अकाली दल अब पुरानी बात है, डायनासोर की तरह, इसकी वापसी नामुमकिन है: बलतेज पन्नू

अकाली दल अब पुरानी बात है, डायनासोर की तरह, इसकी वापसी नामुमकिन है: बलतेज पन्नू

बलतेज पन्नू का बलविंदर भूंदड़ पर पलटवार: आपके अपने लोग अब आपके संपर्क में नहीं हैं 3 नए अकाली दल इसलिए सामने आए हैं क्योंकि आपके अपने नेता अब आपके साथ नहीं हैं: बलतेज पन्नू बलविंदर सिंह भूंदड़ का दूसरी पार्टियों के नेताओं के संपर्क में होने का दावा अकाली दल की राजनीतिक हताशा का सबूत है: बलतेज पन्नू चंडीगढ़, 25 अक्टूबर आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू ने शिरोमणि अकाली दल (ब) के सीनियर लीडर बलविंदर सिंह भूंदड़ के उस बयान पर तीखा जवाब दिया है जिसमें उन्होंने कहा था कि "दूसरी पार्टियों के नेता हमारे संपर्क में हैं" और कहा कि अपनी खोई हुई राजनीतिक मौजूदगी बचाने के लिए जूझ रहे अकाली लीडर अब खोखले झूठ और बेतुके दावों का सहारा ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिस पार्टी को पंजाब के लोगों ने पूरी तरह से नकार दिया है और किनारे कर दिया है, उसके नेताओं का ऐसे खोखले बयान देना उनकी निराशा और बौखलाहट को साफ दिखाता है। बलतेज पन्नू ने भूंदड़ के बयान पर तंज कसते हुए 'एक्स' पर लिखा, ''अकाली नेता बलविंदर सिंह भूंदड़ कहते हैं कि सभी पार्टियों के लोग हमारे टच में हैं! भूंदड़ साहब, आपके अपने लोग आपके संपर्क में नहीं हैं, अगर होते तो तीन नए अकाली दल नहीं बनते! अकाली दल बादल अब पुरानी बात हो गई है "न डायनासोर लौटेंगे, न आप"। पन्नू ने आगे कहा कि बादल परिवार ने अपने निजी फायदे और पद के लिए पंजाब की राजधानी, युवाओं और भाईचारे को बहुत नुकसान पहुंचाया है। उनके गलत फैसलों और पंथिक राजनीति से मुंह मोड़ने की वजह से आज अकाली दल से उनके पुराने टकसाली और सीनियर साथी भी बगावत करके चले गए हैं। आज अकाली दल अंदरूनी बगावत और गुटबाजी की वजह से पूरी तरह टूट चुका है, जिसकी वजह से लोगों का ध्यान भटकाने के लिए उनके पास ऐसे झूठे बयान देने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पंजाब के लोग अब बहुत समझदार हो चुके हैं और वे अकाली हैं। पार्टी दोबारा किसी झूठे दावे में नहीं फंसेगी। आम आदमी पार्टी सरकार मुख्यमंत्री सिंह मान की लीडरशिप में पंजाब की तरक्की, खुशहाली और लोगों के हित के लिए दिन-रात मेहनत कर रही है, जबकि विरोधी पार्टियों के पास कोई ठोस मुद्दा नहीं बचा है। दूसरी पार्टियों के लोगों से संपर्क में होने का दावा करने के बजाय, अकाली नेताओं को अपनी टूटती पार्टी को बचाने की चिंता करनी चाहिए।