मुख्यमंत्री सेहत योजना: 104 हेल्पलाइन डिस्चार्ज के बाद भी मरीजों से संपर्क बनाए रखती है
चंडीगढ़, 28 अगस्त 2026:
मानसा के हरदेव सिंह के लिए मुख्यमंत्री सेहत योजना (एमएमएसवाई) के तहत अस्पताल से डिस्चार्ज होना उपचार का अंत नहीं था। डीएच बठिंडा में ऑर्थोपेडिक उपचार करवाने के बाद उन्हें पंजाब की 104 हेल्थ हेल्पलाइन से फोन आया। इस दौरान उनसे उनके उपचार, स्वास्थ्य तथा अस्पताल में मिले अनुभव के बारे में जानकारी ली गई। हरदेव सिंह के लिए यह फोन इस बात का भरोसा दिलाने वाला था कि डिस्चार्ज के बाद भी सरकार उनके साथ जुड़ी हुई है।
हरदेव सिंह ने कहा, “मुझे मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत कैशलेस उपचार मिला और इसके बाद यह पूछने के लिए फोन किया गया कि मैं ठीक हूं या नहीं।” उन्होंने बताया कि सरकार ने न केवल कैशलेस उपचार सुनिश्चित कर उनके परिवार को आर्थिक बोझ से बचाया, बल्कि घर लौटने के बाद भी उनकी सेहत के बारे में जानकारी ली।
उन्होंने आगे कहा, “उन्होंने मेरे इलाज, मेरी सेहत, मुझे हुई किसी परेशानी और मुझे दवाइयां मिली हैं या नहीं, इसके बारे में पूछा। इससे मुझे महसूस हुआ कि कोई अभी भी मेरी देखभाल कर रहा है।”
होशियारपुर के बलदेव सिंह, जिन्होंने एसडीएच दसूहा में ऑर्थोपेडिक उपचार करवाया, ने भी इसी तरह का अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि उन्हें बिना कोई भुगतान किए उपचार मिला, डिस्चार्ज के बाद आवश्यक दवाइयां मिलीं और इसके बाद 104 टीम ने फोन करके उनकी सेहत के बारे में जानकारी ली।
बलदेव सिंह ने कहा, “मुझे बिना कोई भुगतान किए इलाज मिला, डिस्चार्ज के बाद जरूरी दवाइयां मिलीं और फिर 104 टीम ने फोन करके मेरा हाल-चाल पूछा। अच्छा लगता है जब अस्पताल से घर लौटने के बाद भी सरकार आपको नहीं भूलती।”
हरदेव सिंह और बलदेव सिंह के अनुभव मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत उपचार के बाद किए जाने वाले फॉलो-अप के महत्व को रेखांकित करते हैं। यह पहल केवल कैशलेस उपचार उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है। किसी भी परिवार के लिए अस्पताल में भर्ती होना चिंता का समय हो सकता है। इस दौरान दवाइयों की व्यवस्था, स्वास्थ्य में सुधार पर नजर रखना तथा डिस्चार्ज के बाद की स्थिति को लेकर कई तरह की चिंताएं बनी रहती हैं। 104 हेल्पलाइन के माध्यम से किया जाने वाला फॉलो-अप इस महत्वपूर्ण चरण में मरीज को स्वास्थ्य प्रणाली से जोड़े रखने का प्रयास है।
इस सुविधा के बारे में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा, “104 हेल्पलाइन मरीज के उपचार के बाद भी स्वास्थ्य प्रणाली को उसके साथ जोड़े रखती है। उपचार के बाद लाभार्थियों से संपर्क किया जाता है और उनके अनुभव, अस्पताल में भर्ती होने, उपचार से संबंधित रिकॉर्ड, डिस्चार्ज के बाद मिली दवाइयों तथा उन्हें प्राप्त स्वास्थ्य सेवाओं से संतुष्टि के बारे में पूछा जाता है। हमारा उद्देश्य मरीज को कैशलेस उपचार उपलब्ध कराना, उसे डिस्चार्ज करना और उसके बाद मरीज की प्रतिक्रिया सुनना है।”
उपचार के बाद की जाने वाली ये फोन कॉल लाभार्थियों को अपने अनुभव साझा करने का अवसर देती हैं। इससे उनकी प्रतिक्रिया केवल अस्पताल के रिकॉर्ड तक सीमित नहीं रहती। हेल्पलाइन के माध्यम से यह भी पता किया जाता है कि मरीजों को उपचार के बाद आवश्यक दवाइयां मिली हैं या नहीं। साथ ही, उन्हें अस्पताल में भर्ती होने और उपचार से संबंधित महत्वपूर्ण विवरणों की पुष्टि करने का अवसर भी मिलता है।
महत्वपूर्ण रूप से, फॉलो-अप इस सिद्धांत को मजबूत करता है कि डिस्चार्ज के साथ स्वास्थ्य लाभ की प्रक्रिया समाप्त नहीं होती। लाभार्थियों के साथ संपर्क बनाए रखकर स्वास्थ्य प्रणाली उपचार के बाद सामने आने वाली चिंताओं की पहचान कर सकती है, जमीनी स्तर पर मरीजों के अनुभवों को समझ सकती है और उनकी प्रतिक्रिया का उपयोग स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर बनाने के लिए कर सकती है।
डॉ. बलबीर सिंह ने आगे कहा, “डिस्चार्ज के साथ स्वास्थ्य सेवाएं समाप्त नहीं होनी चाहिए। मुख्यमंत्री सेहत योजना में यह प्रक्रिया तब भी जारी रहती है, जब हम लाभार्थी को फोन करते हैं, उसका अनुभव सुनते हैं और उसकी प्रतिक्रिया स्वास्थ्य प्रणाली तक पहुंचाते हैं। हमारा उद्देश्य उपचार उपलब्ध कराना, फॉलो-अप करना, प्रतिक्रिया लेना और जरूरत पड़ने पर कार्रवाई करना है, ताकि हर मरीज को महसूस हो कि उसकी बात सुनी जा रही है और हर आवाज पंजाब की स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने में योगदान देती है।”
104 हेल्थ हेल्पलाइन लाभार्थियों को उपचार के बाद किए जाने वाले फॉलो-अप कॉल के अलावा भी विभिन्न सेवाएं उपलब्ध करवाती है। इसके माध्यम से नि:शुल्क चिकित्सकीय सलाह एवं मार्गदर्शन, मनोवैज्ञानिक एवं नशामुक्ति परामर्श, शिकायतों के निपटारे तथा मुख्यमंत्री सेहत योजना सहित विभिन्न सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के बारे में जानकारी उपलब्ध करवाई जाती है।
इस एकीकृत दृष्टिकोण के माध्यम से मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना का उद्देश्य सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक संवेदनशील, जवाबदेह और मरीज-केंद्रित बनाना है—न केवल कैशलेस उपचार तक पहुंच सुनिश्चित करके, बल्कि मरीजों के घर लौटने के बाद भी उनके साथ संवाद का एक प्रभावी माध्यम बनाए रखकर।


