मुख्यमंत्री के आदेश पर सहकारिता विभाग की नकली यूरिया आपूर्ति मामले में अधिकारियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई

मुख्यमंत्री के आदेश पर सहकारिता विभाग की नकली यूरिया आपूर्ति मामले में अधिकारियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई


चंडीगढ़, 28 जून


किसानों के हितों की रक्षा के लिए बड़ी कार्रवाई करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार ने टेक्निकल ग्रेड यूरिया के स्थान पर सब्सिडी वाले एग्रीकल्चर ग्रेड (नीम-कोटेड) यूरिया की आपूर्ति के मामले में 7 अधिकारियों को चार्जशीट जारी की है, जबकि एक अन्य अधिकारी का तबादला किया गया है।

इस संबंध में आज यहां जानकारी देते हुए पंजाब सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि सहकारिता विभाग ने टेक्निकल ग्रेड यूरिया के स्थान पर सब्सिडी वाले एग्रीकल्चर ग्रेड (नीम-कोटेड) यूरिया के उपयोग से जुड़े मामले में त्वरित, व्यापक और समयबद्ध कार्रवाई की है। शिकायत मिलने के बाद सहकारिता विभाग के प्रशासनिक सचिव ने मार्कफेड तथा मिल्कफेड के प्रबंध निदेशकों को तत्काल तथ्य-खोज जांच कराने, लापरवाही के लिए जिम्मेदारी तय करने तथा बिना किसी देरी के कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। साथ ही टेक्निकल ग्रेड यूरिया की खरीद के लिए जिम्मेदार महाप्रबंधकों एवं संबंधित अधिकारियों/कर्मचारियों के विरुद्ध 25 जून को ‘मेजर पेनल्टी’ (कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई) शुरू करने के निर्देश भी जारी किए गए थे।

इन निर्देशों पर तुरंत कार्रवाई करते हुए मिल्कफेड ने खन्ना कैटल फीड प्लांट के महाप्रबंधक, प्रबंधक (एएच) एवं गुणवत्ता प्रभारी, उप प्रबंधक (खरीद एवं भंडारण)/प्रभारी (एफ एंड ए) तथा वरिष्ठ सहायक/खरीद प्रभारी के विरुद्ध ‘मेजर पेनल्टी’ चार्जशीट जारी कर दी है। इसी प्रकार मार्कफेड ने भी प्रथम दृष्टया जिम्मेदार पाए गए अधिकारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी है तथा मुख्य प्रबंधक को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। वहीं लागू सेवा नियमों के तहत महाप्रबंधक, वरिष्ठ लेखा अधिकारी (जो उप मुख्य लेखा अधिकारी का कार्य देख रहे थे) तथा वरिष्ठ सहायक (जो वाणिज्यिक प्रबंधक का कार्य देख रहे थे) के विरुद्ध ‘मेजर पेनल्टी’ चार्जशीट जारी की गई है। संबंधित वरिष्ठ सहायक (जो वाणिज्यिक प्रबंधक के रूप में तैनात थे) का प्रशासनिक हित में तबादला भी कर दिया गया है।

इसके साथ ही जीएसटी से संबंधित अनियमितताओं एवं संभावित वित्तीय उल्लंघनों को ध्यान में रखते हुए कर विभाग को आवश्यक जांच के निर्देश दिए गए थे।

कर विभाग ने तत्काल कार्रवाई करते हुए मैसर्स इंडो ऑर्गेनिक, गिद्दड़बाहा (पंजाब) के व्यावसायिक परिसर की जांच की तथा फर्म को विस्तृत जांच के लिए अपने लेखा अभिलेख एवं संबंधित रिकॉर्ड प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। पंजाब कर विभाग ने टेक्निकल ग्रेड यूरिया के रूप में घोषित माल की आपूर्ति के संबंध में मैसर्स मनीषा ट्रेडिंग कंपनी (GSTIN: 07CHRPB3278F1Z7), नई दिल्ली तथा मैसर्स एएम केमिकल (GSTIN: 06AETPG3373B1ZM), सोनीपत (हरियाणा) की व्यावसायिक गतिविधियों में भी संदिग्ध अनियमितताओं का पता लगाया है। जांच से प्रतीत होता है कि आपूर्ति की गई सामग्री जीएसटी दस्तावेजों में घोषित उत्पाद के बजाय कथित रूप से नीम-कोटेड यूरिया थी, जिससे गलत घोषणा, इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का अनुचित लाभ लेने अथवा आगे पास करने तथा सरकार द्वारा सब्सिडी वाले उर्वरक के संभावित दुरुपयोग (डायवर्जन) की आशंका उत्पन्न होती है।

यह मामला कानून के तहत विस्तृत जांच एवं आवश्यक कार्रवाई के लिए क्रमशः प्रधान आयुक्त, सीजीएसटी, नई दिल्ली तथा पंचकूला को भेज दिया गया है। संबंधित अधिकारियों से प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

इस बीच, भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने तथा संस्थागत सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए मुख्यमंत्री ने सहकारिता विभाग के प्रशासनिक सचिव को निर्देश दिए हैं कि वे मार्कफेड को पंजाब में टेक्निकल ग्रेड यूरिया की खरीद एवं आपूर्ति के लिए नोडल एजेंसी बनाने की प्रक्रिया शुरू करें, ताकि यह सामग्री सीधे भारत सरकार की एजेंसियों अथवा मान्यता प्राप्त संस्थाओं से प्राप्त की जा सके। इस पहल का उद्देश्य राज्यभर की सहकारी संस्थाओं के लिए पारदर्शिता, गुणवत्ता सुनिश्चित करना तथा एक प्रभावी आपूर्ति श्रृंखला विकसित करना है।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रत्येक स्तर पर जवाबदेही तय की जाएगी तथा नियमों का उल्लंघन करने अथवा सार्वजनिक संसाधनों का दुरुपयोग करने वाले किसी भी अधिकारी, कर्मचारी या संस्था को बख्शा नहीं जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सहकारी संस्थाओं के कार्यों में पारदर्शिता, ईमानदारी और जवाबदेही सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार स्पष्ट रूप से मानती है कि राज्य के किसानों के हित सर्वोपरि हैं और किसानों को मिलने वाली प्रत्येक सब्सिडी तथा प्रत्येक सार्वजनिक संसाधन की रक्षा की जाएगी। किसी भी कीमत पर किसानों के हितों से समझौता नहीं किया जाएगा।

भगवंत सिंह मान ने आगे कहा कि किसानों के कल्याण के लिए उपलब्ध संसाधनों का दुरुपयोग करने वाले किसी भी व्यक्ति या संस्था के विरुद्ध प्रशासनिक कार्रवाई के साथ-साथ कानूनी कार्रवाई भी लगातार जारी रहेगी। 

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