फोरेंसिक रिपोर्ट ने साजिश को पूरी तरह से किया खारिज
*चंडीगढ़/मोहाली, 18 जून*
आम आदमी पार्टी (आप) के वरिष्ठ नेता और कैबिनेट मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने 'आप' पंजाब के मीडिया प्रभारी बलतेज पन्नू के साथ गुरुवार को एक फर्जी और मनगढ़ंत वीडियो के जरिए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान को बदनाम करने, धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने और पंजाब के सामाजिक सद्भाव को अस्थिर करने की एक घिनौनी राजनीतिक साजिश का पर्दाफाश किया।
भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त दो स्वतंत्र प्रयोगशालाओं (लैब्स) द्वारा की गई फोरेंसिक जांच का हवाला देते हुए नेताओं ने कहा कि प्रोपेगेंडा अभियान को वैज्ञानिक सबूतों द्वारा पूरी तरह से नष्ट कर दिया गया है। वीडियो के 1,191 फ्रेम्स के तकनीकी विश्लेषण ने निर्णायक तौर पर साबित किया है कि वायरल वीडियो में दिखाई देने वाला व्यक्ति सीएम भगवंत सिंह मान नहीं हैं।
'आप' नेताओं ने कहा कि भगवंत मान सरकार द्वारा 'जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार एक्ट' लागू किए जाने से बौखलाई पंथ विरोधी और पंजाब विरोधी ताकतों ने यह साजिश रची है। उन्होंने दावा किया कि इस मनगढ़ंत वीडियो को बनाने और वायरल करने वालों की पहचान करके उनकी बारीकी से जांच की जाएगी और उन्हें सख्त सजा दिलाई जाएगी।
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए वरिष्ठ 'आप' नेता और मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि पिछले कई दिनों से अकाली दल के नेता एक फर्जी वीडियो वायरल करके और उसे मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान से झूठा जोड़कर जनता की भावनाओं को भड़काने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने कहा, "यह सारा घटनाक्रम एक बड़ी राजनीतिक साजिश का हिस्सा था, जिसका उद्देश्य एक ऐसे लोकप्रिय मुख्यमंत्री को बदनाम करना था जो लगातार पंजाब के लोगों के लिए काम कर रहे हैं।"
हरपाल सिंह चीमा ने कहा, "सच अब पंजाब के लोगों के सामने आ गया है। जिन लोगों ने एक मनगढ़ंत वीडियो का सहारा लेकर जनता को गुमराह करने और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने की कोशिश की थी, वे पूरी तरह बेनकाब हो चुके हैं।"
फोरेंसिक जांच के विवरण साझा करते हुए हरपाल सिंह चीमा ने बताया कि भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त दो स्वतंत्र लेबोरेट्रीज ने वायरल वीडियो की बारीकी से जांच की और वे एक ही नतीजे पर पहुंचीं। फोरेंसिक विश्लेषण में वीडियो के कुल 1,191 फ्रेम्स की जांच की गई। चेहरे के नैन-नक्श, कद, शारीरिक बनावट, खड़े होने का तरीका, हिलने-डुलने के पैटर्न, साइड प्रोफाइल और बैक प्रोफाइल समेत हर पहलू का गहराई से विश्लेषण किया गया। रिपोर्टों में स्पष्ट निष्कर्ष निकाला गया है कि वीडियो में दिखाया गया व्यक्ति सीएम भगवंत सिंह मान से बिल्कुल मेल नहीं खाता।
मंत्री ने बताया कि फोरेंसिक रिपोर्टों के मुताबिक वीडियो में नजर आ रहे व्यक्ति का कद लगभग 5 फुट 10 इंच होने का अनुमान है, जबकि सीएम भगवंत सिंह मान का कद 5 फुट 8 इंच है। उन्होंने कहा कि शारीरिक बनावट, कंधों की बनावट, चेहरे की विशेषताओं और समग्र पोस्चर में भी बड़े अंतर पाए गए हैं।
हरपाल सिंह चीमा ने कहा, "दोनों लेबोरेट्रीज ने स्वतंत्र तौर पर एक ही निष्कर्ष निकाला और वीडियो में दिखाई देने वाले व्यक्ति और मुख्यमंत्री के बीच कोई मेल नहीं पाया।"
