14 हज़ार किलोमीटर पाइपलाइन बिछाकर 80 प्रतिशत खेतों तक नहरी पानी पहुंचाया-भगवंत सिंह मान

14 हज़ार किलोमीटर पाइपलाइन बिछाकर 80 प्रतिशत खेतों तक नहरी पानी पहुंचाया-भगवंत सिंह मान

चंडीगढ़; 23 अक्टूबर:
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज कहा कि उनकी सरकार का नहरी सिंचाई अभियान पंजाब की कृषि व्यवस्था को बदल रहा है, जिससे धान की पैदावार में बड़ा इजाफा हो रहा है। उन्होंने कहा कि भूजल स्तर के गिरने का सिलसिला रुका है, जिससे पानी का स्तर चार मीटर ऊपर आया है। नहरी पानी को "पंजाब की फसलों के लिए देशी घी" बताते हुए उन्होंने कहा कि 14,000 किलोमीटर भूमिगत पाइपलाइनों की मदद से अब 18,000 क्यूसेक पानी खेतों तक पहुंच रहा है और इस नेटवर्क को बढ़ाने के लिए 6,000 किलोमीटर और पाइपलाइन बिछाने की योजना है। उन्होंने कहा कि सरकार का मिशन हर खेत तक नहरी पानी पहुंचाना, भूजल के बेशकीमती भंडारों की रक्षा करना और पंजाब के किसानों का भविष्य सुरक्षित करना है।
एक्स पर जानकारी साझा करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने लिखा: "16वीं पंजाब विधान सभा के 13वें सत्र के दौरान पंजाब के किसानी समुदाय और लोकतंत्र की रक्षा से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा की गई। कृषि खेतों तक नहरी पानी पहुंचाने के हमारे प्रयासों के सार्थक नतीजे सामने आए हैं। 14,000 किलोमीटर पाइपलाइन बिछाकर हमने भूजल की बचत की है। खनिजों से भरपूर नहरी पानी खेतों तक पहुंचने से इस सीजन में धान का झाड़ लगभग 90 मन प्रति एकड़ तक पहुंच गया है। इसके साथ ही पंजाब विधान सभा ने लोकतंत्र विरोधी और दमनकारी कानूनों के खिलाफ अहम प्रस्ताव पास करके देश में पहल की है, जो मुद्दा अभी तक न तो लोकसभा और न ही राज्यसभा में उठाया गया है। पंजाब ने सदा दमन के खिलाफ आवाज बुलंद की है और आप सरकार लोकहित में आवाज उठाती रहेगी। इंकलाब जिंदाबाद।"
पंजाब विधान सभा में बहस के दौरान हिस्सा लेते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि किसानों को नहरी पानी मुहैया करवाना सिर्फ सिंचाई पहल नहीं है, यह पंजाब के कृषि भविष्य को सुरक्षित करने, हमारे कीमती प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करने और आने वाली पीढ़ियों के हितों की रक्षा की ओर निर्णायक कदम है। उन्होंने कहा, "नहरी पानी का इस्तेमाल साल 2022 में 22 फीसदी से बढ़कर आज 80 फीसदी से ज्यादा हो गया है, जिसमें कृषि खेतों तक नहरी पानी ले जाने के लिए लगभग 14,000 किलोमीटर पाइपलाइन बिछाई गई हैं।"
मुख्यमंत्री ने कहा, "नहरी पानी पंजाब की फसलों के लिए देशी घी जैसा है। जब हमारे किसानों को जरूरी नहरी पानी मिलता है तो भूजल पर उनकी निर्भरता घटती है, कृषि उत्पादन में सुधार होता है और खेती ज्यादा टिकाऊ बनती है। हमारा मकसद यह सुनिश्चित करना है कि किसानों को पूरी तरह ट्यूबवेलों पर निर्भर होने की बजाय जहां और जब जरूरत हो, पानी मिले।"
उन्होंने जिक्र किया, "दशकों से हमारे किसानों को भूजल के गिरते स्तर के कारण अपनी फसलों की सिंचाई के लिए गहरे बोरवेल खोदने के लिए मजबूर होना पड़ा है। हमारे किसानों ने देश का पेट भरने के लिए दिन-रात मेहनत की है, लेकिन अपनी फसलों को बचाने का बोझ लगातार हमारे भूमिगत पानी के भंडारों पर पड़ता रहा है। हम ऐसी स्थिति नहीं बनने दे सकते जहां हमारे किसान पानी के लिए संघर्ष करें और हमारी आने वाली पीढ़ियों का भविष्य खतरे में पड़ जाए।"
