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                <title>Punjab State Farmers - Nirpakh Post</title>
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                <description>Punjab State Farmers RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>पंजाब राज्य किसान और कृषि श्रमिक आयोग द्वारा पंजाब के जल संसाधनों की उपलब्धता और पानी से सम्बन्धित अध्ययन रिपोर्ट पंजाब विधान सभा की कमेटी को सौंपी</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>चंडीगढ़, 20 जूनः</strong><br />पंजाब राज्य किसान और कृषि श्रमिक आयोग ने नेशनल इंस्टीट्यूट हाइड्रोलोजी, रुड़की से पंजाब के जल संसाधनों की उपलब्धता और पानी से सम्बन्धित अन्य मुद्दों पर एक अध्ययन करवाया है। इस रिपोर्ट के नतीजे पंजाब विधान सभा द्वारा गठित गुरजीत सिंह राणा की अध्यक्षता अधीन 6 विधायकों की विधान सभा कमेटी को सौंपे गए हैं। कमेटी ने इस रिपोर्ट की सराहना की है और आयोग को निर्देश दिए हैं कि वह रिसाव/सिमने पैटर्न को मापने के साथ-साथ कार्बन डेटिंग और आइसोटोप प्रौद्योगिकियों का प्रयोग करके इसके दायरे को सूक्ष्म दर तक बढ़ाने के लिए अध्ययन करें। पंजाब</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nirpakhpost.in/punjab/punjab-state-farmers-and-agricultural/article-2259"><img src="https://www.nirpakhpost.in/media/400/2025-06/whatsapp-image-2025-06-20-at-4.52.08-pm.jpeg" alt=""></a><br /><p><strong>चंडीगढ़, 20 जूनः</strong><br />पंजाब राज्य किसान और कृषि श्रमिक आयोग ने नेशनल इंस्टीट्यूट हाइड्रोलोजी, रुड़की से पंजाब के जल संसाधनों की उपलब्धता और पानी से सम्बन्धित अन्य मुद्दों पर एक अध्ययन करवाया है। इस रिपोर्ट के नतीजे पंजाब विधान सभा द्वारा गठित गुरजीत सिंह राणा की अध्यक्षता अधीन 6 विधायकों की विधान सभा कमेटी को सौंपे गए हैं। कमेटी ने इस रिपोर्ट की सराहना की है और आयोग को निर्देश दिए हैं कि वह रिसाव/सिमने पैटर्न को मापने के साथ-साथ कार्बन डेटिंग और आइसोटोप प्रौद्योगिकियों का प्रयोग करके इसके दायरे को सूक्ष्म दर तक बढ़ाने के लिए अध्ययन करें। पंजाब की बढ़ रही पानी की चुनौतियों से निपटने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुये पंजाब राज्य किसान और कृषि श्रमिक आयोग ने आज प्रमुख जल माहिरों और वैज्ञानिकों की 15 एजेंडा बिंदुओं के अंतर्गत उच्च स्तरीय मीटिंग बुलायी जिसकी अध्यक्षता आयोग के चेयरमैन प्रो. सुखपाल सिंह ने की। मीटिंग में आईआईटी रोपड़ के डीन (सी. ए. पी. एस.) डा. पुष्पेंद्र पाल सिंह, डा. सरबजोत कौर, रेडियोधर्मी टूलज़ पर प्रमुख वैज्ञानिक, आईआईटी रोपड़; हर्षद कुलकर्णी, सहायक प्रोफ़ैसर, आईआईटी मंडी, डा रणजीत के झा, आईआईटी मंडी; गोपाल कृष्ण, वैज्ञानिक-ई, नेशनल इंस्टीट्यूट आफ हाइड्रोलोजी (ऐनआईऐच), रुड़की ने हिस्सा लिया। इस मीटिंग का आयोजन आयोग के प्रशासनिक अधिकारी- कम-सचिव डा. रणजोध सिंह बैंस ने किया। बाग़बानी विभाग के पूर्व डायरैक्टर डा. गुरकंवल सिंह ने भी राज्य को पेश चुनौतियों के बारे अपनी विशेषज्ञ राय सांझी की।