पंजाब सरकार द्वारा पेश बजट सिंचाई नेटवर्क को मजबूती देने सहित पारदर्शी माइनिंग प्रणाली को यकीनी बनाऐगा: बरिंदर कुमार गोयल

पंजाब सरकार द्वारा पेश बजट सिंचाई नेटवर्क को मजबूती देने सहित पारदर्शी माइनिंग प्रणाली को यकीनी बनाऐगा: बरिंदर कुमार गोयल


चंडीगढ़, 8 मार्च


मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार द्वारा पेश किए गए बजट को अग्रगामी और किसान कल्याण पर केंद्रित बताते हुए जल स्रोत और खनन मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने कहा कि बजट में पेश की गई भविष्य की रूपरेखा सिंचाई सुधारों को और मजबूत करने तथा माइनिंग सेक्टर में पारदर्शिता और दक्षता लाने के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण सिद्ध होगी।

बजट में पानी प्रबंधन बुनियादी ढांचे की मजबूती पर ध्यान केंद्रित करने की सराहना करते हुए कैबिनेट मंत्री ने कहा कि सरकार ने तीन वर्षों के अंदर नहरी सिंचाई क्षमता को दोगुना करके एक ऐतिहासिक मील का पत्थर हासिल किया है। उन्होंने कहा कि नहरी सिंचाई के अंतर्गत क्षेत्र जो वर्ष 2022 में 2.23 मिलियन एकड़ था, अप्रैल 2026 तक बढ़कर 5.3 मिलियन एकड़ हो जाएगा।

बरिंदर कुमार गोयल ने कहा कि पंजाब सरकार ने जल स्रोत क्षेत्र के लिए वर्ष 2026-27 के लिए 2971 करोड़ रुपये के बजट प्रावधान का प्रस्ताव रखा है, जिसमें नहरी सिंचाई का विस्तार करने और पक्के जल मार्गों तथा पाइपलाइनों के माध्यम से अंतिम सिरे तक पानी पहुंच सुनिश्चित करने के लिए सिंचाई ढांचे की मजबूती पर जोर दिया जाएगा। इन पहलों के माध्यम से लगभग पांच लाख हेक्टेयर तक नहरी सिंचाई सुविधा बहाल होने की उम्मीद है, जिससे नहरी सिंचाई के अंतर्गत कुल क्षेत्र 70 लाख एकड़ के निकट हो जाएगा, जो निर्धारित नहरी सिंचाई क्षेत्र का लगभग 90 प्रतिशत है।

कैबिनेट मंत्री ने बताया कि सरकार ने मालेरकोटला क्षेत्र के किसानों की सिंचाई संबंधी लंबे समय से चली आ रही मांगों को पूरा करने के लिए 288 करोड़ रुपये की लागत से महोराणा डिस्ट्रीब्यूटरी की मरम्मत और मालेरकोटला माइनर का निर्माण कार्य शुरू किया है। यह प्रोजेक्ट लगभग 44,000 एकड़ क्षेत्र को कवर करते हुए 55 गांवों को पहली बार नहरी पानी उपलब्ध कराएगा। उन्होंने बताया कि इस पहल के लिए वर्ष 2026-27 में 190 करोड़ रुपये रखे गए हैं।

कैबिनेट मंत्री ने बताया कि इसी प्रकार शहीद भगत सिंह नगर (नवांशहर) जिले के अर्ध-पहाड़ी और पानी की कमी वाले क्षेत्र में पहली बार नहरी पानी पहुंचाने के लिए बजट में काठगढ़ लिफ्ट स्कीम-2 की घोषणा की गई है, जिसके लिए सरकार ने 107 करोड़ रुपये का प्रबंध किया है। इस प्रोजेक्ट के माध्यम से 24 गांवों के लगभग 5,500 एकड़ क्षेत्र को सिंचाई सुविधाएं प्रदान करने के लिए बिश्त दोआब नहर से पानी लिफ्ट किया जाएगा। उन्होंने आगे कहा कि इस पहल से भूमिगत पानी पर निर्भरता कम होगी और इससे काफी हद तक बिजली की बचत होने की उम्मीद है।

बरिंदर कुमार गोयल ने कहा कि नहरों और जल स्रोतों की योजनाबद्ध सफाई, लाइनिंग और आधुनिकीकरण से सतही पानी के उपयोग में महत्वपूर्ण वृद्धि हुई है, जो अब 6.6 मिलियन एकड़ फुट तक पहुंच गई है और पिछले वर्ष की तुलना में 13 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। एक बड़ी सफलता के तहत नहरी पानी पहली बार 1365 स्थानों पर पहुंचा है, जिससे उन गांवों को लाभ हुआ है जो लगभग 20 से 50 वर्षों से नहरी सिंचाई से वंचित थे।

