केंद्रीय मंत्री रवनीत बिट्टू के बयानों पर अमन अरोड़ा का तीखा पलटवार
चंडीगढ़, 28 मई
पंजाब के कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू पर पलटवार करते हुए उन पर लगे सभी आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। अमन अरोड़ा ने कहा कि आम आदमी पार्टी और पंजाब सरकार पंजाब में नगर निगम चुनाव पूरी तरह से शांतिपूर्ण तरीके से कराना चाहती थी, लेकिन धूरी और संगरूर में केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने जिस तरह की मारपीट और बदतमीजी दिखाई, उसकी उम्मीद पंजाब के किसी भी नागरिक को उनके जैसे संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति से नहीं थी।
इस गुंडागर्दी के खिलाफ जब हमारी पार्टी और मैंने सैद्धांतिक सवाल उठाए, तो बिट्टू जी ने जवाब देने के बजाय, शालीनता की सारी हदें पार कर दीं। उन्होंने पूरी तरह से घटिया राजनीति की और मेरे और मेरे स्वर्गीय पिता के खिलाफ गंदे कीचड़ उछालने शुरू कर दिए, जिसका जवाब देना बेशक जरूरी है।
गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए अमन अरोड़ा ने कहा कि हमारा सैद्धांतिक सवाल सीधा था कि एक तरफ तो आप पंजाब पुलिस के वर्दीधारी जवानों और अधिकारियों के गिरेबान पर हाथ डालते हैं, उन्हें 'दलाल' और 'गुंडा' जैसे शब्दों से संबोधित करते हैं। अगर आपको पंजाब पुलिस इतनी ही खराब लगती है, तो 2017 में, कांग्रेस सरकार के दौरान, आपने सारे नियम-कानूनों को ताक पर रखकर सीधे अपने भाई गुरइकबाल सिंह हनी को डीएसपी क्यों लगवाया था?
आज भी आपके भाई पंजाब के खजाने से और पंजाब के लोगों के टैक्स के पैसे से सैलरी ले रहे हैं। उन्होंने बिट्टू को घेरते हुए कहा कि आपके दादा सरदार बेअंत सिंह जी के लिए मेरे मन में बहुत इज़्ज़त है, जिनके मुख्यमंत्री रहने के दौरान मेरे पिता विधायक थे। लेकिन सवाल यह है कि अगर आप सिर्फ़ अपने भाई के लिए कानून बदल सकते थे, तो उस बम धमाके में शहीद हुए बाकी 17 पुलिसवालों और आम लोगों के परिवारों के लिए डीएसपी क्यों नहीं लगवाया? क्या उनके परिवारों की कोई शहादत नहीं हुई? आपने सिर्फ़ अपने परिवार के मतलब के लिए कानून को अंगूठा दिखाया और बाकी पीड़ित परिवार आज भी दर-दर भटक रहे हैं।
बिट्टू के उन्हें दलबदलू कहने पर हमला बोलते हुए कैबिनेट मंत्री ने कहा कि बिट्टू जी, आम आदमी पार्टी में आने से पहले मैं भी उसी कांग्रेस में था जिसमें आप थे। मैंने 2016 में उसूलों के लिए कांग्रेस छोड़ी थी, लेकिन आपने 2024 के लोकसभा चुनाव में अपनी हार देखकर सत्ता के लालच में कांग्रेस छोड़ दी, और भाजपा में चले गए। यह अलग बात है कि जनता ने फिर भी आपको नकार दिया।
उन्होंने कहा कि हारने के बाद भी आप केंद्र में मंत्री बन गए, लेकिन आज आपकी भाषा इतनी गिरी हुई हो गई है कि पूरा पंजाब इसे देख रहा है।
बिट्टू के अरोड़ा को 'कपूत' कहने वाले बयान पर अरोड़ा ने कहा कि पुत्र कपुत्र है या सुपुत्र, यह पूछने के लिए आपको मेरे स्वर्गीय पिता के पास जाना होगा, या कल आप सुनाम आकर मेरी मां से पूछ सकते हैं, जो फोर्टिस अस्पताल में ऑपरेशन के बाद पिछले डेढ़ महीने से बिस्तर पर हैं।
अपने स्वर्गीय पिता श्री भगवान दास अरोड़ा जी की मौत पर बिट्टू के कमेंट पर बहुत इमोशनल और गुस्से में अमन अरोड़ा ने बताया कि मेरे पिता ने डिप्रेशन की वजह से सुसाइड किया, इसमें कोई शक नहीं है। लेकिन वो डिप्रेशन में क्यों थे? वो उसी इंसान की वजह से दुखी होकर इस दुनिया से चले गए जिसके लिखे पेपर्स आप कल प्रेस कॉन्फ्रेंस में तोते की तरह रट रहे थे।
उन्होंने कहा कि हमारे आदरणीय जीजा राजेंद्र दीपा ने हमारे पूरे परिवार को बर्बाद करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने 2002 में घर का माहौल खराब किया, वो खुद 2007 और 2012 के चुनाव में मेरे खिलाफ खड़े हुए ताकि मैं विधायक न बन सकूं और आज भी वो अपने ससुराल में रहकर पूरे परिवार को परेशान कर रहे हैं। अरोड़ा ने कहा कि बिट्टू जी, जो समझदार नेता लगते हैं, वो एक ऐसे इंसान का मुखौटा बन गए हैं, जिसने ज़िंदगी में खुद कुछ बनने के बजाय सिर्फ दूसरों के घर बर्बाद करने का काम किया है।
अमन अरोड़ा ने बिट्टू के दूसरे आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि राजिंदर दीपा के कहने पर आप मुझ पर ट्रांसपोर्ट में फर्जी सिग्नेचर करने और तारीख देने का आरोप लगा रहे हैं। मैं पूछना चाहता हूं कि 15-20 साल पहले जब हमारा ट्रांसपोर्ट चलता था, तो क्या बिट्टू जी वहां मैनेजर, ड्राइवर या कंडक्टर थे जो उन्हें इतनी जानकारी है?
