छह सदियों पहले श्री गुरु रविदास जी ने उत्पीड़न और जातिगत भेदभाव के खिलाफ बुलंद की थी आवाज़: तरुनप्रीत सिंह सौंद
चंडीगढ़,/साहिबजादा अजीत सिंह नगर, 27 अगस्त:
पंजाब के पर्यटन एवं सांस्कृतिक मामले, बिजली, ग्रामीण विकास एवं पंचायत मंत्री स. तरुनप्रीत सिंह सौंद ने आज युवा पीढ़ी से श्री गुरु रविदास जी की शिक्षाओं को अपने जीवन में अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि गुरु साहिब ने आज से करीब छह सदियों पहले उत्पीड़न और जातिगत भेदभाव के खिलाफ अपनी आवाज़ बुलंद की थी।
श्री गुरु रविदास जी के 650वें प्रकाश पर्व को समर्पित पंजाब सरकार द्वारा आयोजित वर्ष भर चलने वाले समारोहों की श्रृंखला के तहत सीजीसी यूनिवर्सिटी, झंजेड़ी, मोहाली में आयोजित 8वें राज्य स्तरीय सेमिनार को संबोधित करते हुए स. तरुनप्रीत सिंह सौंद ने कहा कि श्री गुरु रविदास जी ने मानवता के आध्यात्मिक और सामाजिक उत्थान में महान योगदान दिया तथा श्रम की गरिमा और कड़ी मेहनत के सिद्धांत को विशेष महत्व दिया।
उन्होंने कहा कि श्री गुरु रविदास जी ने उस दौर में दबे-कुचले और कमजोर वर्गों के पक्ष में निर्भीकता से आवाज़ उठाई, जब लोगों के साथ जाति और अन्य सामाजिक विभाजनों के आधार पर भेदभाव और अन्याय किया जाता था। गुरु साहिब ने समानता, न्याय और मानवीय गरिमा के सार्वभौमिक सिद्धांतों का प्रचार किया तथा भेदभाव से मुक्त समाज की परिकल्पना की।
विद्यार्थियों से इन मूल्यों को अपने जीवन में अपनाने की अपील करते हुए स. सौंद ने कहा कि उन्हें लालच से दूर रहकर केवल अपनी वास्तविक जरूरतों तक सीमित रहना चाहिए, ताकि वे संतोषपूर्ण और सार्थक जीवन व्यतीत कर सकें। उन्होंने विद्यार्थियों को अच्छी पुस्तकों को पढ़ने की आदत विकसित करने के लिए भी प्रेरित किया, ताकि वे आध्यात्मिकता और मानवीय मूल्यों को बेहतर ढंग से समझ सकें।
मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री स. भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार स्वयं को सौभाग्यशाली मानती है कि उसे दो ऐतिहासिक अवसरों—श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस और अब श्री गुरु रविदास जी के 650वें प्रकाश पर्व—को मनाने का अवसर प्राप्त हुआ है।
उन्होंने कहा कि 650वें प्रकाश पर्व के वर्ष भर चलने वाले समारोहों के तहत राज्य भर में कीर्तन दरबार, विश्वविद्यालय एवं राज्य स्तरीय सेमिनार, ड्रोन शो, स्कूल प्रतियोगिताएं, शोभा यात्राएं और अन्य जागरूकता गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं।
युवा पीढ़ी को नशों से बचाने के लिए पंजाब सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख करते हुए स. सौंद ने कहा कि राज्य सरकार ने नशों के खिलाफ निर्णायक जंग छेड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि पंजाब भर में विकसित किए जा रहे 3100 खेल स्टेडियमों और मैदानों में से करीब 1000 पूरे किए जा चुके हैं। इनका मुख्य उद्देश्य युवाओं को खेलों और रचनात्मक गतिविधियों से जोड़कर नशों की बुराई से दूर रखना है।
उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार युवाओं को समाज के प्रति उनकी जिम्मेदारियों के प्रति संवेदनशील बनाने और उन्हें आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्रदान करने के लिए ऐसे सेमिनार और जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित कर रही है।
स. सौंद ने आगे जानकारी दी कि जालंधर के डेरा बल्लां के निकट 25 करोड़ रुपये की लागत से सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की तर्ज पर श्री गुरु रविदास जी बाणी अध्ययन केंद्र का निर्माण किया जा रहा है, जबकि इस परियोजना के लिए भूमि खरीद पर 11 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री स. भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली सरकार ने 650वें प्रकाश पर्व के वर्ष भर चलने वाले समारोहों के लिए प्रारंभिक तौर पर 100 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया है।
धार्मिक संदेश देते हुए ऑल इंडिया आदि धर्म मिशन, चरणछोह सचखंड बेगमपुरा, श्री खुरालगढ़ साहिब के राष्ट्रीय अध्यक्ष संत सतविंदर हीरा जी ने कहा कि श्री गुरु रविदास जी ने श्रम, समानता और सामाजिक न्याय का सशक्त संदेश दिया।
उन्होंने कहा कि गुरु साहिब ने कमजोर वर्गों के उत्पीड़न का विरोध किया और पूरी मानवता में समानता का उपदेश दिया। श्री गुरु रविदास जी द्वारा प्रतिपादित बेगमपुरा की अवधारणा ऐसे समानतापूर्ण समाज का आदर्श प्रस्तुत करती है, जहां सभी लोग जाति और रंग के भेदभाव से मुक्त होकर सम्मान और गरिमा के साथ जीवन व्यतीत कर सकें।
उन्होंने विद्यार्थियों से अपने लक्ष्यों पर केंद्रित रहने और किसी भी प्रकार के भटकाव से बचते हुए पूरी लगन के साथ अपने उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए कार्य करने का आह्वान किया। संत सतविंदर हीरा जी ने श्री गुरु रविदास जी को श्रद्धांजलि अर्पित करने और उनकी शिक्षाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए वर्ष भर चलने वाले कार्यक्रम आयोजित करने पर मुख्यमंत्री स. भगवंत सिंह मान की भी सराहना की।
आम आदमी पार्टी के एससी विंग के प्रदेश अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक स. गुरप्रीत सिंह जीपी ने कहा कि पंजाब और भारत की धरती महान गुरु साहिबानों और संतों की समृद्ध विरासत तथा शिक्षाओं से संपन्न होने के कारण धन्य है। उन्होंने कहा कि श्री गुरु रविदास जी द्वारा प्रतिपादित सिद्धांत आज के दौर में भी पूरी तरह प्रासंगिक और अपनाने योग्य हैं।
कुलपति डॉ. विनय गोयल ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और तेजी से हो रहे डिजिटलाइजेशन के वर्तमान युग में मानवीय मूल्यों का महत्व और भी बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि श्री गुरु रविदास जी की दृष्टि और शिक्षाएं आज भी तकनीकी प्रगति के इस दौर में मानवता को आध्यात्मिक ज्ञान और नैतिक मूल्यों की ओर मार्गदर्शन प्रदान करती हैं।
उन्होंने विद्यार्थियों से महान संतों और गुरु साहिबानों की शिक्षाओं के बारे में अधिक से अधिक पढ़ने और जानने के माध्यम से आध्यात्मिक जगत से जुड़ने का आह्वान किया।
इस अवसर पर अन्य लोगों के अलावा एस डी एम खरड़ स. गुरमीत सिंह, डीन स्टूडेंट वेलफेयर डॉ. सचिन, प्रोफेसर एवं मॉडरेटर डॉ. कृष्णा, उच्च शिक्षा विभाग के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. मनीष कुमार तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति, फैकल्टी सदस्य और विद्यार्थी उपस्थित थे।