जल स्रोत मंत्री ने कहा कि पंजाब सरकार ने राज्य में बाढ़ सुरक्षा ढांचे की मजबूती के लिए भी निर्णायक कदम उठाए हैं, जिसमें 2025 की बाढ़ों के बाद प्रमुख नदियों के वैज्ञानिक मूल्यांकन के तहत 371 बाढ़ सुरक्षा और सुधार प्रोजेक्टों की पहचान की गई है। उन्होंने बताया कि इन पर लगभग 1500 करोड़ रुपये से अधिक का खर्च आएगा। इन कार्यों में से 489 करोड़ रुपये की लागत से 142 प्रोजेक्टों को 31 मार्च, 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जबकि शेष कार्य 2026-27 के दौरान पूरे किए जाएंगे।

चल रहे ड्रेनेज सुधार उपायों पर प्रकाश डालते हुए बरिंदर कुमार गोयल ने कहा कि वर्तमान वर्ष के दौरान 65 करोड़ रुपये के बाढ़ सुरक्षा और ड्रेन डिसिल्टिंग कार्य शुरू किए गए हैं। कई जिलों में लगभग 3,000 किलोमीटर ड्रेनों की सफाई हो चुकी है, जिससे ड्रेनेज क्षमता में काफी सुधार हुआ है। उन्होंने कहा कि इन कार्यों को विभागीय मशीनरी के माध्यम से अमल में लाने से लगभग 60 प्रतिशत तक सरकारी फंडों की बचत हुई है।

कैबिनेट मंत्री ने बताया कि सरकार ने चालू वित्तीय वर्ष के दौरान नहरों की बहाली और लाइनिंग के लिए एक व्यापक कार्यक्रम शुरू किया है, जिसके तहत चार लाख हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई कवरेज के अंतर्गत लाने के उद्देश्य से 1153 करोड़ रुपये की लागत से कार्य पहले से ही चल रहे हैं।

मुख्य बुनियादी ढांचा प्रोजेक्टों के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि फिरोजपुर फीडर के मजबूतीकरण संबंधी प्रोजेक्ट चल रहा है, जिसके तहत नहरी प्रणाली की क्षमता 11245 क्यूसेक से बढ़ाकर 13845 क्यूसेक करने का लक्ष्य है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025-26 के दौरान 195 करोड़ रुपये की लागत से 17 किलोमीटर नहरी हिस्से की लाइनिंग का कार्य पूरा किया गया है, जो अबोहर और फाजिल्का समेत टेलों तक पानी की बेहतर सप्लाई सुनिश्चित करेगा, जिससे राज्य अपने हिस्से के पूरे नहरी पानी के उपयोग के योग्य हो जाएगा।

माइनिंग क्षेत्र में सुधारों के बारे में बताते हुए कैबिनेट मंत्री ने कहा कि पंजाब ने भारत सरकार के खनन मंत्रालय द्वारा घोषित स्टेट माइनिंग रेडीनेस इंडेक्स में पहला स्थान प्राप्त किया है, जो राज्य सरकार के पारदर्शी शासन और वैज्ञानिक माइनिंग अभ्यासों की सफलता को दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि मान सरकार ने विभिन्न विधायी और नीतिगत सुधारों के माध्यम से नियामक ढांचे को मजबूत किया है, जिससे क्रशर यूनिटों और खनिज डीलरों की रजिस्ट्रेशन और रेगुलेशन को सक्षम बनाने के साथ-साथ खनन से खपत तक माइनर खनिज वैल्यू चेन की डिजिटल निगरानी सुनिश्चित की गई है।

कैबिनेट मंत्री ने आगे कहा कि पंजाब माइनर मिनरल नियमों में संशोधन करके पारदर्शी और समयबद्ध इकरारनामों की सुविधा देते हुए क्रशर माइनिंग साइटों और लैंडओनर माइनिंग साइटों जैसी नई श्रेणियां बनाई गई हैं तथा भूमि मालिकों को नियमों का पालन करते हुए अपनी जमीन पर खनन कार्यों की अनुमति दी गई है।

बरिंदर कुमार गोयल ने आगे कहा कि सख्त लागूकरण उपाय, सीमावर्ती क्षेत्रों में चेक पोस्टों की स्थापना और एक आधुनिक नीलामी प्रक्रिया की शुरुआत ने माइनिंग क्षेत्र में राजस्व उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि की है। परिणामस्वरूप माइनिंग से राज्य का राजस्व एक वर्ष के अंदर दोगुने से अधिक अर्थात 260 करोड़ रुपये से बढ़कर 500 करोड़ रुपये हो गया है। 

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