पंजाब सरकार ने वाछिंत अपराधियों और गैंगस्टरों पर शिकंजा कसने के लिए नई इनाम नीति को किया नोटीफाई

पंजाब सरकार ने वाछिंत अपराधियों और गैंगस्टरों पर शिकंजा कसने के लिए नई इनाम नीति को किया नोटीफाई

चंडीगढ़, 24 फरवरी:

मुख्य मंत्री भगवंत सिंह मान के दिशा- निर्देशों पर पंजाब को गैंगस्टर मुक्त बनाने के लिए शुरु किए 'गैंगस्टरां ते वार' मुहिम को ओर मज़बूत करते, पंजाब सरकार ने आज 'वाछिंत अपराधियों की गिरफ़्तारी के लिए पंजाब की इनाम नीति' को नोटीफाई हो गई है जिसके साथ फील्ड अधिकारी और विंग के प्रमुख ( एसडीजीपी/ एडीजीपी) अधिकारित तौर पर उन लोगों जिनकी तरफ से दी गई जानकारी के साथ अपराधियों की गिरफ़्तारी होती है, या फिर असाधारण कार्यवाहियां करने वाले पुलिस अधिकारियों/ कर्मचारियों को इनाम दे सकेंगे।

ज़िक्रयोग्य है कि इस नीति को मुख्य मंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब कैबिनेट द्वारा सोमवार को परवानगी दी गई थी। इस नीति का उद्देश्य इनाम देने के लिए एक पारदर्शी और योजनाबद्ध विधि को यकीनी बनाना, सूचना देने वालों को प्रेरित करना और ज़रुरी अपराधियों को पकड़ने में कानून लागूकरन वाले अधिकारियों/ कर्मचारियों के यत्नों को मान्यता देना है।

डायरैक्टर जनरल आफ पुलिस ( डीजीपी) पंजाब गौरव यादव ने कहा, " इस नीति के अंतर्गत, एसएसपीज़ को 1 लाख रुपए तक, सीपीज़ और आईजीपीज़/ डीआईजीज़ रेंजों को 1.5 लाख रुपए तक, विंग के मुखिया को 2 लाख रुपए तक के इनाम देने के लिए अधिकारित किया गया, जब कि डीजीपी पंजाब 2 लाख रुपए से अधिक के इनाम मंज़ूर कर सकते है। "

इस नीति का उदेश्य लोगों और पुलिस कर्मचारियों दोनों को भरोसेयोग्य और कारवाईयोग्य जानकारी प्रदान करने के लिए उत्साहित करना है जिससे कानून से बचने वाले अपराधियों की पहचान, उनके स्थान का पता लगाने और गिरफ़्तारी की जा सके। इसमें " ज़रुरी अपराधियों" का व्यापक नैटवर्क शामिल है, जिसमें भगौड़े, घोषित अपराधी, आदतन अपराधी और जानबुझ कर गिरफ़्तारी से बचने वाले दोषी व्यक्ति शामिल है।

डीजीपी ने स्पष्ट किया कि इनाम एक एक्स- ग्रेशिया अदायगी है और इसको अधिकार के तौर पर नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि इनाम की राशि अपराध की गंभीरता, सूचना देने वाले द्वारा लिए गए जोखिम के स्तर और प्रदान की गई जानकारी की पूरी गुणवत्ता को ध्यान में रखते, केस-दर-केस आधार पर निर्धारित की जाएगी।

पारदर्शिता और सुरक्षा को यकीनी बनाने के लिए, नीति के अंतर्गत एक ढांचागत सिफ़ारिश प्रक्रिया को अनिर्वाय बनाया गया है और कार्यवाही मं  शामिल निगरान गज़टिड अधिकारी की तरफ से लाज़िमी तौर पर जानकारी की भरोसे योग्यता और शामिल व्यक्तियों की विशेष भूमिकाओं को प्रमाणित करने सम्बन्धित रिपोर्ट संचित करवानी होगी। डीजीपी ने कहा कि जानकारी प्रदान करने वाले व्यक्तियों की पहचान हर पड़ाव पर गुप्त रखी जाएगी।