<br /><br />विशेषज्ञों ने पंजाब के भूजल के गिर रहे संसाधनों का नक्शा बनाने के लिए एडवांस्ड आईसोटोपिक स्टड्डीज़ और कार्बन डेटिंग, रिचार्ज बढ़ाने के लिए प्राचीन पैलीयो- चैनलों की पहचान करने के लिए हैलीबोरन सर्वेक्षणों और दक्षिण- पश्चिमी पंजाब के गंभीर सेम और खारेपन के मुद्दों को हल करने के लिए केंद्रित रणनीति समेत तुरंत हस्तक्षेप की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। इसके इलावा, मध्य पंजाब में पानी की स्पलाई बढ़ाने के लिए उझ दरिया ( 5 बीसीऐम की अनुमानित क्षमता वाले) पर एक जल भंडार की संभावना अध्ययन और स्थायी निकासी सीमाएं निर्धारित करने के लिए जलभंडारों की वैज्ञानिक विशेषता के बारे विचार विमर्श किया गया। भारी धातुओं को अवशोषित करने वाले पौधों की किस्में और खारेपन-सहनशील बाँस के पौधे लगाने और भूजल के रिचार्ज/पुनर्भरण के लिए रिवायती जल संसाधनों और पुराने कुओं का पुर्नोद्धार करने जैसे नवीन समाधानों की खोज के लिए विचारों का आदान- प्रदान किया गया। मीटिंग में पंजाब की कृषि को बाढ़ों और मौसम की अत्यंत घटनाओं के लिए और ज्यादा लचीला बनाने के लिए रणनीतियों के बारे भी विचार-विमर्श किया गया।<br /><br />डा. बैंस ने कहा कि दिन भर के विचार-विमर्श की सिफारिशें, प्रमुख खोज संस्थाओं के सहयोग से लागू किये जाने वाले राज्य व्यापी जल संरक्षण मिशन की नींव के तौर पर काम करेंगी। डा. सुखपाल सिंह ने राज्य के पानी के संकट से निपटने के लिए बुनियादी खोज की ज़रूरत पर ज़ोर दिया और भरोसा प्रकट किया कि उपस्थित प्रसिद्ध वैज्ञानिक किसान आयोग के सहयोग के साथ महत्वपूर्ण योगदान डालेंगे।<br /><br />मीटिंग के एक महत्वपूर्ण नतीजे में सर्वसम्मति से सभी प्रमुख खोज संस्थाओं ने किसान आयोग के साथ नजदीकी सहयोग करने के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। यह भी फ़ैसला किया गया कि आईआईटी रोपड़, आईआईटी मंडी, एनआईएच और पंजाब राज्य किसान और कृषि श्रमिक आयोग के दरमियान तुरंत एक कंसोरटियम सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किये जाएंगे जिससे पंजाब के भूजल को कायम रखने, संभालने और दूषित होने से रोकने पर केन्द्रित 15 सूत्रीय व्यापक, राज्य स्तरीय प्रोजैक्ट शुरू किये जा सकें। इस सांझी पहल का उद्देश्य प्रमुख खोज संस्थाओं की वैज्ञानिक और तकनीकी महारत को आयोग की नीति और लागू करने की क्षमता के साथ इकट्ठा करना है। यह प्रोजैक्ट उन्नत खोज, क्षेत्र स्तरीय हस्तक्षेप और रणनीतिक योजनाबंदी को जोड़ कर भूजल के घटने और प्रदूषण की चुनौतियों का समाधान करेगा। इसमें कृषि के लिए पानी की सुरक्षा और राज्य भर में पीने वाले साफ़ पानी को यकीनी बनाने के लिए तुरंत उपाय और लम्बी मियाद की रणनीतियां शामिल होंगी। इस अध्ययन के निष्कर्ष और नतीजन नीतिगत प्रयास पंजाब को देश के सबसे विकसित राज्यों में शामिल कर देंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Punjab</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 Jun 2025 20:09:58 +0530</pubDate>
