इमारतों के अंदर भटके तो रास्ता दिखाएगा AI: जीपीएस के 3 नए और सटीक विकल्प

इमारतों के अंदर रास्ता भटकने की समस्या खत्म, 3 नई तकनीकों से एआई दिखाएगा सटीक नेविगेशन।

बड़े भवनों में रास्ता दिखाने के लिए जीपीएस के 3 नए एआई आधारित विजुअल सिस्टम और तकनीकें तैयार की जा रही हैं।

इमारतों के अंदर भटके तो रास्ता दिखाएगा AI: जीपीएस के 3 नए और सटीक विकल्प

जब भी हमें किसी अनजान जगह जाना होता है, तो सबसे पहला ख्याल स्मार्टफोन में मौजूद ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (GPS) का आता है। खुली सड़कों और हाईवे पर जीपीएस एक बेहतरीन साथी है, लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि जैसे ही आप किसी विशाल शॉपिंग मॉल, बड़े अस्पताल, अंडरग्राउंड मेट्रो स्टेशन या अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के अंदर कदम रखते हैं, आपके फोन का वह 'नीला डॉट' (Blue Dot) काम करना बंद कर देता है या गलत दिशा दिखाने लगता है?

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जीपीएस की यह सबसे बड़ी कमजोरी है कि इसके सैटेलाइट सिग्नल कंक्रीट की मोटी दीवारों, स्टील के स्ट्रक्चर और छतों को पार नहीं कर पाते। इसी खामी को दूर करने के लिए अब तकनीकी दुनिया में एक नई रेस शुरू हो गई है—जीपीएस का एक ऐसा विकल्प खोजने की रेस जो बंद इमारतों (Indoor Navigation) में भी सेंटीमीटर तक की सटीकता से आपकी लोकेशन बता सके। इस दिशा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर आधारित 'विजुअल सिस्टम' और 3 अन्य नई तकनीकों पर सबसे ज्यादा जोर दिया जा रहा है।

एआई बेस्ड विजुअल सिस्टम (AI-Based Visual System) क्या है?

एआई विजुअल सिस्टम या विजुअल पोजिशनिंग सिस्टम (VPS) स्मार्टफोन के कैमरे और एआई एल्गोरिदम का इस्तेमाल करता है। जब आप किसी मॉल के अंदर होते हैं, तो आपको बस अपने फोन का कैमरा खोलकर आस-पास की चीजों को स्कैन करना होता है। एआई तुरंत उस इमारत के पहले से मौजूद 3D मैप के डेटाबेस से आपके कैमरे के दृश्य का मिलान करता है और स्क्रीन पर ऑगमेंटेड रियलिटी (AR) के जरिए तीर (Arrows) बनाकर आपको सही रास्ता दिखाता है। यह सिस्टम यह भी पहचान लेता है कि आप किस फ्लोर पर हैं और किस दुकान के सामने खड़े हैं।

जीपीएस को रिप्लेस करने वाली 3 नई प्रमुख तकनीकें :

एआई विजुअल सिस्टम के अलावा, टेक कंपनियां और शोधकर्ता तीन मुख्य तकनीकों को इनडोर नेविगेशन का भविष्य मान रहे हैं:

1. अल्ट्रा-वाइडबैंड (Ultra-Wideband - UWB) और ब्लूटूथ बीकन

जीपीएस के सैटेलाइट की जगह अब इमारतों के अंदर छोटे-छोटे ट्रांसमीटर (जिन्हें बीकन कहा जाता है) लगाए जा रहे हैं। ब्लूटूथ लो एनर्जी (BLE) बीकन आपके फोन को सिग्नल भेजकर आपकी अनुमानित लोकेशन बताते हैं। वहीं, अल्ट्रा-वाइडबैंड (UWB) तकनीक इससे भी एक कदम आगे है। रेडियो फ्रीक्वेंसी का इस्तेमाल करने वाली यह तकनीक इतनी सटीक है कि यह इमारतों के अंदर आपकी लोकेशन को कुछ सेंटीमीटर की सटीकता के साथ ट्रैक कर सकती है। एप्पल (Apple) और सैमसंग (Samsung) जैसे ब्रांड्स पहले से ही अपने फ्लैगशिप स्मार्टफोन्स में UWB चिप्स दे रहे हैं।

2. जियोमैग्नेटिक पोजिशनिंग (Geomagnetic Positioning)

यह एक बेहद ही रोचक और बिना किसी अतिरिक्त हार्डवेयर के काम करने वाली तकनीक है। हर बड़ी इमारत में लोहे और स्टील का एक विशाल ढांचा होता है, जो पृथ्वी के प्राकृतिक चुंबकीय क्षेत्र (Magnetic Field) को प्रभावित करता है। इससे इमारत के अंदर हर जगह का एक अनोखा 'मैग्नेटिक फिंगरप्रिंट' बन जाता है। आधुनिक स्मार्टफोन में मौजूद कंपास (Compass) और सेंसर इस मैग्नेटिक पैटर्न को एआई की मदद से पढ़ते हैं और बिना किसी वाई-फाई या बाहरी सिग्नल के आपकी लोकेशन का सटीक पता लगा लेते हैं।

3. वाई-फाई राउंड ट्रिप टाइम (Wi-Fi RTT) :

ज्यादातर बड़े भवनों में वाई-फाई राउटर लगे होते हैं। पुरानी तकनीक में राउटर के सिग्नल की ताकत से लोकेशन का अंदाजा लगाया जाता था, जो सटीक नहीं था। लेकिन नई वाई-फाई RTT तकनीक यह मापती है कि आपके फोन से सिग्नल को राउटर तक जाने और वापस आने में कितना मिलीसेकंड का समय लगा। तीन या अधिक राउटर्स से इस डेटा को एआई की मदद से प्रोसेस करके, यह तकनीक एक मीटर की सटीकता के साथ आपको मॉल या एयरपोर्ट के अंदर नेविगेट कर सकती है।

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इनडोर नेविगेशन के फायदे और भविष्य :

इन तकनीकों के आने से हमारी रोजमर्रा की जिंदगी में बड़े बदलाव होंगे। सोचिए, एक विशाल अस्पताल में आपको ओपीडी या किसी खास डॉक्टर का कमरा ढूंढ़ने के लिए किसी से पूछना नहीं पड़ेगा। आपका फोन सीधे आपको वहीं ले जाएगा। आग लगने या भूकंप जैसी आपात स्थिति में बचाव दल फंसे हुए लोगों की सटीक लोकेशन पता कर सकेंगे। इसके अलावा, दृष्टिबाधित (Visually impaired) लोगों के लिए ऑडियो कमांड के जरिए एआई विजुअल सिस्टम एक वरदान साबित होगा।

निष्कर्ष के तौर पर, जीपीएस बाहरी दुनिया का राजा बना रहेगा, लेकिन जब बात इमारतों के अंदर नेविगेशन की होगी, तो एआई और ये तीन नई तकनीकें मिलकर भविष्य का रास्ता तय करेंगी। दुनिया अब 'आउटडोर' से 'इनडोर' मैपिंग की एक नई क्रांति की दहलीज पर खड़ी है।

 

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