पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की जांच के अनुसार सतलुज में मछलियों के मरने के पीछे औद्योगिक प्रदूषण की कोई भूमिका नहीं

पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की जांच के अनुसार सतलुज में मछलियों के मरने के पीछे औद्योगिक प्रदूषण की कोई भूमिका नहीं

चंडीगढ़, 24 अप्रैल:

पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पी.पी.सी.बी.) ने जिला फिरोजपुर में हरिके हेडवर्क्स के पास सतलुज नदी में मछलियों के मरने संबंधी रिपोर्ट किए गए मामले में विस्तृत फील्ड जांच पूरी कर ली है। जांच से पता चलता है कि विश्लेषित मानकों के आधार पर नदी के उस हिस्से, जहां से नमूने लिए गए थे, में औद्योगिक प्रदूषण का कोई जहरीला तत्व नहीं पाया गया।

बोर्ड को पिछले दिनों 3 अप्रैल को एक वीडियो प्राप्त हुई थी, जिसमें मरी हुई मछलियां दिखाई दे रही थीं। पी.पी.सी.बी. की एक टीम ने अगले ही दिन वैज्ञानिक स्टाफ और मत्स्य पालन विभाग के साथ गांव गट्टा बादशाह/दीनेके के पास हरिके हेडवर्क्स के आसपास स्थल का निरीक्षण किया। फील्ड निरीक्षणों ने हरिके हेडवर्क्स के डाउनस्ट्रीम की कई जगहों पर, खासकर फिश लैडर के पास और बैराज के कुछ विशेष गेटों के अंदर, मरी हुई मछलियों की मौजूदगी तथा अपस्ट्रीम में कोई मरी हुई मछली न होने की पुष्टि की।

प्रारंभिक परीक्षण परिणामों में सामान्य ऑक्सीजन और अम्लीयता स्तर पाए गए, जो जलीय जीवन के लिए उपयुक्त हैं। नमूनों के परिणामों में कोई गंभीर जहरीलापन नहीं पाया गया, जो यह दर्शाता है कि ये मछलियां किसी औद्योगिक प्रदूषण के कारण नहीं मरीं।

डिजॉल्व्ड ऑक्सीजन स्तर मुख्य रूप से 6.2–7.7 मिलीग्राम/लीटर के बीच था, जो जलीय जीवन के लिए उपयुक्त है।

पी.एच. स्तर 6.8 से 7.5 तक स्वीकार्य सीमाओं के भीतर था।

भारी धातुओं, ट्रेस एलिमेंट्स और कीटनाशकों का विश्लेषण भी निर्धारित सीमाओं के भीतर पाया गया।

मत्स्य पालन विभाग द्वारा एकत्र किए गए और गुरु अंगद देव वेटरनरी एवं एनिमल साइंसेज यूनिवर्सिटी द्वारा जांचे गए मछली के नमूने भी डी-कंपोजिशन के उन्नत चरण में होने के कारण मृत्यु के सही कारणों का पता नहीं लगा सके।

पिछला इतिहास बताता है कि प्रजनन सीजन यानी अप्रैल और मई के दौरान मछलियों की मृत्यु की घटनाएं सामान्य होती हैं।

उल्लेखनीय है कि सतलुज में मछलियों की मौत के किसी भी स्थानीय या अन्य कारणों का पता लगाने के लिए बोर्ड द्वारा आगे की जांच की जा रही है। 

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