साल 2026-27 में पंजाब का आबकारी राजस्व 12, 800 करोड़ रुपए तक पहुंचेगा; स्कूलों, अस्पतालों और लोक- समर्थकीय योजनाओं के लिए फंड के साथ जनतक कल्याण को मिलेगा बढावा: हरपाल सिंह चीमा

 साल 2026-27 में पंजाब का आबकारी राजस्व 12, 800 करोड़ रुपए तक पहुंचेगा; स्कूलों, अस्पतालों और लोक- समर्थकीय योजनाओं के लिए फंड के साथ जनतक कल्याण को मिलेगा बढावा: हरपाल सिंह चीमा

चंडीगढ़, 23 फरवरी

साल 2026- 27 के लिए 12, 800 करोड़ रुपए के आबकारी राजस्व का अनुमान लगाते हुए, पंजाब के वित्त, योजना, आबकारी और कर मंत्री एडवोकेट हरपाल सिंह चीमा ने आज यहां दावा किया कि पंजाब के आबकारी सुधारों ने न केवल सूबे के राजस्व का नया अध्याय सृजित किया है, बल्कि अब यह स्कूलों, अस्पतालों और अन्य लोक-समर्थकीय योजनाओं को फंड देकर सीधे तौर पर जनतक कल्याण में विस्तार किया  है।

नई आबकारी नीति की घोषणा करते हुए मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि राज्य पिछली कांग्रेस और अकाली- भाजपा सरकारों की रुकावट से निर्णायक तौर पर बाहर निकल आया है। उन्होंने कहा कि आबकारी क्षेत्र को एक पारदर्शी, इनफोर्समैंट- प्रेरित और विकास- प्रमुख क्षेत्र में बदल दिया गया है, जो नाजायज व्यापार पर शिकंजा कसने के साथ-साथ रिकार्ड राजस्व एकत्रित कर रहा है।

पंजाब भवन में एक प्रैस कान्फ़्रेंस को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा, जिनके साथ आबकारी और कर कमिश्नर जतिंदर जोरवाल भी उपस्थित थे, ने राज्य के आबकारी सफ़र का विस्तृत तुलनात्मक विश्लेषण पेश किया। उन्होंने बताया, " साल 2011-12 में अकाली- भाजपा शासन दौरान आबकारी राजस्व केवल 2,755 करोड़ रुपए था। अगले दशक दौरान भी आबकारी राजस्व प्राप्ति की कार्यगुज़ारी सुस्त रही और 2021-22 में कांग्रेस शासन दौरान यह केवल 6,255 करोड़ रुपए तक ही पहुंच सका। "

आबकारी और कर मंत्री ने ज़ोर दे कर कहा, " हालांकि, मुख्य मंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार द्वारा 2022-23 में एक मज़बूत नीतिगत ढांचा लागू किए जाने के बाद, राज्य ने तुरंत 8,428 करोड़ रुपए का आबकारी राजस्व प्राप्ति में बढा कदम आगे बढाया। यह रफ़्तार बेरोक जारी रही है, जिससे यह राजस्व वित्त वर्ष 2024-25 में 10, 744 करोड़ रुपए तक पहुंच गया और वित्तीय साल 2025-26 के लिए भी 11, 200 करोड़ रुपए का मौजूदा लक्ष्य पूरा किया जा रहा है। "

साल 2026- 27 की नई आबकारी नीति के मुख्य नुक्तों बारे जानकारी देते वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने बताया, " पंजाब सरकार ने कामकाज को उचित बनाने और मौजूदा कारोबारों की सहायता के लिए कई अहम कदम उठाए है। इनमें वित्तीय वर्ष 2025- 26 की फ़ीसों में 6.5% वृद्धि के साथ मौजूदा रिटेल लायसैंसों का नवीनीकरण शामिल है। जिन मामलों में ग्रुपों का नवीनीकरण नहीं होता, वहां अलाटमैंट एक पारदर्शी ई-टैंडर प्रक्रिया के द्वारा की जाएगी। "