अकाली दल को करारा जवाब देते हुए हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि पार्टी का राजनीतिक लाभ के लिए धार्मिक मुद्दों का शोषण करने का एक लंबा और दुर्भाग्यपूर्ण इतिहास रहा है, जबकि वह पंथ की मर्यादा की रक्षा करने में बार-बार नाकाम रही है। उन्होंने कहा, "पंजाब के लोग 1986 के नकोदर कांड को नहीं भूले, जब अकाली दल की सरकार के दौरान श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पवित्र स्वरूपों को आग के हवाले कर दिया गया था। वे उसके बाद हुई पुलिस फायरिंग को भी नहीं भूले, जिसमें इंसाफ की मांग कर रहे चार सिख नौजवान शहीद हो गए थे।"
हरपाल सिंह चीमा ने आगे अकाली-भाजपा गठबंधन के शासनकाल में 2015 की बेअदबी की घटनाओं और बहबल कलां तथा कोटकपूरा में हुई पुलिस फायरिंग की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा, "तरीका वही है। जब भी अकाली दल और भाजपा सत्ता में थे, बेअदबी की घटनाएं हुईं और इंसाफ नहीं दिया गया। पंजाब के लोग इन दर्दनाक अध्यायों को नहीं भूले हैं।"
मंत्री ने कहा कि 2015 की बेअदबी की घटनाओं के बाद सत्ता में दो साल रहने के बावजूद अकाली दल की सरकार जस्टिस जोरा सिंह कमीशन की सिफारिशों पर भी कार्रवाई करने में असफल रही। उन्होंने आगे कहा, "बाद में आई कांग्रेस सरकारों ने कई विशेष जांच टीमें (एसआईटी) बनाईं, फिर भी 'आप' सरकार के सत्ता में आने तक कोई सार्थक कार्रवाई नहीं हो सकी।"
हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि अकाली दल ने बार-बार पंथ के नाम पर वोट मांगे हैं और खुद को पंथक हितों का रक्षक बताया है, लेकिन सरकार में उसका रिकॉर्ड अलग ही कहानी बयान करता है। उन्होंने कहा कि जब भी अकाली दल सत्ता में आया, उसकी देख-रेख में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की मर्यादा को ठेस पहुंचाने वाली घटनाएं हुईं, जबकि जिम्मेदार लोगों को सुरक्षा मिलती रही। हरपाल सिंह चीमा ने कहा, "अकाली दल का राजनीतिक फायदे के लिए पंथक भावनाओं का शोषण करने का इतिहास रहा है। यह पंथ के नाम पर वोट मांगता है लेकिन उन मूल्यों और सिद्धांतों को कायम रखने में बार-बार नाकाम रहता है, जिनका प्रतिनिधित्व करने का यह दावा करता है।"
भगवंत मान सरकार द्वारा की गई पहलों पर रोशनी डालते हुए हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि भगवंत मान सरकार ने 'जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार एक्ट, 2026' बनाया है, जिसमें बेअदबी की घटनाओं के लिए उम्रकैद और भारी आर्थिक जुर्माने समेत सख्त सजाओं का प्रावधान है।
उन्होंने कहा, "जब से इस ऐतिहासिक कानून के आसपास चर्चा शुरू हुई है, कुछ ताकतें मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान को निशाना बनाने और बदनाम करने की नाकाम कोशिशें कर रही हैं। यह फर्जी वीडियो उसी बड़ी साजिश का हिस्सा है।"
जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी देते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार मनगढ़ंत सामग्री तैयार करने या वायरल करने में शामिल किसी भी व्यक्ति को नहीं बख्शेगी। उन्होंने कहा, "पंथ के खिलाफ साजिश रचना एक गंभीर अपराध है। इस फर्जी वीडियो को बनाने और वायरल करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्हें ढूंढकर इंसाफ के कटघरे में लाया जाएगा, चाहे वे कहीं भी हों। इस गंदी साजिश में शामिल हर व्यक्ति को कानून के सामने जवाबदेह बनाया जाएगा।"
इस मौके पर बोलते हुए 'आप' पंजाब के मीडिया प्रभारी बलतेज पन्नू ने फर्जी वीडियो अभियान को भारतीय राजनीतिक इतिहास में किसी मौजूदा मुख्यमंत्री को बदनाम करने की सबसे शर्मनाक कोशिशों में से एक करार दिया। उन्होंने आगे कहा, "मनगढ़ंत वीडियो को सबसे पहले पत्रकारों में इस इरादे से वायरल किया गया था कि इसे असली सामग्री के रूप में प्रसारित किया जा सके। हालांकि, जिम्मेदार पत्रकारों ने इसकी संदिग्ध प्रकृति को पहचानते हुए इस सामग्री को प्रसारित करने से इनकार कर दिया।"
