जी.एन.डी.यू. ने रचा इतिहास: अब अंग्रेज़ी के साथ-साथ पंजाबी भी बनेगी शोध की भाषा

जी.एन.डी.यू. ने रचा इतिहास: अब अंग्रेज़ी के साथ-साथ पंजाबी भी बनेगी शोध की भाषा

अमृतसर, 28 जनवरी:

गुरु नानक देव विश्वविद्यालय (जी.एन.डी.यू.), अमृतसर ने पंजाबी-फर्स्ट एजुकेशन, रिसर्च एंड गवर्नेंस पॉलिसी-2026 को मंज़ूरी देकर एक ऐतिहासिक और जन-केंद्रित कदम उठाया है। इस नीति के तहत वैश्विक अकादमिक मानकों से समझौता किए बिना पंजाबी (गुरमुखी) को उच्च शिक्षा के केंद्र में रखा गया है।

इस निर्णय की घोषणा करते हुए गुरु नानक देव विश्वविद्यालय के उपकुलपति प्रो. करमजीत सिंह ने कहा कि इस नीति का उद्देश्य उच्च शिक्षा को समाज से दोबारा जोड़ना और विद्यार्थियों को उस भाषा में सीखने की सुविधा देना है, जिसे वे सबसे बेहतर ढंग से समझते हैं।

ऐसे समय में जब उच्च शिक्षा काफी हद तक समाज से कटती जा रही है, यह नीति विश्वविद्यालयों को स्थानीय लोगों की भाषा से पुनः जोड़ने का प्रयास करती है। जी.एन.डी.यू. द्वारा इस नीति को लागू किए जाने के बाद प्रमुख शोध कार्य—जैसे पीएचडी थीसिस, शोध निबंध (डिसर्टेशन), प्रोजेक्ट रिपोर्टें तथा फंडेड रिसर्च आउटपुट—प्राथमिक अकादमिक भाषा (आमतौर पर अंग्रेज़ी) के साथ-साथ पंजाबी (गुरमुखी) में भी जमा कराना अनिवार्य होगा।

प्रो. करमजीत सिंह ने कहा कि यह कदम जितना सरल है, उतना ही सशक्त भी है। पंजाब में उत्पन्न ज्ञान न केवल वैश्विक स्तर पर बल्कि पंजाबी बोलने वाले विद्यार्थियों, शिक्षकों, अभिभावकों, नीति-निर्माताओं और नागरिकों के लिए भी सुलभ होना चाहिए।

वैश्विक ज्ञान और स्थानीय पहुँच

विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया है कि पंजाबी भाषा में जमा कराए जाने वाले अकादमिक प्रोजेक्ट केवल औपचारिकता नहीं होंगे, बल्कि उनकी अकादमिक शुद्धता, मौलिक शोध-केन्द्रित दृष्टिकोण, स्पष्टता और सटीकता के आधार पर मूल्यांकन किया जाएगा। जहां शोध की गुणवत्ता का मूल्यांकन मुख्य रूप से उस भाषा में किया जाता रहेगा जिसमें अकादमिक प्रोजेक्ट जमा किया जाना अनिवार्य है, वहीं पंजाबी भाषा में प्रस्तुत कार्य यह सुनिश्चित करेगा कि विचारों, नवाचारों और शोध कार्यों को भाषा संबंधी बाधाओं का सामना न करना पड़े।

यह भी महत्वपूर्ण है कि जब तक अर्थ और शुद्धता बनी रहती है, पंजाबी लेखन की शैली को लेकर विद्यार्थियों के साथ किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जाएगा। इस नीति के तहत सीखने, सहभागिता और आत्मविश्वास को विशेष महत्व देते हुए भाषाई भेदभाव को दूर रखने पर ज़ोर दिया गया है।

यह विद्यार्थियों और पंजाब के लिए क्यों महत्वपूर्ण है

बहुत से विद्यार्थियों—विशेषकर ग्रामीण, सीमावर्ती और प्रथम-पीढ़ी की पृष्ठभूमि से आने वाले विद्यार्थियों—के लिए पंजाबी में अपने विचार व्यक्त करना अन्य भाषाओं की तुलना में अधिक सहज होता है। यह नीति उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय गतिशीलता बनाए रखते हुए शोध एवं अकादमिक परियोजनाओं से अधिक गहराई से जुड़ने का अधिकार देती है।

