61 के हुए 'मिस्टर परफेक्शनिस्ट': वो सुपरस्टार जो शूटिंग पर न घड़ी देखता है, न तकनीक का गुलाम है
स्मार्टफोन के इस एडवांस दौर में भी सालों तक पेजर इस्तेमाल करने वाले आमिर खान ने साबित किया है कि असली सफलता तकनीक से नहीं, बल्कि काम के प्रति अटूट फोकस से मिलती है।
61 वर्षीय आमिर खान शूटिंग के दौरान कभी घड़ी नहीं देखते। वे आधुनिक तकनीक से ज्यादा अपने काम और बेहतरीन सिनेमा पर फोकस करते हैं।
सिनेमा के प्रति अनूठा समर्पण: समय की पाबंदियों से परे
बॉलीवुड के 'मिस्टर परफेक्शनिस्ट' कहे जाने वाले आमिर खान 61 साल के हो गए हैं। फिल्म इंडस्ट्री में तीन दशकों से ज्यादा का समय बिताने के बाद भी उनके काम करने का तरीका सबसे अलग और खास है। आज जहां फिल्में कुछ ही हफ्तों में शूट करके खत्म कर दी जाती हैं, वहीं आमिर खान आज भी उसी पुराने और धैर्यपूर्ण तरीके से काम करना पसंद करते हैं। सेट पर मौजूद उनके साथी कलाकारों और क्रू मेंबर्स का कहना है कि जब आमिर खान शूटिंग कर रहे होते हैं, तो वे कभी घड़ी नहीं देखते। उनके लिए शिफ्ट खत्म होने का समय कोई मायने नहीं रखता। उनका एकमात्र लक्ष्य तब तक काम करना होता है, जब तक कि शॉट एकदम 'परफेक्ट' न हो जाए। यह कला के प्रति उनका वह सम्मान है जो आज की भागदौड़ भरी इंडस्ट्री में दुर्लभ हो चुका है।

तकनीक से दूरी और काम पर 100% फोकस :
आज के दौर में जहां हर इंसान के हाथ में स्मार्टफोन है और सोशल मीडिया के बिना जीवन अधूरा सा लगता है, आमिर खान का तकनीक के प्रति रवैया हमेशा से उलट रहा है। आपको जानकर हैरानी होगी कि जब मोबाइल फोन बाजार में आम हो गए थे और हर बड़ा सितारा लेटेस्ट फोन लेकर चलता था, तब भी आमिर खान लंबे समय तक 'पेजर' (Pager) का ही इस्तेमाल करते थे। उनका मानना था कि मोबाइल फोन लगातार बजने से ध्यान भटकता है और वे अपने काम या किरदार में पूरी तरह से डूब नहीं पाते।
पेजर का इस्तेमाल वे सिर्फ बेहद जरूरी संदेश प्राप्त करने के लिए करते थे, ताकि वे दुनिया से जुड़े भी रहें और अनावश्यक डिस्टर्बेंस से भी बचे रहें। यह उनकी उस मानसिकता को दर्शाता है जहां वे गैजेट्स को खुद पर हावी नहीं होने देते। आमिर का स्पष्ट मानना है कि तकनीक हमारी सुविधा के लिए है, न कि हमें उसका गुलाम बनने के लिए।
क्वांटिटी नहीं, क्वालिटी है पहचान :
आमिर खान की इस जीवनशैली का सीधा असर उनकी फिल्मों पर दिखता है। वे साल में कई फिल्में करने के बजाय एक या दो साल में केवल एक फिल्म लेकर आते हैं। 'दंगल', 'पीके', 'थ्री इडियट्स' और 'लगान' जैसी फिल्में इस बात का प्रमाण हैं कि जब कोई कलाकार तकनीक और समय की परवाह किए बिना अपनी कला में पूरी तरह डूब जाता है, तो इतिहास रचा जाता है।

शूटिंग के दौरान उनका फोन अक्सर बंद रहता है या उनकी टीम के पास होता है। वे ब्रेक के दौरान भी फोन स्क्रीन पर उंगलियां चलाने के बजाय स्क्रिप्ट पढ़ने, अपने को-स्टार्स के साथ सीन डिस्कस करने या सेट की बारीकियों को समझने में समय बिताते हैं।
आज की पीढ़ी के लिए एक बड़ा सबक :
61 वर्ष की उम्र में आमिर खान का यह दृष्टिकोण आज की युवा पीढ़ी और नए कलाकारों के लिए एक बहुत बड़ा सबक है। आज के समय में जब हर कोई 'मल्टी-टास्किंग' और डिजिटल दुनिया में उलझा हुआ है, आमिर खान यह सिखाते हैं कि 'डीप वर्क' (Deep Work) और एकाग्रता की ताकत क्या होती है। तकनीक निश्चित रूप से काम को आसान बनाती है, लेकिन किसी भी उत्कृष्ट रचना (Masterpiece) के लिए इंसान का फोकस और समय को भूलकर काम करने का जुनून ही सबसे ज्यादा काम आता है।
आमिर खान सिर्फ एक अभिनेता नहीं हैं, बल्कि सिनेमा के एक ऐसे छात्र हैं जो 61 साल की उम्र में भी सीखने और बेहतर करने की भूख रखते हैं। उनकी यह सादगी और काम के प्रति दीवानगी ही उन्हें भारतीय सिनेमा का एक अजेय और अद्वितीय सुपरस्टार बनाती है।