बलतेज पन्नू ने कहा, "जब वे भरोसेमंद मीडिया चैनलों के जरिए फर्जी वीडियो को प्रसारित करवाने में असफल रहे, तो उन्होंने अन्य साधनों के जरिए सीएम भगवंत सिंह मान को बदनाम करने की अपनी साजिश को तेज कर दिया। भारत के राजनीतिक इतिहास में शायद यह पहली बार है कि किसी मौजूदा मुख्यमंत्री के खिलाफ ऐसी घटिया और दुर्भाग्यपूर्ण कोशिश की गई है।"
बलतेज पन्नू ने कहा कि भगवंत मान सरकार सभी क्षेत्रों में नतीजे दे रही है और उसका शासन रिकॉर्ड अपने आप में एक मिसाल है। उन्होंने कहा, "भगवंत मान सरकार ने धर्म, जाति या क्षेत्र के आधार पर बिना किसी भेदभाव के समाज के हर वर्ग के लिए लगातार काम किया है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब ने निर्णायक शासन और सार्थक सुधार देखे हैं।"
पंजाब के मीडिया प्रभारी ने कहा कि 2015 के बेअदबी के मामलों और उसके बाद हुई पुलिस फायरिंग की घटनाओं से संबंधित जांच में जिन लोगों के नाम आए हैं, वे इन मामलों में हो रही प्रगति से असहज थे और इसलिए झूठे प्रचार के जरिए ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे थे।
उन्होंने कोटकपूरा गोलीकांड मामले में चल रही कानूनी कार्रवाई का भी हवाला दिया और दावा किया कि कुछ राजनीतिक नेता सीएम भगवंत सिंह मान के खिलाफ बदनामी की मुहिम चलाकर खुद को जवाबदेही से बचाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने आगे कहा, "पंजाब के लोग स्पष्ट तौर पर देख सकते हैं कि कौन दोषियों को बचाने की कोशिश कर रहा है और कौन इंसाफ की लड़ाई लड़ रहा है। सच अब वैज्ञानिक फोरेंसिक सबूतों के जरिए सामने आ गया है।"
अगली कार्रवाई की घोषणा करते हुए बलतेज पन्नू ने कहा कि आम आदमी पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल पंजाब के डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (डीजीपी) से मिलेगा और इस साजिश की व्यापक जांच की औपचारिक मांग करेगा। उन्होंने आगे कहा, "हम इस मनगढ़ंत वीडियो के पीछे मौजूद व्यक्तियों और संगठनों की गहराई से जांच की मांग करेंगे। जिन लोगों ने धार्मिक भावनाओं को भड़काने, झूठी अफवाह फैलाने और पंजाब के सामाजिक सद्भाव को अस्थिर करने की कोशिश की है, उन्हें सख्त कानूनी परिणामों का सामना करना होगा।"
बलतेज पन्नू ने घोषणा की कि 'आप' का एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही पंजाब के डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (डीजीपी) से मिलेगा और मनगढ़ंत वीडियो के पीछे की पूरी साजिश की व्यापक जांच की औपचारिक मांग करेगा। उन्होंने कहा कि पार्टी धार्मिक भावनाओं को भड़काने और सीएम भगवंत सिंह मान को बदनाम करने के उद्देश्य से इस फर्जी सामग्री को तैयार करने, वायरल करने और बढ़ावा देने में शामिल हर व्यक्ति, संगठन और नेटवर्क की पहचान करने की मांग करेगी। बलतेज पन्नू ने कहा, "इस साजिश के पीछे वालों की पहचान होनी चाहिए, उन्हें बेनकाब किया जाना चाहिए और इंसाफ के कटघरे में लाया जाना चाहिए। पंजाब मनगढ़ंत प्रोपेगेंडा के जरिए सांप्रदायिक सद्भाव को भंग करने और जनता को गुमराह करने की ऐसी जानबूझकर की गई कोशिशों को बर्दाश्त नहीं कर सकता।"
दोनों नेताओं ने दोहराया कि फोरेंसिक जांच के निष्कर्षों ने वायरल वीडियो के आसपास बनाए गए झूठे आख्यान को पूरी तरह नष्ट कर दिया है और इसे बनाने तथा फैलाने वालों की पंथ विरोधी और पंजाब विरोधी राजनीति को बेनकाब कर दिया है। उन्होंने जोर देकर कहा, "सच की जीत हुई है। फर्जी वीडियो बेनकाब हो चुका है। साजिश बेनकाब हो चुकी है। पंजाब के लोग उन लोगों को कभी माफ नहीं करेंगे जिन्होंने राजनीतिक लाभ के लिए धार्मिक भावनाओं का शोषण करने और लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए मुख्यमंत्री को बदनाम करने की कोशिश की।"


