होशियारपुर बना अग्रणी: मोंटेसरी शिक्षण पद्धति शुरु करने वाला प्रदेश का पहला जिला बना जिला प्रशासन और रेडक्रॉस की संयुक्त पहल से जिले में बाल शिक्षा की नई क्रांति
होशियारपुर, 26 फरवरी: जिले में प्रारंभिक बाल शिक्षा को सुदृढ़ और गुणवत्तापूर्ण बनाने की दिशा में जिला प्रशासन ने रेडक्रॉस होशियारपुर के सहयोग से एक ऐतिहासिक पहल करते हुए सामुदायिक आधार पर मोंटेसरी शिक्षण पद्धति का विशेष प्रशिक्षण आरंभ किया है। डिप्टी कमिश्नर आशिका जैन ने बताया कि जिला प्रशासन होशियारपुर ने पंजाब में अपनी तरह की पहली पहल करते हुए 16 फरवरी 2026 से आरंभ हुए इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में जिले के 50 सरकारी आंगनवाड़ी एवं प्री-प्राइमरी स्कूल शिक्षकों तथा 17 सुपरवाइजरों सहित कुल 67 कर्मियों मोंटेसरी पद्धति का प्रशिक्षण देना शुरु कर दिया है। यह मॉड्यूलर प्रशिक्षण 30 सितंबर 2026 तक चरणबद्ध तरीके से चलेगा। उन्होंने बताया कि पायलट प्रोजेक्ट के आधार पर अभी 50 स्कूल व आंगनवाड़ी केंद्र शामिल किए गए हैं। जल्द ही अन्य को भी इस प्रोजेक्ट के अंतर्गत शामिल किया जाएगा। वे आज जिला प्रशासकीय कांप्लेक्स में प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने इस प्रोजेक्ट के अंतर्गत चुने गए आंगनवाड़ी केंद्रों के वर्करों व सरकारी स्कूलों के अध्यापकों को भी संबोधित किया।
डिप्टी कमिश्नर आशिका जैन ने बताया कि इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का संचालन विवेक हाई मोंटेसरी इंस्टीट्यूट, चंडीगढ़ द्वारा किया जा रहा है, जो उत्तरी भारत का एकमात्र एएमआई-संबद्ध संस्थान है। उन्होंने बताया कि रेडक्रास सोसायटी के सचिव मंगेश सूद के नेतृत्व में इस प्रोजेक्ट को संचालित किया जा रहा है। प्रोजेक्ट को क्वांटम पेपर्स लिमिटेड के एम.डी पवन खैतान और अजेश गुप्ता की ओर से सी.एस.आर योजना के अंतर्गत प्रायोजित किया गया है। डिप्टी कमिश्नर ने सामाजिक क्षेत्र में क्वांटम पेपर्स लिमिटेड के प्रयासों की भी सराहना की। इस मौके पर वीएचएमआई की संस्थापक व एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर मीनू साही, ट्रेनर दीपा श्री कुमार, नीलिमा, हेलेन एलियास मोहन, उमा रमणी ने भी संबोधित किया।
डिप्टी कमिश्नर ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि मुख्य मंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार शिक्षा के सर्वांगीण विकास में कोई कमी नहीं छोड़ रही है। यही कारण है कि पंजाब के शिक्षकों को ट्रेनिंग के लिए विदेशों में भेजा जा रहा है। उसी उद्देश्य को सामने रखते हुए हमने अपने प्री प्राइमरी अध्यापकों व आंगनवाड़ी केंद्रों को आधुनिक शिक्षा की इस कड़ी से जोड़ा है। उन्होंने बताया कि प्रारंभिक बाल्यावस्था (6 वर्ष तक) वह चरण है, जहां से बच्चे के संपूर्ण व्यक्तित्व का विकास प्रारंभ होता है। यदि इस स्तर पर शिक्षकों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रशिक्षण पद्धति उपलब्ध करवाई जाए, तो इसका सकारात्मक प्रभाव आने वाली पीढ़ियों पर दिखाई देगा। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन का उद्देश्य केवल प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि सरकारी आंगनवाड़ी और प्री-प्राइमरी स्कूलों में ऐसा वातावरण तैयार करना है, जहां बच्चों को आत्मनिर्भरता, अनुशासन, सृजनात्मकता और आत्मविश्वास विकसित करने के अवसर मिलें।
डिप्टी कमिश्नर ने बताया कि मोंटेसरी-बेस्ड टीचिंग मेथड के ज़रिए आंगनवाड़ी वर्करों और सरकारी स्कूलों के प्राइमरी टीचरों की कैपेसिटी बिल्डिंग करना है। उन्होंने बताया कि यह प्रोजेक्ट में बेसिक लर्निंग को मज़बूत करने और ज़मीनी लेवल पर क्लासरूम प्रैक्टिस को बेहतर बनाएगा। उन्होंने कहा कि जब सीखना आनंददायक बनता है, तब बच्चे आत्मविश्वासी, जिज्ञासु और रचनात्मक बनते हैं। इस पहल के तहत रेड क्रॉस बालवाटिका क्रेच को एक रोल मॉडल मोंटेसरी बनाया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान प्रोजेक्ट की विस्तृत रूपरेखा पर आधारित पीपीटी प्रस्तुति भी प्रदर्शित की गई।
आशिका जैन ने कहा कि इस प्रोजेक्ट से जिले के सैंकड़ों बच्चों को गुणवत्तापूर्ण, बाल केंद्रित और आधुनिक शिक्षण वातावरण का लाभ मिलेगा तथा होशियारपुर प्रारंभिक शिक्षा के क्षेत्र में एक माडल जिले के रुप में उभरेगा। इस मौके पर जिला शिक्षा अधिकारी (ए) हरजिंदर कौर, उप जिला शिक्षा अधिकारी(ए) अमनदीप शर्मा, सीडीपीओ रविंदर कौर, दया रानी के अलावा अन्य अधिकारी भी मौजूद थे।


