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                <title>Tech - Nirpakh Post</title>
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                <title>इमारतों के अंदर भटके तो रास्ता दिखाएगा AI: जीपीएस के 3 नए और सटीक विकल्प</title>
                                    <description><![CDATA[बड़े भवनों में रास्ता दिखाने के लिए जीपीएस के 3 नए एआई आधारित विजुअल सिस्टम और तकनीकें तैयार की जा रही हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nirpakhpost.in/national/%E0%A4%87%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%85%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A4%B0-%E0%A4%AD%E0%A4%9F%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%A4%E0%A5%8B-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE-%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%96%E0%A4%BE%E0%A4%8F%E0%A4%97%E0%A4%BE-ai-%E0%A4%9C%E0%A5%80%E0%A4%AA%E0%A5%80%E0%A4%8F%E0%A4%B8-%E0%A4%95%E0%A5%87/article-5256"><img src="https://www.nirpakhpost.in/media/400/2026-03/how-ai-in-gps-tracking-systems-improves-fleet-efficiency.webp" alt=""></a><br /><h5 style="text-align:justify;"><span style="font-family:arial, helvetica, sans-serif;"><strong>इमारतों के अंदर भटके तो रास्ता दिखाएगा AI: जीपीएस के 3 नए और सटीक विकल्प</strong></span></h5>
<p style="text-align:justify;"><span style="font-family:arial, helvetica, sans-serif;">जब भी हमें किसी अनजान जगह जाना होता है, तो सबसे पहला ख्याल स्मार्टफोन में मौजूद ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (GPS) का आता है। खुली सड़कों और हाईवे पर जीपीएस एक बेहतरीन साथी है, लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि जैसे ही आप किसी विशाल शॉपिंग मॉल, बड़े अस्पताल, अंडरग्राउंड मेट्रो स्टेशन या अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के अंदर कदम रखते हैं, आपके फोन का वह 'नीला डॉट' (Blue Dot) काम करना बंद कर देता है या गलत दिशा दिखाने लगता है?</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span style="font-family:arial, helvetica, sans-serif;"><img src="https://www.nirpakhpost.in/media/2026-03/how-ai-in-gps-tracking-systems-improves-fleet-efficiency.webp" alt="How-AI-in-GPS-tracking-systems-improves-fleet-efficiency" width="1200" height="675"></img></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span style="font-family:arial, helvetica, sans-serif;">जीपीएस की यह सबसे बड़ी कमजोरी है कि इसके सैटेलाइट सिग्नल कंक्रीट की मोटी दीवारों, स्टील के स्ट्रक्चर और छतों को पार नहीं कर पाते। इसी खामी को दूर करने के लिए अब तकनीकी दुनिया में एक नई रेस शुरू हो गई है—जीपीएस का एक ऐसा विकल्प खोजने की रेस जो बंद इमारतों (Indoor Navigation) में भी सेंटीमीटर तक की सटीकता से आपकी लोकेशन बता सके। इस दिशा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर आधारित 'विजुअल सिस्टम' और 3 अन्य नई तकनीकों पर सबसे ज्यादा जोर दिया जा रहा है।</span></p>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="font-family:arial, helvetica, sans-serif;"><strong>एआई बेस्ड विजुअल सिस्टम (AI-Based Visual System) क्या है?</strong></span></h5>