उन्होंने आगे बताया, " मार्किट को नियंत्रित करते हुए खपतकारों की मांग को पूरा करने के लिए 50 और 65 डिगरी वाली पंजाब मीडियम लीकर ( PML) का कोटा 3 फीसदी बढा दिया गया है, जिससे कुल कोटा 8.79 करोड़ प्रूफ़ लीटर हो गया है। इसके इलावा, नाजायज शराब की बिक्री को रोकने के लिए, सरकार आबकारी एक्ट के अधीन उच्च- अपराध वाले क्षेत्रों के तौर पर पहचाने गए इलाकों में विशेष तौर पर 40- डिगरी पी.एम.एल सब-वैंड शुरू करेगी। "

कारोबार करने की सुविधा ( इज आफ डुईंग बिज़नस) पर पंजाब सरकार के ध्यान पर ज़ोर देते वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने ऐलान किया, " ई.डी.पी और ई.बी.पी अधीन ब्रांड की कीमतों में 4 फीसदी तक की वृद्धि अब एक आटो-प्रवानगी विधि के अधीन होंगे, जिससे दफ़्तरी कामकाज सम्बन्धित देरी में काफ़ी कमी आएगी। " उन्होंने कहा कि सरकार यूनिटों की कार्य कुश्लता में सुधार करने के लिए यूनिटों के संचालन और डिस्पैच घंटों को बढ़ाने के लिए भी काम कर रही है। "

औद्योगिक स्व- निर्भरता और आर्थिक विभिन्नता की तरफ एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए, वित्त मंत्री ने घोषणा की कि पंजाब में अब माल्ट मैनुफ़ेक्चरिंग यूनिटों की स्थापना को उत्साहित किया जाएगा। उन्होंने कहा, " यह रणनीतक पहलकदमी राज्य की औद्योगिक नीति में एक बढ़िया विकास का संकेत देती है, जिससे पंजाब जहां केवल शराब की बोटलिंग करता था अब बदल कर एक मानक उत्पादन हब में तबदील हो जाएगा। "

वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा, " जौं की प्रोसेसिंग से ले कर प्रीमियम माल्ट की कशीदगी तक के पूरे उत्पादन चक्कर को राज्य के अंदर ही विकसित करने पीछे राज्य का उदेश्य कच्चे स्पिरिट के लिए बाहरी स्पलयरों पर अपनी निर्भरता को ख़त्म करना है। यह तबदीली न केवल राज्य की सरहदों के अंदर उत्तम और गुणवत्ता वाली घरेलू स्पिरिट के उत्पादन को यकीनी बनाएगी, बल्कि एक मज़बूत फार्म-टू-फैक्ट्री ईकोसिस्टम भी स्थापित करेगी जिससे पंजाब के कृषि क्षेत्र को बड़ा लाभ होगा। "

उन्होंने कहा कि यह तबदीली राज्य के अंदर पूंजी को बरकरार रखने, विशेष तकनीकी रोज़गार पैदा करने और उच्च- स्तरीय औद्योगिक कशीदगी में पंजाब की स्थिति को मज़बूत करने के लिए तैयार की गई है।

इस मौके इनफोर्समैंट के आंकड़े सांझा करते वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने पड़ोसी राज्यों और चंडीगढ़ से शराब की तस्करी विरुद्ध पंजाब सरकार की 'ज़ीरो- टालरैंस' नीति को दोहराया। उन्होंने कहा, " कानून लागू करने वाली एजेंसियां बेहद सक्रिय रही है, जिसके नतीजे के तौर पर 4,406 एफ.आई.आर. दर्ज की गई और 4,324 व्यक्तियों को गिरफ़्तार किया गया। इन कार्यवाहियों में 26, 218 छापेमारी और 24, 832 नाके लगाना शामिल है, जिससे 455 वाहन और 1,76, 552 शराब की बोतलों ज़ब्त की गई। इसके इलावा आबकारी विभाग ने 38, 23, 576 लीटर लाहन नष्ट की, 82, 990 लीटर ईथानौल और ई.एन.ए, 66, 794 लीटर नाजायज शराब ज़ब्त की गई और 374 चलती भट्टियों को तबाह किया गया, जो जनतक सुरक्षा और कानूनी अखंडता प्रति राज्य सरकार की वचनबद्धता को दर्शाता है। 

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