाबी के प्रसार और सभ्याचार की संभाल प्रति मुख्य मंत्री स. भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार की अटूट वचनबद्धता को दोहराया।
स.बैंस ने बताया कि राज्य के कोने- कोने तक पंजाबी भाषा के प्रसार और सम्मान को यकीनी बनाने के लिए भाषा विभाग ने अंतरराष्ट्रीय मातृ भाषा दिवस पर पंजाब भर में 13 समागम आयोजित किए है। इन समागमों में कवि दरबार, नाटक, भाषा सैमीनार, विद्यार्थियों के भाषण मुकाबले और साहित्यक चर्चाएं शामिल है।
पंजाब सरकार की तरफ से मातृ भाषा की संभाल और इसके विश्वव्यापी प्रचार के लिए किए गए कई प्रयासों को उजागर करते भाषा मंत्री ने कहा कि पंजाबी साहित्य के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाली शख़्सियतों के सम्मान के लिए विभाग की तरफ से जरूरतमंद लेखकों, साहित्यकारों और उनके आश्रित परिवारों को 15, 000 रुपए की महीनावार पैन्शन/ वित्ती सहायता प्रदान की जा रही है। इसके इलावा विभाग साल 2025 के लिए बैस्ट लिटरेरी पंजाबी बुक्क अवार्ड योजना के अंतर्गत अलग- अलग श्रेणियों में 10 पुरुस्कार प्रदान किए है। इसके साथ ही विभाग की तरफ से 11 पंजाबी साहित्यक सभाओं को वित्तीय सहायता भी दी गई जिससे वह मातृभाषा के प्रसार के लिए समर्पित समागम करवा सकें।
उन्होंने बताया कि विद्यार्थियों में पंजाबी भाषा प्रति लगाव पैदा करने के यत्नों के अंतर्गत विभाग ने 20 ज़िला भाषा दफ़्तरों में पंजाबी साहित्यक सृजित करना और कविता गान मुकाबले करवाए है। इसीके साथ ही राज्य भर में पंजाबी बाल साहित्य क्विज़ मुकाबले करवाए गए, जिनके फ़ाईनल मुकाबले मोगा में रखे गए और भाषायी उत्तमता प्रति मुकाबले की भावना को उत्साहित करते विजेताओं को अलग- अलग पुरुस्कारों के साथ सम्मानित किया गया।
विभाग के साल भर चलने वाले विभिन्न साहित्यक समागमों में साहित्यक शख्सियतों के साथ पांच 'रू-ब-रू' प्रोगराम,'कहानी दरबार','सावन कवि दरबार'और नवांशहर में शहीद भगत सिंह को समर्पित एक विशेष सैमीनार शामिल है। इसके साथ ही विभाग ने तीन- भाषाई कविता गान, उर्दू मुशायरयों, हिंदी दिवस और संस्कृत दिवस जैसे समागम करवा कर भाषाई विभिन्नता का जश्न भी मनाया गया। कैबिनेट मंत्री ने आगे कहा कि इन प्रयासों में श्री फतेहगढ़ साहिब में ऐतिहासिक शहीदी जोड़ मेल में धार्मिक कविता मुकाबले करवाना भी शामिल है।
नवंबर 2025 का महीना 'पंजाबी महीने' के तौर पर समर्पित किया गया, जिसमें लोगों को उनकी भाषाई जड़ों के साथ जोड़ने के लिए राज्य भर में 10 प्रमुख समागम करवाए गए। उन्होंने कहा कि विभाग ने अपनी लाईब्रेरी में उपलब्ध 1.25 लाख किताबों के डिजिटल संग्रह के लिए एक बड़े स्तर का प्रोजैक्ट शुरू किया है, जिसमें पंजाबी, हिंदी, उर्दू, संस्कृत और अंग्रेज़ी शामिल है। यह पहल दुनिया भर के पाठकों को क्लासिक और समकालीन साहित्य तक डिजिटल पहुंच प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही परंपरा और प्रौद्यौगिकी के अतंर को खत्म करते विभाग की वैबसाईट पहले ही शब्दकोश और शब्दावलियों के भंडार साथ पंजाबी में विश्व क्लासिक साहित्य की सुविधा प्रदान कर रही है।
स. हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि भाषा सिर्फ़ संचार का साधन नहीं है; यह हमारी पहचान है। हमारे लेखकों के परिवारों की सहायता से ले कर 1.25 लाख किताबें आनलाईन डालने तक, हमारी सरकार यह यकीनी बना रही है कि पंजाबी भाषा की संभाल के साथ इसको विश्व स्तर पर अधिक से अधिक प्रफुल्लित किया जाए।