<p style="text-align:justify;"><span style="font-family:arial, helvetica, sans-serif;">एआई विजुअल सिस्टम या विजुअल पोजिशनिंग सिस्टम (VPS) स्मार्टफोन के कैमरे और एआई एल्गोरिदम का इस्तेमाल करता है। जब आप किसी मॉल के अंदर होते हैं, तो आपको बस अपने फोन का कैमरा खोलकर आस-पास की चीजों को स्कैन करना होता है। एआई तुरंत उस इमारत के पहले से मौजूद 3D मैप के डेटाबेस से आपके कैमरे के दृश्य का मिलान करता है और स्क्रीन पर ऑगमेंटेड रियलिटी (AR) के जरिए तीर (Arrows) बनाकर आपको सही रास्ता दिखाता है। यह सिस्टम यह भी पहचान लेता है कि आप किस फ्लोर पर हैं और किस दुकान के सामने खड़े हैं।</span></p>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="font-family:arial, helvetica, sans-serif;"><strong>जीपीएस को रिप्लेस करने वाली 3 नई प्रमुख तकनीकें :</strong></span></h5>
<p style="text-align:justify;"><span style="font-family:arial, helvetica, sans-serif;">एआई विजुअल सिस्टम के अलावा, टेक कंपनियां और शोधकर्ता तीन मुख्य तकनीकों को इनडोर नेविगेशन का भविष्य मान रहे हैं:</span></p>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="font-family:arial, helvetica, sans-serif;"><strong>1. अल्ट्रा-वाइडबैंड (Ultra-Wideband - UWB) और ब्लूटूथ बीकन</strong> </span></h5>
<p style="text-align:justify;"><span style="font-family:arial, helvetica, sans-serif;">जीपीएस के सैटेलाइट की जगह अब इमारतों के अंदर छोटे-छोटे ट्रांसमीटर (जिन्हें बीकन कहा जाता है) लगाए जा रहे हैं। ब्लूटूथ लो एनर्जी (BLE) बीकन आपके फोन को सिग्नल भेजकर आपकी अनुमानित लोकेशन बताते हैं। वहीं, अल्ट्रा-वाइडबैंड (UWB) तकनीक इससे भी एक कदम आगे है। रेडियो फ्रीक्वेंसी का इस्तेमाल करने वाली यह तकनीक इतनी सटीक है कि यह इमारतों के अंदर आपकी लोकेशन को कुछ सेंटीमीटर की सटीकता के साथ ट्रैक कर सकती है। एप्पल (Apple) और सैमसंग (Samsung) जैसे ब्रांड्स पहले से ही अपने फ्लैगशिप स्मार्टफोन्स में UWB चिप्स दे रहे हैं।</span></p>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="font-family:arial, helvetica, sans-serif;"><strong>2. जियोमैग्नेटिक पोजिशनिंग (Geomagnetic Positioning)</strong> </span></h5>
<p style="text-align:justify;"><span style="font-family:arial, helvetica, sans-serif;">यह एक बेहद ही रोचक और बिना किसी अतिरिक्त हार्डवेयर के काम करने वाली तकनीक है। हर बड़ी इमारत में लोहे और स्टील का एक विशाल ढांचा होता है, जो पृथ्वी के प्राकृतिक चुंबकीय क्षेत्र (Magnetic Field) को प्रभावित करता है। इससे इमारत के अंदर हर जगह का एक अनोखा 'मैग्नेटिक फिंगरप्रिंट' बन जाता है। आधुनिक स्मार्टफोन में मौजूद कंपास (Compass) और सेंसर इस मैग्नेटिक पैटर्न को एआई की मदद से पढ़ते हैं और बिना किसी वाई-फाई या बाहरी सिग्नल के आपकी लोकेशन का सटीक पता लगा लेते हैं।</span></p>
<h5><span style="font-family:arial, helvetica, sans-serif;"><strong>3. वाई-फाई राउंड ट्रिप टाइम (Wi-Fi RTT) :</strong></span></h5>
<p style="text-align:justify;"><span style="font-family:arial, helvetica, sans-serif;">ज्यादातर बड़े भवनों में वाई-फाई राउटर लगे होते हैं। पुरानी तकनीक में राउटर के सिग्नल की ताकत से लोकेशन का अंदाजा लगाया जाता था, जो सटीक नहीं था। लेकिन नई वाई-फाई RTT तकनीक यह मापती है कि आपके फोन से सिग्नल को राउटर तक जाने और वापस आने में कितना मिलीसेकंड का समय लगा। तीन या अधिक राउटर्स से इस डेटा को एआई की मदद से प्रोसेस करके, यह तकनीक एक मीटर की सटीकता के साथ आपको मॉल या एयरपोर्ट के अंदर नेविगेट कर सकती है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span style="font-family:arial, helvetica, sans-serif;"><img src="https://www.nirpakhpost.in/media/2026-03/benefits-of-ai-1024x538.png" alt="Benefits-of-AI-1024x538" width="1024" height="538"></img></span></p>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="font-family:arial, helvetica, sans-serif;"><strong>इनडोर नेविगेशन के फायदे और भविष्य :</strong></span></h5>
