महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में जिला रेड क्रॉस का विशेष कदम, 'प्रोजेक्ट पहचान' की शुरुआत
होशियारपुर, 4 जुलाई:
डिप्टी कमिश्नर-कम-अध्यक्ष जिला रेड क्रॉस सोसायटी आशिका जैन के नेतृत्व में जिले की लड़कियों और महिलाओं के सशक्तिकरण एवं आर्थिक आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक विशेष पहल के तहत 'प्रोजेक्ट पहचान' की शुरुआत की गई है। यह परियोजना उषा सांगवान के विशेष सहयोग से शुरू की गई है, जो सोनालिका ग्रुप के संस्थापक डॉ. लक्ष्मण दास मित्तल की पुत्री हैं तथा भारतीय जीवन बीमा निगम के इतिहास में पहली महिला प्रबंध निदेशक रहने का गौरव प्राप्त कर चुकी हैं।
उषा सांगवान देश की अग्रणी महिला कारोबारी हस्तियों में शामिल हैं। उनका नाम विश्व प्रसिद्ध फोर्ब्स की एशिया की 50 सबसे प्रभावशाली महिलाओं की सूची में शामिल हो चुका है। इसके अलावा वह नीति आयोग के महिला सशक्तिकरण कार्यक्रमों से भी सक्रिय रूप से जुड़ी हुई हैं। उनके मार्गदर्शन और प्रेरणा से शुरू किए गए इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाकर उन्हें आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त करना है।
जिला रेड क्रॉस सोसायटी के सचिव मंगेश सूद ने बताया कि 'प्रोजेक्ट पहचान' का प्रमुख उद्देश्य महिलाओं और युवतियों के बीच स्टार्ट-अप संस्कृति को बढ़ावा देना है। इसके तहत रेड क्रॉस वोकेशनल लर्निंग सेंटर की पांच प्रतिभाशाली एवं जरूरतमंद छात्राओं मनीषा, हरप्रीत कौर, मोनिका, अमृत और काजल को घर से ही स्वरोजगार शुरू करने के लिए मोटराइज्ड एंब्रेला मशीन, इंटरलॉक मशीन, स्टीम प्रेस और आयरन प्रेस उपलब्ध करवाई गई हैं। इन मशीनों की सहायता से ये छात्राएं घर बैठे ही अपनी आजीविका अर्जित कर सकेंगी और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ेंगी।
इस अवसर पर रेड क्रॉस अस्पताल भलाई सेक्शन के वाइस चेयरमैन राजीव बजाज सहित रेड क्रॉस की टीम के सदस्य भी उपस्थित रहे।
संयुक्त सचिव आदित्य राणा ने बताया कि 'प्रोजेक्ट पहचान' के अलावा रेड क्रॉस द्वारा सोनालिका समूह के सहयोग से 'सुई धागा' नामक एक अन्य महत्वाकांक्षी परियोजना भी शुरू की गई है। इस परियोजना के तहत रेड क्रॉस परिसर में आधुनिक इंटरलॉक, इलास्टिक, बटन और काज मशीनें स्थापित की गई हैं, जिनका उपयोग फैशन डिजाइनिंग का कौशल रखने वाली जरूरतमंद महिलाएं पेशेवर कार्यों के लिए कर सकेंगी।
उन्होंने कहा कि रेड क्रॉस और सोनालिका समूह का यह संयुक्त प्रयास जिले की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त, आत्मनिर्भर और स्वरोजगार के प्रति प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा तथा महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।


