नार्को-हवाला नेटवर्क को बड़ा झटका, 750 नशा तस्करों की 300 करोड़ रुपये की संपत्तियां जब्त
By NIRPAKH POST
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चंडीगढ़, 31 मई:
नशों के खिलाफ चल रही निर्णायक मुहिम ‘ युद्ध नशों विरूद्ध' के 15 महीने पूरे हो गए हैं। इस दौरान पंजाब पुलिस ने संगठित नशा तस्करी नेटवर्क के वित्तीय ढांचे को व्यवस्थित ढंग से ध्वस्त कर दिया है, जिससे पूरे राज्य में सक्रिय नार्को-हवाला सिंडिकेटों को बड़ा झटका लगा है। इस अभियान के परिणामस्वरूप लगभग 750 नशा तस्करों की 300 करोड़ रुपये मूल्य की अवैध संपत्तियां रणनीतिक रूप से जब्त की गई हैं। यह जानकारी आज यहां पंजाब के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) गौरव यादव ने दी।
डीजीपी ने कहा कि, “पंजाब पुलिस ने केवल स्थानीय स्तर पर जब्ती तक सीमित न रहकर, सीमा पार से होने वाली तस्करी को वित्तीय सहायता प्रदान करने वाले तस्करों के व्यापक आर्थिक ढांचे को समाप्त करने पर भी विशेष ध्यान केंद्रित किया है।”
उल्लेखनीय है कि इस नशा विरोधी अभियान की शुरुआत से ही पंजाब पुलिस राज्य के सभी 28 पुलिस जिलों में प्रतिदिन एक साथ नशा तस्करों के खिलाफ विशेष अभियान चला रही है।
डीजीपी गौरव यादव ने बताया कि अभियान शुरू होने के बाद से पंजाब पुलिस ने एनडीपीएस अधिनियम के तहत 46,937 एफआईआर दर्ज की हैं तथा 65,884 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। उन्होंने बताया कि प्रवर्तन अभियानों के दौरान 2950 किलोग्राम हेरोइन, 792 किलोग्राम अफीम, 666 क्विंटल भुक्की, 71 किलोग्राम चरस, 986 किलोग्राम गांजा, 56 किलोग्राम आईसीई तथा 55 लाख नशीली गोलियों सहित भारी मात्रा में मादक पदार्थ बरामद किए गए हैं।
डीजीपी ने कहा कि इन बड़ी बरामदगियों के साथ-साथ पुलिस टीमों ने गिरफ्तार आरोपियों से 20 करोड़ रुपये की ड्रग मनी भी बरामद की है।
उन्होंने कहा कि इस अभियान की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक उन गुप्त हवाला चैनलों को आक्रामक ढंग से निशाना बनाना रहा है, जिनके माध्यम से नशे के कारोबार से अर्जित भारी मुनाफा विदेशी हैंडलरों और पाकिस्तानी आपूर्तिकर्ताओं तक पहुंचाया जाता था। उन्होंने बताया कि ये नेटवर्क शेल कंपनियों, व्हाट्सऐप और सिग्नल जैसे एन्क्रिप्टेड ऐप्स तथा वर्चुअल अंतरराष्ट्रीय नंबरों के माध्यम से संचालित होते थे।
डीजीपी गौरव यादव ने बताया कि पंजाब पुलिस ने जांच अधिकारियों की सहायता के लिए प्रत्येक जिले में समर्पित वित्तीय जांच इकाइयां (एफआईयू) स्थापित की हैं, ताकि आरोपी किसी भी स्तर पर कानून के शिकंजे से बच न सकें। उन्होंने कहा कि इस संरचनात्मक सुधार के परिणामस्वरूप 65 हवाला ऑपरेटरों को गिरफ्तार किया गया तथा 8.85 करोड़ रुपये की हवाला राशि बरामद की गई।
उन्होंने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण अभियानों में से एक में फगवाड़ा स्थित शर्मा फॉरेक्स मनी एक्सचेंज से 5.09 करोड़ रुपये की संपत्तियां जब्त और फ्रीज की गईं। इस कार्रवाई से एक बड़े वित्तीय नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ, जो संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के माध्यम से पाकिस्तान स्थित हैंडलरों के लिए ड्राइवरों के वेतन भुगतान की आड़ में धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) कर रहा था।
सीमा पार नेटवर्क के एक अन्य महत्वपूर्ण हिस्से का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि पुलिस टीमों ने लुधियाना में बीकानेर आधारित एक ऑपरेटर से 20.55 लाख रुपये बरामद किए, जो पाकिस्तान से जुड़े ड्रग कुरियरों को वित्तपोषित करने के लिए अग्रिम भुगतान का प्रबंधन करता था। इसी प्रकार अमृतसर में विदेशी मुद्रा तथा भारतीय मुद्रा सहित 1.24 करोड़ रुपये की बरामदगी से नार्को-हथियार गठजोड़ का भी खुलासा हुआ।
डीजीपी ने कहा कि यह अभूतपूर्व सफलता आधुनिक तकनीक और खुफिया जानकारी आधारित पुलिसिंग के व्यापक उपयोग से संभव हुई है। उन्होंने बताया कि पंजाब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम (पीएआईएस) के एकीकरण से जांच प्रक्रिया में क्रांतिकारी सुधार आया है। इस प्रणाली के माध्यम से 1.36 लाख एनडीपीएस एफआईआर तथा 93,000 से अधिक वॉयस सैंपलों के व्यापक डेटाबेस का प्रबंधन किया जा रहा है।
डीजीपी गौरव यादव ने बताया कि लगभग 43,400 मामलों के परस्पर संबंधों का व्यवस्थित विश्लेषण कर पूरी आपूर्ति श्रृंखला की पहचान पर विशेष ध्यान दिया गया, जिसके परिणामस्वरूप पुलिस ने 45,809 आपराधिक नेटवर्क कनेक्शनों का मानचित्रण किया। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में डिवाइस फॉरेंसिक की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। लैपटॉप और जब्त किए गए मोबाइल फोनों से प्राप्त तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर कार्टेल द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे विदेशी वर्चुअल नंबरों और एन्क्रिप्टेड संचार तंत्र का पर्दाफाश किया गया।