<p style="text-align:justify;"><span style="font-family:arial, helvetica, sans-serif;">इन तकनीकों के आने से हमारी रोजमर्रा की जिंदगी में बड़े बदलाव होंगे। सोचिए, एक विशाल अस्पताल में आपको ओपीडी या किसी खास डॉक्टर का कमरा ढूंढ़ने के लिए किसी से पूछना नहीं पड़ेगा। आपका फोन सीधे आपको वहीं ले जाएगा। आग लगने या भूकंप जैसी आपात स्थिति में बचाव दल फंसे हुए लोगों की सटीक लोकेशन पता कर सकेंगे। इसके अलावा, दृष्टिबाधित (Visually impaired) लोगों के लिए ऑडियो कमांड के जरिए एआई विजुअल सिस्टम एक वरदान साबित होगा।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span style="font-family:arial, helvetica, sans-serif;">निष्कर्ष के तौर पर, जीपीएस बाहरी दुनिया का राजा बना रहेगा, लेकिन जब बात इमारतों के अंदर नेविगेशन की होगी, तो एआई और ये तीन नई तकनीकें मिलकर भविष्य का रास्ता तय करेंगी। दुनिया अब 'आउटडोर' से 'इनडोर' मैपिंग की एक नई क्रांति की दहलीज पर खड़ी है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Tech</category>
                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 15 Mar 2026 10:45:19 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>AI लैपटॉप की क्रांति: प्राइवेसी-फर्स्ट कंप्यूटिंग से क्या खत्म होगा सामान्य कंप्यूटरों का दौर?</title>
                                    <description><![CDATA[एडवांस NPU और ऑन-डिवाइस डेटा प्रोसेसिंग के साथ, एआई लैपटॉप बेजोड़ प्राइवेसी और स्पीड देकर सामान्य लैपटॉप की जगह ले रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nirpakhpost.in/tech/ai-%E0%A4%B2%E0%A5%88%E0%A4%AA%E0%A4%9F%E0%A5%89%E0%A4%AA-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A4%BF-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%87%E0%A4%B5%E0%A5%87%E0%A4%B8%E0%A5%80-%E0%A4%AB%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%9F-%E0%A4%95%E0%A4%82%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A5%82%E0%A4%9F%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%97-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%96%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%AE-%E0%A4%B9%E0%A5%8B%E0%A4%97%E0%A4%BE/article-5237"><img src="https://www.nirpakhpost.in/media/400/2026-03/ailaptopwithoutkeyboardmouse1-1754830131.jpg" alt=""></a><br /><h5 style="text-align:justify;"><span style="font-family:arial, helvetica, sans-serif;"><strong>AI लैपटॉप की क्रांति: प्राइवेसी-फर्स्ट कंप्यूटिंग का नया दौर शुरू</strong></span></h5>
<p style="text-align:justify;"><span style="font-family:arial, helvetica, sans-serif;">तकनीक की दुनिया में बदलाव की रफ्तार हमेशा से चौंकाने वाली रही है। जिस तरह से स्मार्टफोन ने फीचर फोन को इतिहास के पन्नों में समेट दिया, कुछ वैसा ही बदलाव अब पर्सनल कंप्यूटिंग के क्षेत्र में देखने को मिल रहा है। आज हर तरफ एक ही सवाल गूंज रहा है: "क्या अब सामान्य लैपटॉप पुराने पड़ जाएंगे?" इसका सीधा और स्पष्ट जवाब है—हां। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से लैस नए लैपटॉप, जिन्हें 'AI PC' या AI लैपटॉप कहा जा रहा है, न केवल हमारे काम करने के तरीके को बदल रहे हैं बल्कि 'प्राइवेसी-फर्स्ट कंप्यूटिंग' (Privacy-First Computing) के एक बिल्कुल नए और सुरक्षित दौर की शुरुआत भी कर रहे हैं।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span style="font-family:arial, helvetica, sans-serif;"><img src="https://www.nirpakhpost.in/media/2026-03/ailaptopwithoutkeyboardmouse1-1754830131.jpg" alt="ailaptopwithoutkeyboardmouse1-1754830131" width="600" height="338"></img></span></p>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="font-family:arial, helvetica, sans-serif;"><strong>AI लैपटॉप आखिर क्या हैं और ये कैसे अलग हैं?</strong> </span></h5>
<p style="text-align:justify;"><span style="font-family:arial, helvetica, sans-serif;">सामान्य लैपटॉप मुख्य रूप से दो प्रोसेसर पर निर्भर करते हैं: CPU (सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट) जो सामान्य टास्क संभालता है, और GPU (ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट) जो ग्राफिक्स और विजुअल का काम देखता है। लेकिन AI लैपटॉप में एक तीसरी और बेहद अहम चिप होती है जिसे NPU (न्यूरल प्रोसेसिंग यूनिट) कहा जाता है। यह NPU विशेष रूप से मशीन लर्निंग और AI से जुड़े भारी-भरकम कार्यों को बहुत तेजी से और कम बैटरी खर्च किए बिना पूरा करने के लिए डिजाइन की गई है। चाहे वीडियो कॉल में रियल-टाइम बैकग्राउंड ब्लर करना हो, बिना इंटरनेट के भाषा का अनुवाद करना हो, या फिर जटिल डेटा का विश्लेषण करना हो, NPU इन सबको सेकंडों में निपटा देता है।</span></p>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="font-family:arial, helvetica, sans-serif;"><strong>प्राइवेसी-फर्स्ट कंप्यूटिंग: क्लाउड सर्वर्स से पूरी आजादी</strong> </span></h5>
<p style="text-align:justify;"><span style="font-family:arial, helvetica, sans-serif;">अब तक हम AI का इस्तेमाल करने के लिए मुख्य रूप से क्लाउड सर्वर्स पर निर्भर थे। उदाहरण के लिए, जब आप किसी साधारण AI टूल को कोई कमांड देते हैं या कोई फोटो एडिट करने के लिए अपलोड करते हैं, तो आपका व्यक्तिगत डेटा इंटरनेट के जरिए दूर स्थित किसी सर्वर तक जाता है, वहां प्रोसेस होता है, और फिर आपको आउटपुट मिलता है। इस पूरी प्रक्रिया में डेटा लीक होने, हैक होने और निजता (Privacy) भंग होने का एक बड़ा खतरा हमेशा बना रहता है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span style="font-family:arial, helvetica, sans-serif;">लेकिन AI लैपटॉप ने इस पूरी प्रक्रिया को पलट कर रख दिया है। 'ऑन-डिवाइस AI' (On-device AI) तकनीक की मदद से अब आपका डेटा आपके लैपटॉप के अंदर ही प्रोसेस होता है। इसका सीधा मतलब यह है कि आपकी संवेदनशील जानकारी, पर्सनल चैट्स, या किसी कंपनी का सीक्रेट डेटा कभी भी आपके डिवाइस से बाहर नहीं जाता। यही 'प्राइवेसी-फर्स्ट कंप्यूटिंग' है, जहां उपयोगकर्ता का अपनी जानकारी पर 100% नियंत्रण होता है। बैंकिंग, स्वास्थ्य सेवाओं, वकीलों और कॉर्पोरेट सेक्टर के लिए यह तकनीक किसी वरदान से कम नहीं है, क्योंकि वे अब बिना किसी डेटा ब्रीच के डर के AI की शक्ति का उपयोग कर सकते हैं।</span></p>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="font-family:arial, helvetica, sans-serif;"><strong>बिना इंटरनेट के भी दमदार परफॉरमेंस</strong> </span></h5>