पंजाब के लिए इसके व्यापक और रचनात्मक परिणाम सामने आने की उम्मीद है। कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, कानून, पर्यावरण, उद्यमिता और समाज से जुड़े शोध कार्य अब पंजाबी में भी उपलब्ध होंगे, जिससे व्यापक जन-समझ, बेहतर नीति-निर्माण तथा स्कूलों, स्टार्ट-अप्स, संस्थानों और समुदायों में ज्ञान का तेज़ी से आदान-प्रदान संभव हो सकेगा।

उपकुलपति ने आगे कहा कि इस कदम से पंजाबी केवल संस्कृति की भाषा न रहकर विज्ञान, नवाचार और लोक-कल्याण की भाषा के रूप में स्थापित होगी।

मज़बूत अकादमिक सहायता प्रणाली

इस नीति के सख़्त और एकरूप क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए जी.एन.डी.यू. एक मज़बूत संस्थागत सहायता प्रणाली स्थापित करेगा, जिसमें शामिल होंगे:
विभाग-वार पंजाबी अकादमिक शब्दावली

पंजाबी अकादमिक लेखन और संदर्भ (रेफरेंस) गाइड

शब्दावली और अनुवाद सहायता के लिए समर्पित पंजाबी अकादमिक सहायता इकाई

दोनों भाषाओं में शोध को संचित करने वाली द्विभाषी डिजिटल रिपॉज़िटरी

इसके साथ ही आधुनिक साधनों, जिनमें एआई-आधारित अनुवाद भी शामिल है, का उपयोग किया जा सकेगा। इसकी शुद्धता और अकादमिक एकरूपता के लिए संबंधित शोधकर्ता उत्तरदायी होंगे।

चरणबद्ध और निष्पक्ष क्रियान्वयन

इस नीति के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा:

पहला वर्ष: डॉक्टरेट थीसिस और फंडेड रिसर्च

दूसरा वर्ष: शोध निबंध (डिसर्टेशन)

तीसरा वर्ष: प्रमुख प्रोजेक्ट रिपोर्टें और संस्थागत शोध

केवल अत्यधिक तकनीकी या कानूनी रूप से सीमित मामलों में आंशिक छूट दी जाएगी, बशर्ते अनिवार्य रूप से पंजाबी सारांश जमा कराया जाए।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप

यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की भावना के पूर्णतः अनुरूप है, जो उच्च शिक्षा में बहुभाषी शिक्षा, मातृ-भाषा आधारित शिक्षा और भाषाई बाधाओं को दूर करने की वकालत करती है। जी.एन.डी.यू. का यह मॉडल दर्शाता है कि क्षेत्रीय भाषाएं किस प्रकार वैश्विक अकादमिक उत्कृष्टता के साथ समन्वय स्थापित कर सकती हैं।

अधिक समावेशी विश्वविद्यालय की ओर महत्वपूर्ण कदम

द्विभाषी शोध को संस्थागत रूप देकर जी.एन.डी.यू. न केवल अंतर-सांस्कृतिक समझ को मज़बूती दे रहा है, बल्कि सरकारी विश्वविद्यालयों की शिक्षा और समाज के बीच सेतु के रूप में भूमिका की भी पुष्टि कर रहा है।

विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए प्रो. करमजीत सिंह ने कहा कि जी.एन.डी.यू. उत्कृष्टता, समानता और सांस्कृतिक नेतृत्व के लिए समर्पित है। पंजाबी-फर्स्ट एजुकेशन, रिसर्च एंड गवर्नेंस पॉलिसी-2026 यह सुनिश्चित करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है कि पंजाब में उच्च शिक्षा वैश्विक स्तर की, अपनी जड़ों से जुड़ी और सामाजिक रूप से अर्थपूर्ण बनी रहे।

यह नीति आगामी अकादमिक सत्र से लागू की जाएगी।