गुजरात के छात्रों ने पंजाब राज्य किसान और खेत मजदूर आयोग का किया दौरा
By NIRPAKH POST
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चंडीगढ़, 31 जनवरी
वडोदरा की पारुल यूनिवर्सिटी से बी.एससी. एग्रीकल्चर (ऑनर्स), एम.एससी. एग्रीकल्चर और बी.एससी. (फूड टेक) के छात्रों की एक टीम ने पंजाब के कृषि क्षेत्र और विशेष रूप से पंजाब राज्य कृषि नीति, 2023 के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए पंजाब राज्य किसान और खेत मजदूर आयोग का दौरा किया।
इस टीम का नेतृत्व कोऑर्डिनेटर श्री एलेक्स राज, श्री आरव जैन और श्रीमती नमहिक धबालिया कर रहे थे और उनके साथ पारुल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डॉ. विक्रम परमार भी थे। प्रशासनिक अधिकारी-सह-सचिव डॉ. रणजोध सिंह बैंस और सीआरआईडीडी के सेवानिवृत्त प्रोफेसर डॉ. सुखविंदर सिंह ने भी विचार-विमर्श में भाग लिया और छात्रों से बातचीत की।
इस विचार-विमर्श के दौरान छात्रों ने चेयरमैन और अधिकारियों के साथ पंजाब की कृषि को प्रभावित करने वाले मुद्दों पर चर्चा की। इस अवसर पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी), किसान ऋण, किसानों द्वारा आत्महत्याएं, किसानों के विरोध प्रदर्शन और राज्य में कृषि के भविष्य के बारे में प्रश्न-उत्तर किए गए। प्रो. डॉ. सुखपाल सिंह ने कृषि अर्थशास्त्र और नीति में अपने लंबे अनुभव के माध्यम से प्रश्नों के स्पष्ट उत्तर दिए।
प्रो. डॉ. सुखपाल सिंह ने सहकारी संस्थाओं को मजबूत करने, फसली विविधता को प्रोत्साहित करने और कृषि को अधिक व्यावहारिक बनाने के लिए किसानों की ऋण और बाजारों तक बेहतर पहुंच की महत्वता पर प्रकाश डाला। उन्होंने यह भी बताया कि कैसे कुछ फसलों पर अत्यधिक निर्भरता के कारण आर्थिक और पर्यावरण संबंधी समस्याएं पैदा होती हैं। उन्होंने संतुलित और सतत कृषि उपायों की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने छात्रों के साथ कृषि और सहायक क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों के बारे में बातचीत की और इस बात पर जोर दिया कि भविष्य में खाद्य पदार्थों से संबंधित क्षेत्र सबसे महत्वपूर्ण होगा।
इस विचार-चर्चा के दौरान छात्रों को खुले तौर पर अपने विचार व्यक्त करने और अपनी शंकाओं को दूर करने का मौका मिला। दौरा करने आए छात्रों ने इस खुली चर्चा की प्रशंसा की और इस सत्र के माध्यम से कक्षारूम शिक्षा से परे पंजाब में कृषि से संबंधित वास्तविक चुनौतियों को समझने में मदद मिली।
सत्र के अंत में डॉ. रणजोध सिंह बैंस ने उपस्थित लोगों का धन्यवाद किया। उन्होंने प्रो. डॉ. सुखपाल सिंह, डॉ. सुखविंदर सिंह, श्री एलेक्स राज, श्री आरव जैन और श्रीमती नमहिक धबालिया, डॉ. विक्रम परमार सहित आयोग के अनुसंधान अधिकारियों और अनुसंधान सहायकों का उनकी सक्रिय भागीदारी और अर्थपूर्ण विचार-विमर्श के लिए धन्यवाद किया।