<p style="text-align:justify;"><span style="font-family:arial, helvetica, sans-serif;">एआई लैपटॉप की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके कई एडवांस फीचर्स बिना इंटरनेट कनेक्शन के भी काम करते हैं। चूँकि AI मॉडल सीधे आपके लैपटॉप के हार्डवेयर पर रन करते हैं, इसलिए आपको हर छोटे काम के लिए वाई-फाई ढूंढने की जरूरत नहीं पड़ती। इसके अलावा, क्लाउड पर डेटा न भेजने से न केवल समय बचता है, बल्कि लेटेंसी (देरी) भी बिल्कुल खत्म हो जाती है, जिससे काम तुरंत और तेजी से होता है।</span></p>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="font-family:arial, helvetica, sans-serif;"><strong>बैटरी लाइफ में ऐतिहासिक सुधार</strong> </span></h5>
<p style="text-align:justify;"><span style="font-family:arial, helvetica, sans-serif;">सामान्य लैपटॉप में जब भी कोई भारी काम किया जाता है, तो बैटरी बहुत तेजी से खत्म होती है और सिस्टम गर्म होने लगता है। एआई लैपटॉप का NPU इस समस्या को जड़ से खत्म कर देता है। AI से जुड़े सारे भारी काम NPU खुद संभाल लेता है, जिससे मुख्य प्रोसेसर (CPU) पर लोड काफी कम पड़ता है। इसका सीधा और सकारात्मक असर बैटरी बैकअप पर दिखता है। हाल ही में लॉन्च हुए नए एआई लैपटॉप (जैसे स्नैपड्रैगन या नए इंटेल/एप्पल चिपसेट वाले डिवाइस) सिंगल चार्ज में 18 से 20 घंटे तक का बैटरी बैकअप देने में सक्षम हैं।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span style="font-family:arial, helvetica, sans-serif;"><img src="https://www.nirpakhpost.in/media/2026-03/ai-laptop-neural-engine-machine-learning.webp" alt="ai-laptop-neural-engine-machine-learning" width="1024" height="682"></img></span></p>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="font-family:arial, helvetica, sans-serif;"><strong>क्या सच में खत्म हो जाएगा सामान्य लैपटॉप का वजूद?</strong> </span></h5>
<p style="text-align:justify;"><span style="font-family:arial, helvetica, sans-serif;">जिस तरह से माइक्रोसॉफ्ट, एप्पल, इंटेल और एएमडी जैसी बड़ी टेक कंपनियां अपना पूरा ध्यान AI चिप्स पर केंद्रित कर रही हैं, उससे यह साफ है कि आने वाले कुछ ही सालों में हर लैपटॉप में NPU का होना एक अनिवार्य मानक (Standard) बन जाएगा। शुरुआत में AI लैपटॉप महंगे लग सकते हैं, लेकिन जैसे-जैसे इनका बड़े पैमाने पर उत्पादन बढ़ेगा, इनकी कीमतें आम लोगों के बजट में आ जाएंगी।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span style="font-family:arial, helvetica, sans-serif;">सामान्य लैपटॉप रातों-रात बाजार से गायब नहीं होंगे, लेकिन उनकी प्रासंगिकता धीरे-धीरे खत्म हो जाएगी। ठीक वैसे ही जैसे आज हम बिना वाई-फाई या वेबकैम वाले लैपटॉप की कल्पना नहीं कर सकते, वैसे ही भविष्य में बिना AI क्षमता और ऑन-डिवाइस प्राइवेसी वाले लैपटॉप को कोई खरीदना पसंद नहीं करेगा।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span style="font-family:arial, helvetica, sans-serif;">निष्कर्ष के तौर पर यह कहना बिल्कुल भी गलत नहीं होगा कि कंप्यूटिंग का भविष्य एआई और प्राइवेसी के इर्द-गिर्द ही बुना जा रहा है। एआई लैपटॉप सिर्फ एक हार्डवेयर अपग्रेड नहीं हैं, बल्कि यह हमारे डिजिटल जीवन को अधिक सुरक्षित और स्मार्ट बनाने की दिशा में उठाया गया सबसे बड़ा कदम है। सामान्य लैपटॉप का युग अब अपने अंतिम पड़ाव पर है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Tech</category>
