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                <title>Iran US conflict - Nirpakh Post</title>
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                <description>Iran US conflict RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>ईरान की खुली चेतावनी: 'भारत से लौट रहे हमारे जंगी जहाज को डुबोने का अमेरिका से लेंगे बदला', 104 नौसैनिकों की मौत </title>
                                    <description><![CDATA[श्रीलंका के पास अमेरिकी पनडुब्बी ने भारत से लौट रहे ईरानी युद्धपोत को डुबोया, जिसमें 104 नौसैनिकों की जान गई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nirpakhpost.in/breaking-news/%E0%A4%9C%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%80-%E0%A4%9C%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%9C-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%A1%E0%A5%81%E0%A4%AC%E0%A4%BE-%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A5%A4/article-5238"><img src="https://www.nirpakhpost.in/media/400/2026-03/456763707_918265877013776_1269052628668966265_n.jpg" alt=""></a><br /><div class="container">
<div class="markdown markdown-main-panel enable-updated-hr-color" dir="ltr">
<h5 style="text-align:justify;"><span style="font-family:arial, helvetica, sans-serif;"><strong>तेहरान/कोलंबो:</strong> </span></h5>
<p style="text-align:justify;"><span style="font-family:arial, helvetica, sans-serif;">ईरान ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि वह अपने नौसैनिक युद्धपोत 'IRIS देना' (IRIS Dena) पर हुए जानलेवा अमेरिकी हमले का कड़ा और सीधा बदला लेगा। 4 मार्च को हिंद महासागर में श्रीलंका के तट के पास एक अमेरिकी पनडुब्बी ने इस ईरानी युद्धपोत को टॉरपीडो से निशाना बनाकर डुबो दिया था। इस विनाशकारी हमले में 104 ईरानी नौसैनिकों की मौत हो गई, जबकि 32 अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span style="font-family:arial, helvetica, sans-serif;">यह युद्धपोत भारत में आयोजित एक बहुराष्ट्रीय नौसैन्य अभ्यास से हिस्सा लेकर वापस अपने देश लौट रहा था। इस घटना ने मध्य पूर्व से लेकर हिंद महासागर तक तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है। दूसरे विश्व युद्ध के बाद किसी पनडुब्बी द्वारा युद्धपोत को डुबोने की यह दशकों में सबसे बड़ी घटनाओं में से एक मानी जा रही है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span style="font-family:arial, helvetica, sans-serif;"><img src="https://www.nirpakhpost.in/media/2026-03/456763707_918265877013776_1269052628668966265_n.jpg" alt="456763707_918265877013776_1269052628668966265_n" width="1200" height="550"></img></span></p>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="font-family:arial, helvetica, sans-serif;"><strong>हमला कब और कैसे हुआ?</strong></span></h5>
<p style="text-align:justify;"><span style="font-family:arial, helvetica, sans-serif;">ईरानी सेना और राज्य समाचार एजेंसी IRNA की रिपोर्ट के मुताबिक, 4 मार्च को ईरानी नौसेना का फ्रिगेट 'IRIS देना' श्रीलंका के दक्षिणी तटीय शहर गाले (Galle) से लगभग 19 समुद्री मील दूर अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र से गुजर रहा था।</span></p>
<ul style="text-align:justify;">
<li>
<p><span style="font-family:arial, helvetica, sans-serif;"><strong>अमेरिकी पनडुब्बी का वार:</strong> इसी दौरान लॉस एंजिल्स श्रेणी की अमेरिकी पनडुब्बी 'USS चार्लोट' (USS Charlotte) ने युद्धपोत पर दो 'मार्क 48' टॉरपीडो दागे।</span></p>
</li>
<li>
<p><span style="font-family:arial, helvetica, sans-serif;"><strong>भयंकर विस्फोट:</strong> इनमें से एक टॉरपीडो युद्धपोत के पिछले हिस्से से टकराया, जिससे एक जोरदार धमाका हुआ और जहाज कुछ ही देर में हिंद महासागर में डूब गया।</span></p>
</li>
<li>
<p><span style="font-family:arial, helvetica, sans-serif;"><strong>बचाव अभियान:</strong> श्रीलंकाई नौसेना ने मदद का संकटकालीन (Distress) सिग्नल मिलने के तुरंत बाद रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। उन्होंने समुद्र से 32 घायल ईरानी नौसैनिकों को निकाला और गाले के स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया।</span></p>
