पंजाब में धान की सीधी बिजाई के तहत रकबा 36 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 4 लाख एकड़ को पार किया: गुरमीत सिंह खुड्डियां
चंडीगढ़, 19 जुलाई:
भूजल के गिरते स्तर को रोकने के लिए किए गए प्रयासों के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं, जिसके तहत पंजाब ने 2026 के खरीफ सीजन के दौरान 4 लाख एकड़ से अधिक रकबा धान की सीधी बिजाई (डी. एस. आर.) के तहत लेकर हाल के वर्षों में इस उन्नत तकनीक (डीएसआर) को अपनाने में अभूतपूर्व वृद्धि का रिकॉर्ड बनाया है। कृषि मंत्री स. गुरमीत सिंह खुड्डियां ने आज यहां बताया कि यह रकबा पिछले वर्ष की तुलना में 36 प्रतिशत अधिक है।
इस संबंध में विवरण साझा करते हुए स. गुरमीत सिंह खुड्डियां ने कहा कि इस खरीफ सीजन में 31,478 पंजीकृत किसानों ने 4,00,433.26 एकड़ में धान की सीधी बिजाई की है, जबकि वर्ष 2025 में यह रकबा 2.94 लाख एकड़ था। राज्य सरकार द्वारा धान की सीधी बिजाई करने वाले किसानों को प्रति एकड़ 1500 रुपये की प्रोत्साहन राशि भी दी जाती है और किसानों को लगभग 61 करोड़ रुपये देने का अनुमान है।
कृषि मंत्री ने कहा कि पिछले वर्ष (16%) की तुलना में इस वर्ष हुई दोगुनी वृद्धि दर्शाती है कि प्रदेश के किसान डीएसआर को धान की पारंपरिक रोपाई के एक स्थायी विकल्प के रूप में स्वीकार करने लगे हैं। डीएसआर के तहत प्रति एकड़ 15 से 20 प्रतिशत पानी की बचत होती है। उन्होंने किसानों के नेतृत्व वाले इस प्रगतिशील बदलाव को भूजल संकट के खिलाफ प्रदेश की सबसे मजबूत सुरक्षा बताया।
कृषि मंत्री ने बताया कि फाजिल्का जिला 12,063 किसानों द्वारा 1,55,422.77 एकड़ रकबे में धान की सीधी बिजाई के साथ पूरे पंजाब में अग्रणी रहा है। इसके बाद श्री मुक्तसर साहिब 7,345 किसानों द्वारा 1,06,038.81 एकड़ के साथ दूसरे और फिरोजपुर 38,088.59 एकड़ रकबे और 1,929 किसानों के साथ तीसरे स्थान पर रहा है। बठिंडा और संगरूर भी शीर्ष पांच जिलों में शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री स. भगवंत मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार द्वारा आने वाले वर्षों में डी.एस.आर. के तहत रकबे के और विस्तार को सुनिश्चित करने के लिए लगातार किसानों का तकनीकी मार्गदर्शन किया जा रहा है और क्षेत्रीय स्तर पर सहायता दी जा रही है।
स. खुड्डियां ने जिला अधिकारियों को धान की सीधी बिजाई के तहत रकबे की तत्काल सत्यापन करने के आदेश दिए हैं ताकि किसानों को प्रोत्साहन राशि का वितरण किया जा सके। उन्होंने कहा कि यह केवल प्रोत्साहन राशि देने की बात नहीं है, बल्कि पंजाब में भूजल सहित अन्य प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की स्थायी संस्कृति पैदा करने का प्रयास है।


