पंजाब में गन्ने की फसल के अधीन क्षेत्र बढ़कर 1.16 लाख हेक्टेयर हुआ: गुरमीत सिंह खुड्डियां
चंडीगढ़, 13 सितंबर:
पंजाब के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री स. गुरमीत सिंह खुड्डियां ने बताया कि चालू सीजन के दौरान राज्य में गन्ने की खेती के अधीन क्षेत्र बढ़कर 1.16 लाख हेक्टेयर हो गया है और सरकार ने 700 लाख क्विंटल गन्ना उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया है। उन्होंने कहा कि गेहूं और धान की तरह गन्ने की फसल को भी किसानों के लिए अधिक लाभकारी बनाने के उद्देश्य से सरकार द्वारा बहुआयामी रणनीति अपनाई जा रही है, जिसमें बड़े स्तर पर मशीनीकरण, आधुनिक कृषि तकनीकों को खेत स्तर तक पहुंचाना तथा गन्ना उत्पादकों को वित्तीय प्रोत्साहन देना शामिल है।
गन्ने को गेहूं और धान के बाद पंजाब की तीसरी सबसे महत्वपूर्ण फसल बताते हुए स. गुरमीत सिंह खुड्डियां ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार उन्नत कृषि तकनीकों को प्रोत्साहित करके उत्पादन बढ़ाने, चीनी की रिकवरी में सुधार करने तथा खेती की लागत कम करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए कृषि मंत्री ने बताया कि पंजाब में गन्ने की फसल के अधीन क्षेत्र वर्ष 2025-26 में 1,11,818 हेक्टेयर था, जो बढ़कर मौजूदा सीजन 2026-27 में 1,16,131 हेक्टेयर हो गया है। यदि मौसम अनुकूल रहा तो इस क्षेत्र से 700 लाख क्विंटल गन्ना उत्पादन होने की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि कुल क्षेत्र में से 17,662 हेक्टेयर क्षेत्र पतझड़ ऋतु की फसल, 51,174 हेक्टेयर बसंत ऋतु की फसल और 47,295 हेक्टेयर क्षेत्र मोड़ी (रैटून) फसल के अधीन है।
स. गुरमीत सिंह खुड्डियां ने कहा, "हालांकि, सक्रिय प्रयासों और मौसम के अनुकूल रहने की संभावना को देखते हुए हमें आगामी सीजन में उत्पादन और चीनी की रिकवरी, दोनों में पर्याप्त सुधार की उम्मीद है।"
सीजन 2026-27 के लिए सरकार ने अनुशंसित गन्ना खेती तकनीकों के प्रदर्शन प्लॉट लगाने वाले किसानों के लिए प्रति एकड़ 3,200 रुपये का प्रोत्साहन शुरू किया है। यह योजना 12 जिलों—अमृतसर, गुरदासपुर, होशियारपुर, जालंधर, शहीद भगत सिंह नगर, फतेहगढ़ साहिब, रूपनगर, एसएएस नगर, पटियाला, फाजिल्का, फरीदकोट और कपूरथला—में लागू की जाएगी।
इन डेमो प्लॉटों के माध्यम से खेती की लागत कम करते हुए उत्पादन बढ़ाने वाली उन्नत तकनीकों को प्रोत्साहित किया जाएगा।
इनमें चौड़ी कतार पद्धति, ट्रेंच प्लांटिंग, इंटरक्रॉपिंग, मल्चिंग तथा वैज्ञानिक रैटून प्रबंधन जैसी तकनीकें शामिल हैं।
बुवाई और कटाई के समय खेत मजदूरों की कमी की समस्या को दूर करने के लिए राज्य सरकार मशीनीकरण को बढ़ावा दे रही है। इसके तहत शुगरकेन हार्वेस्टर, छोटे ट्रैक्टर, गन्ना प्लांटर और रैटून मैनेजर सहित प्रमुख कृषि उपकरणों पर 40 प्रतिशत सब्सिडी की पेशकश की जा रही है।
स. खुड्डियां ने कहा, "मशीनीकरण अब कोई विकल्प नहीं बल्कि आवश्यकता है। हमारा उद्देश्य इन मशीनों को प्रत्येक किसान के लिए सुलभ और किफायती बनाना है।"
कृषि मंत्री ने बताया कि पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (पीएयू), कृषि विभाग और चीनी मिलों की संयुक्त टीमों द्वारा राज्यभर में व्यापक जागरूकता एवं प्रशिक्षण कैंप लगाए जा रहे हैं। इनका मुख्य फोकस वाइड स्पेसिंग ट्रेंच प्लांटिंग विधि, प्राथमिक बीज नर्सरी, रोगमुक्त प्रमाणित बीजों की किस्मों, संतुलित उर्वरक उपयोग, एकीकृत कीट प्रबंधन तथा रैटून प्रबंधन पर है।
अब तक 14 वेबिनारों के माध्यम से लगभग 1,100 किसानों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है, जबकि 320 प्रशिक्षण कैंपों के जरिए 15,000 से अधिक किसानों तक सीधे पहुंच बनाई गई है। इसके अतिरिक्त फेसबुक, यूट्यूब और फील्ड स्टाफ के माध्यम से भी किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध करवाया जा रहा है।
स. खुड्डियां ने कहा, "पंजाबभर के बहुत से किसान और खेत मजदूर गन्ने की फसल से जुड़े हुए हैं और उनकी आर्थिक खुशहाली सीधे तौर पर इस फसल पर निर्भर है। गन्ने की खेती को अधिक लाभकारी और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप बनाना हमारा प्रमुख दायित्व है।"
मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार के दृष्टिकोण पर प्रकाश डालते हुए स. खुड्डियां ने कहा कि वित्तीय प्रोत्साहन, तकनीकी उन्नयन, क्षमता निर्माण और कृषि मशीनीकरण पर आधारित यह बहुआयामी रणनीति गन्ने की खेती को किसानों के लिए अधिक लाभकारी व्यवसाय बनाने के उद्देश्य से तैयार की गई है।
उन्होंने कहा, "हमारी व्यापक रणनीति खेती की लागत कम करने, उत्पादकता बढ़ाने और चीनी की रिकवरी में सुधार करने में सहायक होगी। हम यह सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं कि पंजाब के गन्ना उत्पादकों को उनकी मेहनत का उचित लाभ मिले और वे राज्य की कृषि को और अधिक आधुनिक एवं उन्नत बनाने में सार्थक योगदान दे सकें।"