</li>
</ul>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="font-family:arial, helvetica, sans-serif;"><strong>भारत से लौट रहा था युद्धपोत :</strong></span></h5>
<p style="text-align:justify;"><span style="font-family:arial, helvetica, sans-serif;">यह घटना कूटनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील है क्योंकि 'IRIS देना' भारत के विशाखापत्तनम में आयोजित 'मिलन 2026' (MILAN Peace 2026) बहुराष्ट्रीय नौसैनिक युद्धाभ्यास में हिस्सा लेने के बाद स्वदेश लौट रहा था। ईरानी अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया है कि यह युद्धपोत एक "शांति और प्रशिक्षण मिशन" पर था। ईरान के विदेश मंत्रालय का दावा है कि यह जहाज भारतीय नौसेना का मेहमान था और घटना के वक्त पूरी तरह से निहत्था था।</span></p>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="font-family:arial, helvetica, sans-serif;"><strong>ईरान का गुस्सा और 'बदले' की कसम :</strong></span></h5>
<p style="text-align:justify;"><span style="font-family:arial, helvetica, sans-serif;">इस हमले के बाद ईरान के भीतर भारी आक्रोश है। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने इस हमले को 'समुद्र में किया गया एक क्रूर अत्याचार' और 'अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन' करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा: <em>"युद्धपोत 'देना' भारतीय नौसेना का मेहमान था, जिस पर ईरान के तटों से 2,000 मील दूर बिना किसी चेतावनी के हमला किया गया। अमेरिका को अपने द्वारा स्थापित की गई इस मिसाल पर बुरी तरह पछताना पड़ेगा।"</em> ईरानी सेना ने संकेत दिए हैं कि वह इसके जवाब में पूरे क्षेत्र में फैले अमेरिकी सैन्य और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाएगी।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span style="font-family:arial, helvetica, sans-serif;"><img src="https://www.nirpakhpost.in/media/2026-03/milan-2026.webp" alt="milan-2026" width="900" height="600"></img></span></p>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="font-family:arial, helvetica, sans-serif;"><strong>अमेरिका ने की हमले की पुष्टि :</strong></span></h5>
<p style="text-align:justify;"><span style="font-family:arial, helvetica, sans-serif;">अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) ने इस हमले की आधिकारिक पुष्टि की है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ (Pete Hegseth) ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसे "शांत मौत" (Quiet Death) का नाम दिया और इसे अमेरिकी नौसेना की एक बड़ी सामरिक कार्रवाई बताया। अमेरिका ने ईरानी जहाज के निहत्थे होने के दावों को सिरे से खारिज किया है, हालांकि उन्होंने हमले के वक्त जहाज से किसी सीधे खतरे के प्रमाण सार्वजनिक नहीं किए हैं।</span></p>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="font-family:arial, helvetica, sans-serif;"><strong>भारत और श्रीलंका पर बढ़ता कूटनीतिक दबाव :</strong></span></h5>
<p style="text-align:justify;"><span style="font-family:arial, helvetica, sans-serif;">इस हमले ने भारत और श्रीलंका के लिए गंभीर कूटनीतिक चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।</span></p>
<ul style="text-align:justify;">
<li>
<p><span style="font-family:arial, helvetica, sans-serif;"><strong>श्रीलंका का रुख:</strong> अमेरिका लगातार श्रीलंका पर दबाव बना रहा है कि वह बचाए गए 32 ईरानी सैनिकों को अमेरिका को सौंप दे ताकि उनसे पूछताछ की जा सके। हालांकि, श्रीलंका की एक स्थानीय अदालत ने आदेश दिया है कि मारे गए सभी 104 ईरानी नाविकों के शव सम्मानपूर्वक ईरानी दूतावास को सौंपे जाएं।</span></p>
</li>
<li>