कोर्ट केस और सज़ा की बात पर उन्होंने साफ किया कि जब राजिंदर दीपा और उसके साथियों ने मेरी मां पर हमला किया था, तब मैंने अपनी मां को बचाया था, जिसके टांके आज भी मेरे सिर पर हैं। अगर मुझे अपनी मां को बचाने के लिए कोई भी सज़ा भुगतनी पड़े, तो मुझे कोई अफसोस नहीं है। लेकिन आपके बॉस दीपा जी ने आपको यह नहीं बताया कि उन्होंने और मेरी बहन सोनिया ने मिलकर न सिर्फ मुझे बल्कि हमारी 85 साल की मां को भी सज़ा दी है। पंजाब के लोग अच्छी तरह जानते हैं कि ऐसे लोग कितने अच्छे 'बेटे' और 'दामाद' होते हैं।
अमन अरोड़ा ने चंडीगढ़ में किराए के मकान में रहने के आरोप पर पलटवार करते हुए कहा कि बिट्टू जी, मैं सुनाम छोड़कर चंडीगढ़ में रहा, चाहे किराए पर, अपने मकान में या सड़क पर, लेकिन मैं आपकी तरह सालों तक बिना किराया दिए सरकारी मकान में नहीं बैठा। जब आपको चुनाव लड़ने के लिए पंजाब सरकार से एनओसी की जरूरत थी और सरकारी मकान का बकाया 2 करोड़ रुपये किराया देना था, तो सबने देखा है कि आप कैसे रो रहे थे। मैं जहां भी रहा, अपने जोश और शान से रहा।
अपने कैरेक्टर पर उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि अगर मेरा कैरेक्टर देखना है तो सुनाम की जनता से पूछिए, जिन्होंने मुझे 2022 में पंजाब के चुनावी इतिहास में 75,277 वोटों की सबसे बड़ी रिकॉर्ड जीत दिलाई। यह जनता की मुहर है, मुझे बिट्टू या दीपा से कैरेक्टर सर्टिफिकेट लेने की जरूरत नहीं है।
अमन अरोड़ा ने हाउसिंग डिपार्टमेंट के दौरान लुधियाना में जमीन हड़पने के आरोपों को खारिज करते हुए केंद्रीय मंत्री को खुली चुनौती दी। उन्होंने कहा कि बिट्टू जी, समय आपका है, दिन आपका है और जगह आपकी है। लुधियाना का क्या है, अगर मेरे मंत्री रहते हुए पूरे पंजाब में एक इंच भी ज़मीन हड़पी गई, खरीदी तो आप आकर वहाँ अपनी उंगली रख दीजिए, मैं आज ही वह ज़मीन आपके नाम लिख दूँगा। ऐसी बकवास और हल्की राजनीति करना बंद कीजिए।
अमन अरोड़ा ने कहा कि हमारा पूरा परिवार, मेरी माँ, मेरी दूसरी बहन और भाई का परिवार आज एकता के साथ मेरे साथ खड़ा है। उन्होंने कहा कि बिट्टू जी खुशकिस्मत हैं कि उन्हें विक्रम मोफर जैसा अच्छा दामाद (जीजा) और उनका ख्याल रखने वाला परिवार मिला, लेकिन हम बदकिस्मत रहे कि हमें दीपा जैसा इंसान मिला जिसने हमेशा घर तोड़ने का काम किया।
पिताजी की मौत के बाद मुझे अपने नाम के आगे विधायक के ये तीन अक्षर लिखवाने के लिए 17 साल तक पारिवारिक, सामाजिक और राजनीतिक लड़ाई लड़नी पड़ी। मैं भगवान से प्रार्थना करता हूँ कि बिट्टू जी के परिवार या किसी दुश्मन के घर में कभी ऐसा समय न आए कि किसी सदस्य को आत्महत्या करनी पड़े। अगर बिट्टू जी को अब भी कोई शक है तो वे कल सुनाम आकर मेरी बीमार मां से मिल लें या पंजाब के किसी भी कोने में आकर मुझसे सीधे ज़मीन के मामले पर बात कर लें।


