बंदी सिंघों की रिहाई के लिए पंजाब सरकार उठाएगी सभी कानूनी और संवैधानिक कदम: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान
चंडीगढ़, 6 अक्टूबर:
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज जोर देकर कहा कि जेलों में कैद बंदी सिंघों के लंबे समय से लटकते आ रहे मसले को अनिश्चित काल तक लटकता नहीं रहने दिया जा सकता। उन्होंने बंदी सिंघ इंसाफ मोर्चे द्वारा बनाई गई चार सदस्यीय कमेटी को भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार इसके जल्द समाधान के लिए हर संभव कानूनी और संवैधानिक कदम उठाएगी। गुरदीप सिंह बठिंडा, एडवोकेट जसपाल सिंह मंझपुर, पाल सिंह फ्रांस और बलविंदर पाल सिंह पर आधारित कमेटी के साथ बैठक के दौरान मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि जो जायज कदम कई साल पहले उठाए जाने चाहिए थे, लेकिन नहीं उठाए गए, उन्हें अब प्राथमिकता के आधार पर उठाया जाएगा। उन्होंने दोहराया कि पंजाब सरकार न्याय के पक्ष में दृढ़ता से खड़ी है।
अपने एक्स हैंडल पर जानकारी साझा करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, "बंदी सिंघों की रिहाई को लेकर बनी चार सदस्यीय कमेटी, जिसमें स. गुरदीप सिंह बठिंडा, एडवोकेट जसपाल सिंह मंझपुर, स. पाल सिंह फ्रांस और स. बलविंदर पाल सिंह शामिल थे, के साथ अहम बैठक की। कमेटी सदस्यों के विचार और मांगों को बड़े ध्यान से सुना। मैंने कमेटी को भरोसा दिलाया कि पंजाब सरकार इस मसले के जल्दी से जल्दी उचित समाधान के लिए प्रतिबद्ध है।" उन्होंने कहा कि जो जायज और कानूनी कदम पिछली सरकारों ने सालों तक नहीं उठाए, उन्हें पंजाब सरकार प्राथमिकता के आधार पर उठाएगी ताकि इस मसले का जल्दी निपटारा हो सके। पंजाब सरकार हमेशा न्याय के साथ डटकर खड़ी है। इंकलाब जिंदाबाद।
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, "मैंने बंदी सिंघों की रिहाई बारे उनके विचारों और अपील को पूरी गहराई से सुना। देश भर की विभिन्न जेलों में अपनी सजाएं पूरी करने के बावजूद बंद पड़े सिख कैदियों के मसले को अनिश्चित काल तक अनदेखा नहीं छोड़ा जा सकता। यह हर किसी के लिए एक भावनात्मक और संवेदनशील मुद्दा है। मैंने कमेटी को भरोसा दिलाया है कि पंजाब सरकार इस मामले के उचित और तत्काल समाधान के लिए हर जायज, कानूनी और संवैधानिक रास्ता अपनाने के लिए प्रतिबद्ध है।"
मुख्यमंत्री ने कहा, "सालों से इस मुद्दे से संबंधित कई जायज कदम उठाने की स्थिति में होने के बावजूद विभिन्न सरकारों ने अपने कार्यकाल के दौरान इस अहम मुद्दे को टाले रखा। जो कदम सालों पहले उठाए जाने चाहिए थे, लेकिन नहीं उठाए गए, उन पर अब प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।"
उन्होंने कहा, "हम संविधान और कानून के दायरे में रहकर यह कदम सख्ती से उठाएंगे। इस मुद्दे में न्याय, मानवता और उन व्यक्तियों के अधिकारों का मामला शामिल है, जो पहले ही लंबे समय तक कैद काट चुके हैं।"
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने दृढ़ता से कहा, "पंजाब सरकार संवैधानिक और कानूनी ढांचे का पूरा सम्मान करते हुए इस मामले को संवेदनशीलता और जिम्मेवारी से हल करेगी। हम बंदी सिंघों के मसले का अर्थपूर्ण और तत्काल समाधान खोजने के लिए कानून और संविधान के दायरे में रहते हुए हर संभव कोशिश करेंगे।"
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, "जब कानूनी तरीकों से न्याय दिलाने की बात आती है तो मेरी सरकार जरूरी कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगी। पंजाब सरकार हमेशा न्याय के साथ डटकर खड़ी रही है और पंजाब के लोगों से संबंधित हर जायज मसले को जमहूरी, संवैधानिक और कानूनी तरीकों से हल करने के लिए काम जारी रखेगी।"