<p><span style="font-family:arial, helvetica, sans-serif;"><strong>भारत के लिए चिंता:</strong> एक ओर अमेरिका भारत का 'प्रमुख रक्षा भागीदार' है, तो दूसरी ओर ईरान भी भारत का अहम रणनीतिक साझेदार है। भारत के ठीक पड़ोस (हिंद महासागर) में युद्धपोत को डुबोए जाने की इस घटना ने भारत के लिए एक असहज स्थिति पैदा कर दी है।</span></p>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><span style="font-family:arial, helvetica, sans-serif;">फरवरी 2026 के अंत से अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच भड़की इस व्यापक जंग ने अब अपने पैर हिंद महासागर तक पसार लिए हैं। क्या इस हमले के बाद ईरान सीधे तौर पर अमेरिकी नौसेना पर कोई बड़ा पलटवार करेगा? इस सवाल ने पूरी दुनिया की धड़कनें तेज कर दी हैं।</span></p>
</div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Breaking News</category>
                                            <category>World</category>
                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 14 Mar 2026 17:21:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[NIRPAKH POST]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>होर्मुज जलडमरूमार्ग  में महायुद्ध की आहट: ईरान का जहाजों को 'संपर्क' करने का अल्टीमेटम, अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर पर हमले का दावा</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान ने होर्मुज से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों को चेतावनी दी है और अमेरिकी युद्धपोत पर हमले का दावा किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nirpakhpost.in/national/%E0%A4%B9%E0%A5%8B%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%9C-%E0%A4%9C%E0%A4%B2%E0%A4%A1%E0%A4%AE%E0%A4%B0%E0%A5%82%E0%A4%AE%E0%A4%A7%E0%A5%8D%E0%A4%AF-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A5%81%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%A7-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%86%E0%A4%B9%E0%A4%9F-%E0%A4%88%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%9C%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%8B/article-5218"><img src="https://www.nirpakhpost.in/media/400/2026-03/hormuz_large_0940_21.webp" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">मध्य पूर्व (Middle East) में तनाव अब एक पूर्ण विकसित युद्ध की कगार पर पहुंच गया है। ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे सीधे सैन्य टकराव ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग—होर्मुज जलडमरूमध्य—को एक 'वॉर जोन' में तब्दील कर दिया है। ईरानी नौसेना ने एक अप्रत्याशित कदम उठाते हुए साफ कर दिया है कि इस खाड़ी से गुजरने वाले किसी भी जहाज को अब सीधे तौर पर उनसे संपर्क साधना होगा और अपनी पहचान स्पष्ट करनी होगी। इस बीच, अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर पर मिसाइल हमले के दावों ने अंतरराष्ट्रीय बिरादरी की चिंताएं बढ़ा दी हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>ईरानी नौसेना की चेतावनी:</strong></p>
<p style="text-align:justify;"><strong>"हमसे बात करें, वरना..."</strong> ईरानी सशस्त्र बलों की केंद्रीय संचालन कमान 'खातम अल-अनबिया' और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने सरकारी टेलीविजन पर एक कड़ा बयान जारी किया है। ईरान का कहना है कि संयुक्त राज्य अमेरिका, इजरायल या उनके किसी भी सहयोगी देश के जहाज, या वह जहाज जो इनका तेल ले जा रहे हैं, उन्हें अब एक "वैध सैन्य लक्ष्य" माना जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">ईरानी नौसेना ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों को ईरानी रेडियो फ्रीक्वेंसी पर जवाब देना होगा। इसके पीछे ईरान की मंशा इस क्षेत्र पर अपना पूर्ण नियंत्रण जताना और अमेरिका द्वारा बनाए जा रहे दबाव का कूटनीतिक और सैन्य जवाब देना है। ईरानी सैन्य अधिकारियों ने चुनौती देते हुए कहा है कि यह जलडमरूमध्य इजरायल और अमेरिका की शत्रुतापूर्ण नीतियों का परिणाम भुगतेगा और वे जरूरत पड़ने पर इस रास्ते को पूरी तरह से ब्लॉक कर सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.nirpakhpost.in/media/2026-03/hormuz_large_0940_21.webp" alt="hormuz_large_0940_21" width="1200" height="705"></img></p>
<p style="text-align:justify;"><strong>रोजाना 130 जहाजों की आवाजाही: दुनिया की जीवनरेखा</strong></p>
