गुरुग्राम में बड़े अंतरराज्यीय हथियार सप्लाई नेटवर्क का भंडाफोड़: मध्य प्रदेश से बस में हथियारों की खेप लेकर पहुंचे 2 तस्कर गिरफ्तार
दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) में गैंगस्टरों और स्थानीय बदमाशों को अवैध हथियारों की सप्लाई करने वाले एक बहुत बड़े अंतरराज्यीय (Interstate) नेटवर्क का गुरुग्राम पुलिस ने पर्दाफाश किया है। मध्य प्रदेश से संचालित हो रहे इस हथियार तस्करी के बड़े नेक्सस पर चोट करते हुए पुलिस ने दो सप्लायरों को रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया है। ये दोनों तस्कर मध्य प्रदेश से हथियारों की एक बड़ी खेप लेकर गुरुग्राम पहुंचे थे, लेकिन डिलीवरी देने से पहले ही पुलिस के हत्थे चढ़ गए।
आरोपियों की पहचान और बड़ी बरामदगी (The Arrest and Recovery) गुरुग्राम पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर जाल बिछाकर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए तस्करों की पहचान दुर्गेश और नरेंद्र उर्फ नरेन के रूप में हुई है। दोनों आरोपी मध्य प्रदेश के जिला खरगोन स्थित गांव बामनाला (पुत्र कालिया उर्फ कालू) के रहने वाले हैं। तलाशी के दौरान पुलिस ने इनके कब्जे से 8 अवैध पिस्टल और 16 मैगजीन बरामद की हैं। यह एक बड़ी रिकवरी मानी जा रही है, क्योंकि ये हथियार एनसीआर के बदमाशों तक पहुंचने थे, जिनका इस्तेमाल किसी बड़ी आपराधिक वारदात में किया जा सकता था।
बैकवर्ड लिंकेज: पहले पकड़े गए तस्करों से खुला राज (The Connection) पुलिस के अनुसार, यह सफलता हवा में नहीं मिली है, बल्कि यह एक सुनियोजित जांच का नतीजा है। दरअसल, गुरुग्राम पुलिस ने कुछ समय पहले दीपक और राहुल नाम के दो हथियार तस्करों को गिरफ्तार किया था। जब उनसे सख्ती से पूछताछ की गई, तो उन्होंने मध्य प्रदेश के इस नेटवर्क का राज उगला। दीपक और राहुल से मिली जानकारी की कड़ियों को जोड़ते हुए पुलिस दुर्गेश और नरेंद्र तक पहुंची। जांच में यह भी साफ हुआ है कि पकड़े गए इन दोनों तस्करों ने पहले भी दीपक और राहुल को 5 अवैध पिस्टल और 11 मैगजीन की खेप पहुंचाई थी। अगर पूरे गिरोह की बात करें, तो अब तक इस सिंडिकेट से कुल 13 अवैध पिस्टल और 27 मैगजीन बरामद की जा चुकी हैं।
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मोडस ऑपरेंडी: बस से करते थे सफर (Modus Operandi) हैरानी की बात यह है कि पुलिस की नजरों से बचने के लिए ये तस्कर पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करते थे। पूछताछ में सामने आया है कि आरोपी हथियारों की यह ताजा खेप एक साधारण यात्री बस के जरिए मध्य प्रदेश से लेकर गुरुग्राम पहुंचे थे। इनका टारगेट दिल्ली-एनसीआर के स्थानीय बदमाश और स्लीपर सेल थे, जिन्हें ये हथियार सप्लाई किए जाने थे।
सिर्फ 7 हजार के कमीशन का खेल (The Commission) पैसों के लालच ने इन युवाओं को मौत के सौदागरों में बदल दिया। पुलिस की पूछताछ में आरोपियों ने कबूल किया है कि वे पिछले करीब 4 वर्षों से हथियारों की तस्करी के इस काले धंधे में शामिल हैं। उन्हें मध्य प्रदेश के सरगनाओं द्वारा प्रत्येक हथियार की सफल डिलीवरी पर 7,000 रुपये का कमीशन मिलता था।
अगला कदम: हथियार फैक्ट्री की तलाश (Next Steps of Investigation) गुरुग्राम पुलिस अब इस पूरे नेक्सस की जड़ तक पहुंचने में जुट गई है। पुलिस की टीमें यह पता लगा रही हैं कि:
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मध्य प्रदेश के खरगोन या आसपास के किन जंगलों/इलाकों में ये अवैध हथियार बनाए जा रहे हैं (अवैध फैक्ट्री की तलाश)।
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इस गिरोह का मुख्य सरगना कौन है।
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दिल्ली-एनसीआर में वे कौन से सफेदपोश या अपराधी हैं, जो इन हथियारों को खरीद रहे थे।
पुलिस की टीमें मामले की एक-एक कड़ी जोड़कर पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए छापेमारी कर रही हैं।