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                <pubDate>Sat, 14 Mar 2026 16:54:20 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>इस देश में बैन हो गया YouTube! टीनएजर्स के लिए सोशल मीडिया पर पूरी तरह लगी रोक</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">ऑस्ट्रेलिया ने 16 साल से कम उम्र के युवाओं के लिए सोशल मीडिया बैन को और कड़ा करते हुए अब YouTube को भी इसके दायरे में ला दिया है. पहले सरकार ने इस प्लेटफॉर्म को छूट दी थी लेकिन अब उसे भी शामिल कर लिया गया है. सरकार के इस यू-टर्न से Google की पैरेंट कंपनी Alphabet के साथ कानूनी टकराव की आशंका बढ़ गई है.</p>
<p style="text-align:justify;">ऑस्ट्रेलियाई इंटरनेट रेगुलेटर द्वारा हाल ही में की गई एक रिपोर्ट में सामने आया कि 37% नाबालिगों को YouTube पर नुकसानदेह कंटेंट का सामना करना पड़ा. यह आंकड़ा अन्य किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nirpakhpost.in/tech/%E0%A4%87%E0%A4%B8-%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B6-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%AC%E0%A5%88%E0%A4%A8-%E0%A4%B9%E0%A5%8B-%E0%A4%97%E0%A4%AF%E0%A4%BE-youtube-%E0%A4%9F%E0%A5%80%E0%A4%A8%E0%A4%8F%E0%A4%9C%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B8-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%8F/article-2821"><img src="https://www.nirpakhpost.in/media/400/2025-07/download-(34)1.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">ऑस्ट्रेलिया ने 16 साल से कम उम्र के युवाओं के लिए सोशल मीडिया बैन को और कड़ा करते हुए अब YouTube को भी इसके दायरे में ला दिया है. पहले सरकार ने इस प्लेटफॉर्म को छूट दी थी लेकिन अब उसे भी शामिल कर लिया गया है. सरकार के इस यू-टर्न से Google की पैरेंट कंपनी Alphabet के साथ कानूनी टकराव की आशंका बढ़ गई है.</p>
<p style="text-align:justify;">ऑस्ट्रेलियाई इंटरनेट रेगुलेटर द्वारा हाल ही में की गई एक रिपोर्ट में सामने आया कि 37% नाबालिगों को YouTube पर नुकसानदेह कंटेंट का सामना करना पड़ा. यह आंकड़ा अन्य किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से ज्यादा है. इसी आधार पर सरकार को YouTube को भी बैन में शामिल करने की सिफारिश की गई थी.</p>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज़ ने बयान जारी करते हुए कहा, "अब समय आ गया है कि हम इस पर रोक लगाएं. ऑस्ट्रेलियाई बच्चों पर सोशल मीडिया का नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है और हमें उनके हित में सख्त कदम उठाना होगा." उन्होंने माता-पिता को भरोसा दिलाया कि सरकार उनके साथ खड़ी है.</p>
<p style="text-align:justify;">YouTube की ओर से प्रतिक्रिया में कहा गया कि उनका प्लेटफॉर्म मुख्यतः वीडियो साझा करने के लिए है और इसे सोशल मीडिया की श्रेणी में नहीं रखा जाना चाहिए. कंपनी के प्रवक्ता ने कहा, "YouTube एक वीडियो लाइब्रेरी है जिसे लोग टीवी पर भी देखते हैं. यह सोशल मीडिया नहीं है.".</p>
<p style="text-align:justify;">जब सरकार ने पिछले साल YouTube को शिक्षकों में इसकी लोकप्रियता के कारण छूट दी थी तब Meta, Snapchat और TikTok जैसे अन्य प्लेटफॉर्म्स ने इसका विरोध किया था. उनका कहना था कि YouTube में भी इंटरैक्टिव फीचर्स और एल्गोरिदम आधारित कंटेंट सजेशन जैसे कई सोशल मीडिया तत्व मौजूद हैं.</p>
<p style="text-align:justify;">बैन लागू होने के बाद किशोर खुद YouTube अकाउंट नहीं चला सकेंगे हालांकि शिक्षक या माता-पिता उनके लिए वीडियो दिखा सकेंगे. ऑस्ट्रेलियन प्राइमरी प्रिंसिपल्स एसोसिएशन की प्रमुख एंजेला फाल्केनबर्ग ने कहा कि शिक्षक हमेशा उपयुक्त कंटेंट का चयन करेंगे.</p>
