आगामी धान की रोपाई से पहले नहर के पानी से सिंचाई 86 प्रतिशत तक पहुंच जाएगी: बरिंदर कुमार गोयल

आगामी धान की रोपाई से पहले नहर के पानी से सिंचाई 86 प्रतिशत तक पहुंच जाएगी: बरिंदर कुमार गोयल

**लहरागागा/मूनक, 23 मार्च**

पंजाब के जल संसाधन मंत्री श्री बरिंदर कुमार गोयल ने मकरौड़ साहिब में लगभग 6.46 करोड़ रुपये की लागत से घग्गर नदी के किनारे को और मजबूत एवं ऊंचा करने के प्रोजेक्ट का नींव पत्थर रखने के अवसर पर कहा कि मुख्यमंत्री श्री भगवंत सिंह मान की अगुवाई वाली पंजाब सरकार के प्रयासों से पहले 4 करोड़ रुपये की लागत से घग्गर के किनारे मजबूत किए गए थे, जिसके कारण वर्ष 2025 में आए बाढ़ के दौरान भले ही घग्गर नदी लगातार 10 दिनों तक खतरे के निशान से ऊपर बहती रही, लेकिन लोग घग्गर की मार से बच गए।

इससे पहले नहरी पानी की आपूर्ति, नहरों के नवीनीकरण और पंजाब सरकार द्वारा राजस्थान सरकार से दशकों से बिना भुगतान किए पानी के उपयोग के लिए 1.44 लाख करोड़ रुपये की वसूली के दावे सहित पिछले चार वर्षों में किए गए कार्यों के बारे में लहरागागा स्थित अपने दफ्तर में मीडिया से बातचीत के दौरान कैबिनेट मंत्री ने कहा कि राजस्थान को या तो पंजाब के जायज बकाए जारी करने चाहिए या पानी लेना बंद कर देना चाहिए।

कैबिनेट मंत्री ने कहा कि राजस्थान सरकार वर्ष 1960 से फिरोजपुर फीडर के माध्यम से लिए गए पानी के लिए पंजाब को 1.44 लाख करोड़ रुपये की देनदार है, जिसके लिए एक पैसा भी अदा नहीं किया गया है। वर्ष 1920 के दशक में बीकानेर रियासत, संयुक्त पंजाब और ब्रिटिश राज के बीच हुए एक समझौते के अनुसार राजस्थान प्रति एकड़ के आधार पर पानी का भुगतान करने के लिए सहमत हुआ था। वर्ष 1960 तक भुगतान किया जाता था, लेकिन सिंधु जल समझौते के बाद राजस्थान ने लगातार 18,000 क्यूसेक पानी लेने के बावजूद भुगतान करना बंद कर दिया।

पंजाब की सिंचाई प्रणाली में हुए क्रांतिकारी बदलावों के बारे में बात करते हुए श्री गोयल ने कहा कि वर्ष 2022 में नहरी सिंचाई से केवल 26.50 प्रतिशत सिंचाई की जाती थी, जो बढ़कर आज 78 प्रतिशत हो गई है और इस वर्ष धान की रोपाई से पहले यह 86 प्रतिशत हो जाएगी। 1,446 गांव ऐसे हैं जहां आजादी के बाद पहली बार नहरी पानी पहुंचाया गया है।

अप्रैल 2022 से अब तक नहरों की लाइनिंग, मरम्मत, आधुनिकीकरण और बुनियादी ढांचे की मजबूती पर 6,700 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं, जो पंजाब के इतिहास में अब तक किया गया सबसे अधिक खर्च है।

पंजाब में नहरी पानी से लगभग 75.90 लाख एकड़ में सिंचाई की जा सकती है, जबकि मार्च 2022 तक केवल 20.89 लाख एकड़ को ही नहरी पानी मिल रहा था। लगभग 13,000 किलोमीटर नहरों के निर्माण एवं मरम्मत के लिए लगभग 2,000 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं, जिसके कारण नहरी पानी अब 58 लाख एकड़ क्षेत्र तक पहुंच रहा है।

लगभग 7,000 खालों को बहाल किया गया है और कुल 15,539 नहरों की सफाई की गई है तथा 18,349 जल मार्गों को पुनर्जीवित किया गया है। पहली बार 545 किलोमीटर तक फैली 101 बंद पड़ी नहरों को पुनर्जीवित किया गया है। इनमें से बहुत सी नहरें 30 से 40 वर्षों से बंद थीं और मिट्टी से भी भरी हुई थीं।

कैबिनेट मंत्री ने कहा कि केवल बरसाती नालों को पुनर्जीवित करने से 2.75 लाख एकड़ क्षेत्र को नहरी सिंचाई के अंतर्गत लाने में मदद मिली है। पुरानी नहरी प्रणालियों को बहाल करके यह सुनिश्चित किया गया है कि अब खेतों तक 10,000 क्यूसेक अतिरिक्त पानी पहुंच रहा है। वास्तव में पंजाब सरकार ने बिना कोई जमीन प्राप्त किए नई ‘भाखड़ा नहर’ ही बना दी है क्योंकि इतनी मात्रा में ही भाखड़ा मेन लाइन में पानी बहता है।

सरहिंद नहर को अपग्रेड किया गया है जिससे इसकी क्षमता में 2,844 क्यूसेक का विस्तार हुआ है। सरहिंद और पटियाला जैसी बड़ी नहरों की लाइनिंग करके पानी की उपलब्धता में लगभग 1.5 एमएएफ का विस्तार किया है।

आपदा प्रबंधन और पर्यावरण बहाली के बारे में उन्होंने कहा कि बाढ़ की रोकथाम और पानी प्रबंधन के उद्देश्य से 195 कार्यों के लिए राज्य आपदा राहत कोष से 477 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। 199 डी-सिल्टिंग साइटों की पहचान की गई है और जंगी स्तर पर नालों की सफाई के लिए नई चेन-माउंटेड मशीनें तैनात की गई हैं।

शाहपुर कंडी डैम प्रोजेक्ट, जो 25 वर्षों से अधिक समय से लटका हुआ था, अब 3,394.49 करोड़ रुपये की लागत से पूरा हो गया है। इससे रणजीत सागर डैम की क्षमता बढ़ेगी और पाकिस्तान के इलाके में बहने वाले हमारे पानी पर रोक लगेगी।

पंजाब सरकार द्वारा पूर्ण तर्कसंगत माइनिंग नीति लागू की गई है, जिससे जहां पंजाब के प्राकृतिक संसाधनों का सुचारू संरक्षण हो रहा है, वहीं राज्य को आर्थिक लाभ भी हो रहा है।

इस अवसर पर विभिन्न विभागों के अधिकारी, गणमान्य व्यक्ति और बड़ी संख्या में गांवों एवं शहरों के लोग उपस्थित थे। 

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