<p style="text-align:justify;">होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी (Persian Gulf) को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। यह दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण 'एनर्जी चोकपॉइंट' है। आंकड़ों के अनुसार, यहां से हर रोज औसतन 130 व्यापारिक और तेल से लदे जहाज गुजरते हैं। वैश्विक तेल व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा (20%) और भारी मात्रा में लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) इसी रास्ते से होकर जाती है। ईरान की धमकी का सीधा अर्थ है—पूरी दुनिया की ऊर्जा सप्लाई को बंधक बनाना। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह मार्ग कुछ हफ्तों के लिए भी बाधित होता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकती हैं, जिससे वैश्विक मंदी का खतरा पैदा हो जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर पर मिसाइल अटैक का दावा</strong></p>
<p style="text-align:justify;">तनाव के इस माहौल में सबसे चौंकाने वाली खबर अमेरिकी नौसैनिक बेड़े पर हमले की है। ईरानी सेना और उनके समर्थित विद्रोही गुटों ने दावा किया है कि उन्होंने लाल सागर और होर्मुज के आसपास तैनात अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर (जिसमें यूएसएस जेराल्ड आर. फोर्ड और यूएसएस अब्राहम लिंकन का नाम उछाला गया है) को निशाना बनाकर कई बैलिस्टिक मिसाइलें और कामिकेज (Kamikaze) ड्रोन दागे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">ईरानी जनसंपर्क कार्यालय के मुताबिक, उनके मिसाइल और ड्रोन हमलों के खौफ से अमेरिकी युद्धपोतों को अपनी जगह बदलने पर मजबूर होना पड़ा है। हालांकि, अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) ने इस हमले में अपने किसी भी एयरक्राफ्ट कैरियर को गंभीर नुकसान पहुंचने की पुष्टि नहीं की है। अमेरिका का कहना है कि उनके उन्नत एयर डिफेंस सिस्टम ने ईरान द्वारा दागी गई अधिकतर मिसाइलों और ड्रोन्स को हवा में ही इंटरसेप्ट करके नष्ट कर दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>अमेरिका का पलटवार और माइन-लेइंग जहाजों का खात्मा</strong></p>
<p style="text-align:justify;">ईरान की इन आक्रामक गतिविधियों को देखते हुए अमेरिका ने भी अपनी सैन्य कार्रवाई तेज कर दी है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में 'डेथ वैली' बनाने की साजिश रच रहा है। सैटेलाइट इमेज और खुफिया रिपोर्ट्स में यह खुलासा हुआ कि ईरानी नौसेना छोटी नावों (USVs) का उपयोग करके समुद्र के नीचे भारी मात्रा में 'सी-माइंस' (समुद्री बारूदी सुरंगें) बिछा रही है ताकि अमेरिकी और व्यापारिक जहाजों को डुबाया जा सके।</p>
<p style="text-align:justify;">जवाब में, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने एक बड़ा ऑपरेशन चलाते हुए ईरान के 10 से 16 इनएक्टिव माइन-लेइंग (बारूदी सुरंग बिछाने वाले) जहाजों को मिसाइल स्ट्राइक से पूरी तरह तबाह कर दिया है। अमेरिका ने ईरान को खुली चेतावनी दी है कि वह वैश्विक ऊर्जा सप्लाई मार्ग को बाधित करने की कोई भी कोशिश न करे। व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया है कि आतंकवादियों और उपद्रवियों को दुनिया के व्यापार को बंधक बनाने की इजाजत नहीं दी जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>अब आगे क्या होगा ?</strong></p>
<p style="text-align:justify;">मौजूदा हालात बता रहे हैं कि कोई भी पक्ष पीछे हटने को तैयार नहीं है। ईरान पहली बार होर्मुज में ड्रोन बोट (USV) और अंडरवाटर हथियारों का इस्तेमाल कर रहा है, जो कम लागत में भारी तबाही मचाने में सक्षम हैं। दूसरी ओर, अमेरिका किसी भी कीमत पर इस 'चोकपॉइंट' को खुला रखना चाहता है। यह सिर्फ दो देशों की लड़ाई नहीं रह गई है; यह एक ऐसा भू-राजनीतिक संकट है जो यूरोप से लेकर एशिया तक के देशों की अर्थव्यवस्था को सीधे तौर पर प्रभावित कर रहा है। आने वाले दिनों में अगर कूटनीतिक बातचीत के जरिए समाधान नहीं निकाला गया, तो यह संघर्ष एक विनाशकारी क्षेत्रीय युद्ध में बदल सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Breaking News</category>
                                            <category>Politics</category>
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                <pubDate>Fri, 13 Mar 2026 13:30:15 +0530</pubDate>
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