चेयरमैन बाल मुकंद शर्मा ने पंजाब राज्य खाद्य आयोग के कार्यों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता के माध्यम से सशक्त बनाने संबंधी एआई विशेषज्ञ निपुण स्याल के साथ सत्र की अध्यक्षता की
चंडीगढ़, 27 जून:
पंजाब राज्य खाद्य आयोग द्वारा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) विशेषज्ञ श्री निपुण स्याल के साथ एक विचार-विमर्श सत्र आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य यह जानना था कि उभरती हुई प्रौद्योगिकियां पंजाब में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए), 2013 के क्रियान्वयन को और अधिक पारदर्शी, कुशल तथा नागरिक-केंद्रित कैसे बना सकती हैं और आयोग के कार्यों को किस प्रकार सशक्त कर सकती हैं।
सत्र की अध्यक्षता करते हुए आयोग के चेयरमैन श्री बाल मुकंद शर्मा ने कहा कि आयोग एनएफएसए के क्रियान्वयन की निगरानी करने, शिकायतों की समीक्षा करने तथा नीतिगत सुधारों के लिए राज्य सरकार को सुझाव देने का कार्य करता है। उन्होंने कहा, "हम एआई को एक ऐसे प्रभावी साधन के रूप में देख रहे हैं, जो पारंपरिक निगरानी प्रणाली से आगे बढ़कर वास्तविक समय (रियल-टाइम) और डेटा-आधारित निगरानी व्यवस्था विकसित करने में सहायता करेगा।"
आयोग को संबोधित करते हुए श्री निपुण स्याल ने विस्तार से उन प्रमुख क्षेत्रों की जानकारी दी, जहां एआई आयोग के कार्यों को अधिक प्रभावी बना सकती है। उन्होंने बताया कि एआई-सक्षम एनालिटिक्स प्रतिदिन उचित मूल्य की दुकानों (एफपीएस) के ई-पीओएस लेन-देन के आंकड़ों का विश्लेषण कर सकती है, जिससे कम आपूर्ति, बंद पड़े राशन डिपो अथवा आवंटित एवं वितरित किए गए अनाज के बीच अंतर जैसी असामान्य स्थितियों की समय रहते पहचान की जा सकेगी। इससे आयोग को समस्याओं का शीघ्र पता लगाने और समय पर सुधारात्मक कार्रवाई करने में सहायता मिलेगी।
उन्होंने आगे बताया कि मशीन लर्निंग मॉडल प्रमाणित डाटासेट के साथ सुरक्षित क्रॉस-रेफरेंसिंग के माध्यम से संभावित डुप्लीकेट प्रविष्टियों, गलत भरी गई जानकारी तथा अधूरे विवरणों की पहचान कर लाभार्थियों के डाटा की शुद्धता में सुधार करने में सहायक हो सकते हैं।
शिकायत निवारण प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए एआई-संचालित बहुभाषी चैटबॉट तथा पंजाबी भाषा में वॉयस असिस्टेंट 24×7 शिकायत दर्ज कराने की सुविधा उपलब्ध करा सकते हैं।
इस अवसर पर आयोग के सदस्य जसवीर सिंह सेखों, विजय दत्त, चेतन प्रकाश ढालीवाल तथा सदस्य सचिव कनू थिंद सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे।