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                <title>पंजाब राज्य किसान एवं कृषि श्रमिक आयोग द्वारा राज्य में जल संकट पर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़, 14 जून:</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">  पंजाब राज्य किसान एवं कृषि श्रमिक आयोग की अध्यक्षता में प्रो. डॉ. सुखपाल सिंह के नेतृत्व में पंजाब में जल संकट विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में कार्बन डेटिंग, मिट्टी और जल के समस्थानिक (आइसोटोप) अध्ययन और पंजाब में सीपेज (जल रिसाव) से संबंधित एक व्यापक सूक्ष्म-स्तरीय अध्ययन पर चर्चा की गई। पूर्व बागवानी निदेशक डॉ. गुरकंवल सिंह ने सह-अध्यक्षता की, और आयोजन का प्रबंधन पीएसएफसी के प्रशासनिक अधिकारी-सह-सचिव डॉ. आर.एस. बैंस ने किया।<br /><br />कार्यशाला के पहले दिन पंजाब की जटिल हाइड्रोजियोलॉजिकल (जल-भूगर्भीय) चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा हुई। पंजाब कृषि</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nirpakhpost.in/punjab/punjab-state-farmers-and-agriculture/article-2162"><img src="https://www.nirpakhpost.in/media/400/2025-06/pic-(64).jpeg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़, 14 जून:</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> पंजाब राज्य किसान एवं कृषि श्रमिक आयोग की अध्यक्षता में प्रो. डॉ. सुखपाल सिंह के नेतृत्व में पंजाब में जल संकट विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में कार्बन डेटिंग, मिट्टी और जल के समस्थानिक (आइसोटोप) अध्ययन और पंजाब में सीपेज (जल रिसाव) से संबंधित एक व्यापक सूक्ष्म-स्तरीय अध्ययन पर चर्चा की गई। पूर्व बागवानी निदेशक डॉ. गुरकंवल सिंह ने सह-अध्यक्षता की, और आयोजन का प्रबंधन पीएसएफसी के प्रशासनिक अधिकारी-सह-सचिव डॉ. आर.एस. बैंस ने किया।<br /><br />कार्यशाला के पहले दिन पंजाब की जटिल हाइड्रोजियोलॉजिकल (जल-भूगर्भीय) चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा हुई। पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (पीएयू), लुधियाना और पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ के विशेषज्ञों ने भूजल प्रबंधन हेतु महत्वपूर्ण अनुसंधानों और सतत समाधानों की प्रस्तुति दी।<br /><br />पीएयू लुधियाना से डॉ. जे.पी. सिंह और डॉ. समनप्रीत कौर ने भूजल से संबंधित चिंताओं और संभावित समाधानों पर विस्तृत प्रस्तुति दी। डॉ. कौर ने विशेष रूप से ‘स्मार्ट सबमर्सिबल पंप’ के विकास की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि किसान वास्तविक समय में डेटा प्राप्त कर भूजल का समझदारी से उपयोग कर सकें।<br /><br />चर्चा में सैलिन क्षेत्रों, भूजल पुनर्भरण की दक्षता और तकनीकों जैसे मुद्दों पर विचार हुआ। उन्होंने बताया कि पीएयू ने वर्षा जल संरक्षण हेतु कई मॉडल विकसित किए हैं, जिन्हें बड़े स्तर पर कार्यान्वित करने की आवश्यकता है। पीने और सिंचाई योग्य जल के प्रदूषण की समस्या भी एक गहरी चिंता का विषय बनी हुई है।<br /><br />वैज्ञानिकों ने कई अध्ययनों को भी साझा किया, जिनमें पंजाब की जल प्रणालियों का ऐतिहासिक विश्लेषण, भूजल रिचार्ज हेतु परित्यक्त कुओं और गांवों के तालाबों का उपयोग तथा डाइरेक्ट सीडेड राइस (डी एस आर) और पारंपरिक रोपाई वाले धान की खेती के अंतर्गत भूजल पुनर्भरण स्तर का तुलनात्मक अध्ययन शामिल था।<br /><br />पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ के मानवविज्ञान और जलविज्ञान विभागों से डॉ. महेश ठाकुर, डॉ. जे.