हरियाणा के सफाई कर्मचारियों के लिए बड़ा अपडेट: ₹2000 प्रति माह जोखिम भत्ता लागू, लेकिन परफॉर्मेंस इंसेंटिव छिनने से कर्मचारियों में भारी रोष

हरियाणा के सफाई कर्मचारियों के लिए बड़ा अपडेट: ₹2000 प्रति माह जोखिम भत्ता लागू, लेकिन परफॉर्मेंस इंसेंटिव छिनने से कर्मचारियों में भारी रोष

चंडीगढ़: हरियाणा के शहरी निकाय विभाग (Urban Local Bodies Department) ने प्रदेश के सफाई कर्मचारियों और सीवरमैनों के लिए एक अहम फैसला लिया है। विभाग ने नियमित सफाई कर्मचारियों और सीवरमैनों को 2,000 रुपये प्रति माह 'जोखिम भत्ता' (Risk Allowance) देने की घोषणा की है। यह भत्ता उन्हें पालिका रोल पर काम कर रहे सफाई कर्मचारियों और सीवरमैनों के समान दिया जाएगा। हालांकि, इस फैसले के साथ ही सरकार ने एक ऐसा कदम भी उठाया है, जिससे कर्मचारियों में भारी निराशा और रोष फैल गया है। विभाग ने कर्मचारियों को मिलने वाली परफॉर्मेंस आधारित सालाना प्रोत्साहन राशि (Performance Incentive) को तत्काल प्रभाव से वापस ले लिया है।

क्या है विभाग का नया आदेश? शहरी निकाय विभाग द्वारा जारी आधिकारिक पत्र के अनुसार, अब सभी नियमित सफाई कर्मचारियों और सीवरमैनों को हर महीने 2,000 रुपये का जोखिम भत्ता मिलेगा। यह कदम कर्मचारियों के काम में शामिल स्वास्थ्य और शारीरिक जोखिमों को देखते हुए उठाया गया है। लेकिन, इस खुशी के साथ ही पत्र में एक बड़ी कटौती का भी जिक्र है।

पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि पूर्व में जारी पत्र संख्या DULB/Estt./3E/2023/35496 (दिनांक 24 नवंबर, 2023) और DULB/Estt./3E/2026/2828 (दिनांक 04 जून, 2026) के तहत नियमित सफाई कर्मचारियों को जो परफॉर्मेंस से जुड़े वार्षिक प्रोत्साहन दिए जाते थे—जिसमें 12,000 रुपये और 9,000 रुपये की सालाना राशि शामिल थी—उसे तत्काल प्रभाव से रद्द किया जा रहा है।

नगर पालिकाओं पर पड़ेगा आर्थिक बोझ इस आदेश में एक और महत्वपूर्ण बात यह जोड़ी गई है कि इस जोखिम भत्ते पर होने वाला सारा खर्च संबंधित नगर पालिकाओं और नगर निगमों को स्वयं वहन करना होगा। राज्य सरकार की ओर से इस मद (फंड) के लिए कोई भी अतिरिक्त अनुदान (Grant), ऋण (Loan) या किसी भी प्रकार की वित्तीय सहायता प्रदान नहीं की जाएगी। यह फैसला वित्त विभाग और मानव संसाधन विभाग की सहमति के बाद लागू किया गया है।

कर्मचारी संघ ने जताई कड़ी आपत्ति सरकार के इस फैसले पर कर्मचारी यूनियनों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। राज्य नगर पालिका कर्मचारी संघ के प्रधान नरेश शास्त्री ने परफॉर्मेंस अलाउंस वापस लिए जाने की कड़ी निंदा की है। उन्होंने इसे पूरी तरह से 'अन्यायपूर्ण' करार दिया है।

नरेश शास्त्री ने स्पष्ट किया कि, "कर्मचारियों की बेहतर कार्यशैली और लगन को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन राशि (Performance Incentive) दिया जाना बेहद जरूरी है। इससे कर्मचारी बेहतर काम करने के लिए प्रेरित होते हैं। सरकार द्वारा इसे वापस लेना कहीं से भी उचित नहीं है।" उन्होंने आगे कहा कि जो 2,000 रुपये का भत्ता दिया जा रहा है, वह 'रिस्क अलाउंस' है, जो उनके जानलेवा और जोखिम भरे काम के लिए है। इसे परफॉर्मेंस इंसेंटिव का विकल्प नहीं माना जा सकता।

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आने वाले दिनों में कर्मचारी संघ इस फैसले के खिलाफ रणनीति बना सकता है, जिससे नगर पालिकाओं के कामकाज पर असर पड़ने की संभावना है।

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