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, "हमारे निरंतर प्रयासों से नहरी पानी का इस्तेमाल 2022 में 22 फीसदी से बढ़कर आज 80 फीसदी से ज्यादा हो गया है। कुछ इलाकों में नहरी पानी उन गांवों तक पहुंच गया है, जहां लोगों ने लगभग 80 साल से अपने खेतों में पानी बहता नहीं देखा था। यह सिर्फ सिंचाई व्यवस्था में बदलाव नहीं है; यह हमारे मेहनती और दृढ़ जज्बे वाले किसानों के जीवन में बदलाव है।"
मुख्यमंत्री ने कहा, "केंद्र सरकार की एक रिपोर्ट के अनुसार, नहरी सिंचाई के विस्तार के लिए हमारे प्रयासों के नतीजे के तौर पर पंजाब के भूजल स्तर में चार मीटर की बढ़ोतरी हुई है। जिन गांवों में नहरी पानी बांटने की पाइपलाइनें बिछाई गई हैं, वहां की रिपोर्टें भी उत्साहजनक हैं, जहां किसान भूजल स्तर में सुधार की बात कह रहे हैं। ये उपलब्धियां नहरी सिंचाई का विस्तार करने और भूजल की अतिरिक्त निकासी को घटाने के हमारे संकल्प को और मजबूत करती हैं।"
उन्होंने आगे कहा, "लगभग 18,000 क्यूसेक नहरी पानी खेतों तक पहुंच रहा है, जो सिंचाई सुविधाओं को मजबूत करने के हमारे प्रयासों को दर्शाता है। जिन इलाकों में किसान लंबे समय से सिंचाई की कमी से जूझ रहे थे, उन्हें अब राहत मिल रही है, जबकि ज्यादा पानी निकालने के कारण पहले डार्क जोन घोषित किए गए क्षेत्रों में सुधार के सकारात्मक संकेत दिख रहे हैं।"
उन्होंने सिंचाई सुधार के पूरे प्रभाव का मूल्यांकन करने के लिए फसल-वार उत्पादन के आंकड़ों को रिकॉर्ड करने और सत्यापित करने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि नहरी पानी प्राप्त करने वाले क्षेत्रों में धान की पैदावार बढ़ने की रिपोर्टें इस पहल का लाभ होने के योजनाबद्ध मूल्यांकन करने की महत्वता को दर्शाती हैं।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, "हम पानी के वितरण को मजबूत करने और नहरी पानी को खेतों तक ले जाने के लिए पहले ही लगभग 14,000 किलोमीटर पाइपलाइन बिछा चुके हैं। ये बिछाई गई पाइपलाइनें हमारे किसानों के फायदे के लिए तैयार किए गए ढांचे के बड़े पैमाने को दर्शाती हैं। हम सिंचाई नेटवर्क का विस्तार करने और नहरी पानी के दायरे में और कृषि भूमि लाने के लिए 6,000 किलोमीटर और पाइपलाइन बिछाएंगे।"
उन्होंने कहा कि इस विस्तार से खासकर उन क्षेत्रों के किसानों को लाभ होगा जो दशकों से नहरी पानी की योग्य आपूर्ति से वंचित रहे थे।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया, "आज भूजल की बचाई गई एक-एक बूंद हमारे किसानों और हमारे बच्चों के भविष्य के लिए रचनात्मक निवेश है। हम चाहते हैं कि हमारे किसानों को गहरे भूमिगत पानी के पीछे भागने के लिए मजबूर हुए बिना सिंचाई तक भरोसेमंद पहुंच मिले। हमारा मिशन स्पष्ट है: पंजाब के हर खेत तक नहरी पानी की पहुंच होनी चाहिए और हम अपने पास मौजूद नहरी पानी का 100 फीसदी इस्तेमाल करने की दिशा में काम जारी रखेंगे।"
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि उनकी सरकार नहरी नेटवर्क को मजबूत करना, पाइपलाइन-आधारित वितरण का विस्तार करना और पानी के सुचारू इस्तेमाल को प्रोत्साहित करना जारी रखेगी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि पंजाब की कृषि अपने प्राकृतिक संसाधनों को खत्म किए बिना उपजाऊ बनी रहे। उन्होंने आगे कहा, "यह हमें हमारे भूजल के कीमती संसाधनों को बहाल करने में मदद करेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि पंजाब हमारी कृषि के लिए पानी की रक्षा करते हुए देश का पेट भरने में देश का नेतृत्व करता रहे।" 

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