एस. शेखावत, डॉ. प्रकाश तिवारी और डॉ. जुगराज सिंह ने पंजाब में सतत जल प्रबंधन हेतु हाइड्रोजियोलॉजिकल चुनौतियों, शोध निष्कर्षों और प्रस्तावित शोध-आधारित समाधानों पर प्रस्तुति दी। उनकी प्रस्तुति पंजाब के विभिन्न क्षेत्रों में यूरेनियम और आर्सेनिक जैसे उभरते और खतरनाक जल प्रदूषकों पर केंद्रित रही। उन्होंने पांच जिलों में किए गए अध्ययन की जानकारी साझा की, जिसमें जल और मिट्टी में प्रदूषण की मैपिंग की गई और विशेषकर केंद्रीय पंजाब में गंभीर परिणाम सामने आए। कृषि और औद्योगिक गतिविधियों से मिट्टी में फैलते प्रदूषण पर भी चर्चा की गई। टीम ने जिलेवार स्थानीय मैपिंग, भूजल की गुणवत्ता सूचकांक निर्धारण और सिंचाई उपयुक्तता अध्ययन जैसे और गहन शोध की आवश्यकता पर बल दिया।<br /><br />दूसरे दिन कृषि एवं किसान कल्याण निदेशालय, पंजाब से डॉ. अरुण कुमार, डॉ. संदीप सिंह वालिया, श्री दीपक सेठी और श्रीमती रीतिका ने पंजाब में भूजल की स्थिति पर अपने कार्य प्रस्तुत किए। उनकी रिपोर्ट ने गंभीर स्थिति को उजागर किया कि राज्य के 153 ब्लॉकों में से 115 ब्लॉक अत्यधिक भूजल दोहन के कारण अतिदोहन की श्रेणी में हैं। पंजाब की औसत भूजल निकासी दर 153.86% है, यानी राज्य जितना जल पुनर्भरण करता है, उससे 1.5 गुना अधिक भूजल निकाल रहा है।<br /><br />भूजल की यह तीव्र कमी लगभग 10 मिलियन एकड़-फुट (एम ए एफ ) की वार्षिक गिरावट के रूप में देखी जा रही है, जो प्राकृतिक पुनर्भरण और दोहन के बीच असंतुलन को दर्शाती है। यह पंजाब की कृषि स्थिरता और जल सुरक्षा के लिए गंभीर खतरे का संकेत है। इसका मुख्य कारण धान की अत्यधिक जल-आधारित खेती है, जिससे व्यवहारिक विकल्पों और टिकाऊ समाधान हेतु सभी भागीदारों के सामूहिक प्रयास की आवश्यकता सामने आई है।<br /><br />प्रो. डॉ. सुखपाल सिंह ने आने वाले जल संकट को रोकने हेतु वैज्ञानिक हस्तक्षेप की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने बताया कि यद्यपि सभी संस्थाएं अपने-अपने क्षेत्र में अच्छा कार्य कर रही हैं, फिर भी एक साझा मंच की आवश्यकता है। इसी उद्देश्य से आयोग एक डाटा सेंटर स्थापित कर रहा है, जहाँ सभी अनुसंधान संस्थाओं से प्राप्त आंकड़ों को एकत्रित और प्रोसेस कर सरकार एवं शोधार्थियों को उपलब्ध कराया जाएगा ताकि पंजाब की भावी जल नीति बन सके।<br /><br />डॉ. गुरकंवल सिंह ने शोधकर्ताओं, नीति निर्माताओं और किसानों के बीच अंतर्विषयी सहयोग पर बल दिया और शोधकर्ताओं से समस्याओं के व्यावहारिक समाधान सुझाने का आग्रह किया।<br />डॉ. आर.एस. बैंस ने आश्वासन दिया कि पीएसएफसी भविष्य में भी इस तरह के और अध्ययन एवं नीतिगत समर्थन की सुविधा देगा।<br /><br />यह बैठक पंजाब में सतत जल प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम रही, जो दीर्घकालिक कृषि एवं पर्यावरणीय लचीलापन के लिए साक्ष्य-आधारित समाधानों की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। इन शोध निष्कर्षों के आधार पर एक ठोस भविष्य रणनीति तैयार करने की आवश्यकता है, जिससे चिरस्थायी कृषि मॉडल विकसित किया जा सके।</div>
<div>-----------</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Punjab</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 14 Jun 2025 20:52:43 +0530</pubDate>
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