ईरान की खुली चेतावनी: 'भारत से लौट रहे हमारे जंगी जहाज को डुबोने का अमेरिका से लेंगे बदला', 104 नौसैनिकों की मौत
अमेरिका द्वारा ईरानी युद्धपोत डुबोए जाने के बाद तनाव चरम पर, ईरान ने दी धमकी।
श्रीलंका के पास अमेरिकी पनडुब्बी ने भारत से लौट रहे ईरानी युद्धपोत को डुबोया, जिसमें 104 नौसैनिकों की जान गई।
तेहरान/कोलंबो:
ईरान ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि वह अपने नौसैनिक युद्धपोत 'IRIS देना' (IRIS Dena) पर हुए जानलेवा अमेरिकी हमले का कड़ा और सीधा बदला लेगा। 4 मार्च को हिंद महासागर में श्रीलंका के तट के पास एक अमेरिकी पनडुब्बी ने इस ईरानी युद्धपोत को टॉरपीडो से निशाना बनाकर डुबो दिया था। इस विनाशकारी हमले में 104 ईरानी नौसैनिकों की मौत हो गई, जबकि 32 अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए।
यह युद्धपोत भारत में आयोजित एक बहुराष्ट्रीय नौसैन्य अभ्यास से हिस्सा लेकर वापस अपने देश लौट रहा था। इस घटना ने मध्य पूर्व से लेकर हिंद महासागर तक तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है। दूसरे विश्व युद्ध के बाद किसी पनडुब्बी द्वारा युद्धपोत को डुबोने की यह दशकों में सबसे बड़ी घटनाओं में से एक मानी जा रही है।

हमला कब और कैसे हुआ?
ईरानी सेना और राज्य समाचार एजेंसी IRNA की रिपोर्ट के मुताबिक, 4 मार्च को ईरानी नौसेना का फ्रिगेट 'IRIS देना' श्रीलंका के दक्षिणी तटीय शहर गाले (Galle) से लगभग 19 समुद्री मील दूर अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र से गुजर रहा था।
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अमेरिकी पनडुब्बी का वार: इसी दौरान लॉस एंजिल्स श्रेणी की अमेरिकी पनडुब्बी 'USS चार्लोट' (USS Charlotte) ने युद्धपोत पर दो 'मार्क 48' टॉरपीडो दागे।
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भयंकर विस्फोट: इनमें से एक टॉरपीडो युद्धपोत के पिछले हिस्से से टकराया, जिससे एक जोरदार धमाका हुआ और जहाज कुछ ही देर में हिंद महासागर में डूब गया।
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बचाव अभियान: श्रीलंकाई नौसेना ने मदद का संकटकालीन (Distress) सिग्नल मिलने के तुरंत बाद रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। उन्होंने समुद्र से 32 घायल ईरानी नौसैनिकों को निकाला और गाले के स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया।
भारत से लौट रहा था युद्धपोत :
यह घटना कूटनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील है क्योंकि 'IRIS देना' भारत के विशाखापत्तनम में आयोजित 'मिलन 2026' (MILAN Peace 2026) बहुराष्ट्रीय नौसैनिक युद्धाभ्यास में हिस्सा लेने के बाद स्वदेश लौट रहा था। ईरानी अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया है कि यह युद्धपोत एक "शांति और प्रशिक्षण मिशन" पर था। ईरान के विदेश मंत्रालय का दावा है कि यह जहाज भारतीय नौसेना का मेहमान था और घटना के वक्त पूरी तरह से निहत्था था।
ईरान का गुस्सा और 'बदले' की कसम :
इस हमले के बाद ईरान के भीतर भारी आक्रोश है। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने इस हमले को 'समुद्र में किया गया एक क्रूर अत्याचार' और 'अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन' करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा: "युद्धपोत 'देना' भारतीय नौसेना का मेहमान था, जिस पर ईरान के तटों से 2,000 मील दूर बिना किसी चेतावनी के हमला किया गया। अमेरिका को अपने द्वारा स्थापित की गई इस मिसाल पर बुरी तरह पछताना पड़ेगा।" ईरानी सेना ने संकेत दिए हैं कि वह इसके जवाब में पूरे क्षेत्र में फैले अमेरिकी सैन्य और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाएगी।

अमेरिका ने की हमले की पुष्टि :
अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) ने इस हमले की आधिकारिक पुष्टि की है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ (Pete Hegseth) ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसे "शांत मौत" (Quiet Death) का नाम दिया और इसे अमेरिकी नौसेना की एक बड़ी सामरिक कार्रवाई बताया। अमेरिका ने ईरानी जहाज के निहत्थे होने के दावों को सिरे से खारिज किया है, हालांकि उन्होंने हमले के वक्त जहाज से किसी सीधे खतरे के प्रमाण सार्वजनिक नहीं किए हैं।
भारत और श्रीलंका पर बढ़ता कूटनीतिक दबाव :
इस हमले ने भारत और श्रीलंका के लिए गंभीर कूटनीतिक चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।
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श्रीलंका का रुख: अमेरिका लगातार श्रीलंका पर दबाव बना रहा है कि वह बचाए गए 32 ईरानी सैनिकों को अमेरिका को सौंप दे ताकि उनसे पूछताछ की जा सके। हालांकि, श्रीलंका की एक स्थानीय अदालत ने आदेश दिया है कि मारे गए सभी 104 ईरानी नाविकों के शव सम्मानपूर्वक ईरानी दूतावास को सौंपे जाएं।
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भारत के लिए चिंता: एक ओर अमेरिका भारत का 'प्रमुख रक्षा भागीदार' है, तो दूसरी ओर ईरान भी भारत का अहम रणनीतिक साझेदार है। भारत के ठीक पड़ोस (हिंद महासागर) में युद्धपोत को डुबोए जाने की इस घटना ने भारत के लिए एक असहज स्थिति पैदा कर दी है।
फरवरी 2026 के अंत से अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच भड़की इस व्यापक जंग ने अब अपने पैर हिंद महासागर तक पसार लिए हैं। क्या इस हमले के बाद ईरान सीधे तौर पर अमेरिकी नौसेना पर कोई बड़ा पलटवार करेगा? इस सवाल ने पूरी दुनिया की धड़कनें तेज कर दी हैं।