<p style="text-align:justify;">पहले भी Alphabet ऑस्ट्रेलिया में कानून को लेकर टकरा चुका है, जब उसे न्यूज कंटेंट के बदले मीडिया को भुगतान करने की बाध्यता दी गई थी. अब YouTube एक बार फिर कानूनी लड़ाई की तैयारी में दिख रहा है. हालांकि YouTube ने कोर्ट केस की पुष्टि नहीं की है.</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.nirpakhpost.in/media/2025-07/download-(34)1.jpeg" alt="download (34)" width="1200" height="800"></img></p>
<p style="text-align:justify;">Read Also : <a class="post-title-lg" href="https://www.nirpakhpost.in/national/cm-%E0%A4%AF%E0%A5%81%E0%A4%B5%E0%A4%BE-%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%9C%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%AF%E0%A5%82%E0%A4%AA%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%AF%E0%A5%81%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%93%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A5%80-%E0%A4%A8%E0%A4%88/article-2820">CM युवा योजना से यूपी के युवाओं को मिली नई उड़ान</a></p>
<p style="text-align:justify;">नवंबर में पास हुए इस कानून के मुताबिक, सोशल मीडिया कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि 16 साल से कम उम्र के बच्चे उनके प्लेटफॉर्म से दूर रहें. यदि वे ऐसा नहीं कर पाते हैं तो उन पर 49.5 मिलियन ऑस्ट्रेलियन डॉलर तक का जुर्माना लगाया जा सकता है.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Tech</category>
                                            <category>World</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 30 Jul 2025 18:40:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nirpakh News]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>Google Maps ने दिया धोखा! पब्लिक ट्रांजिट रूट दिखाते ही क्रैश हो रहा ऐप</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">अगर आप बस, मेट्रो या ट्रेन का रास्ता ढूंढने के लिए Google Maps खोलते ही ऐप बंद हो जा रहा है तो आप अकेले नहीं हैं. बीते कुछ घंटों में Reddit, Google सपोर्ट फोरम और कई तकनीकी वेबसाइट्स पर यूजर्स ने शिकायत की है कि ट्रांजिट रूट सर्च करते ही Google Maps क्रैश हो रहा है.</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>क्या है समस्या?</strong><br />शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह बग केवल तब एक्टिव होता है जब यूजर पब्लिक ट्रांसपोर्ट का रूट चेक करता है. ड्राइविंग, वॉकिंग और साइक्लिंग रूट बिना किसी परेशानी के काम कर रहे हैं. लेकिन जैसे ही कोई ट्रांजिट मोड सिलेक्ट करता</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nirpakhpost.in/tech/google-maps-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%A7%E0%A5%8B%E0%A4%96%E0%A4%BE-%E0%A4%AA%E0%A4%AC%E0%A5%8D%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%95-%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%9C%E0%A4%BF%E0%A4%9F-%E0%A4%B0%E0%A5%82%E0%A4%9F-%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%96%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A5%87-%E0%A4%B9%E0%A5%80/article-2806"><img src="https://www.nirpakhpost.in/media/400/2025-07/download-(29).jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">अगर आप बस, मेट्रो या ट्रेन का रास्ता ढूंढने के लिए Google Maps खोलते ही ऐप बंद हो जा रहा है तो आप अकेले नहीं हैं. बीते कुछ घंटों में Reddit, Google सपोर्ट फोरम और कई तकनीकी वेबसाइट्स पर यूजर्स ने शिकायत की है कि ट्रांजिट रूट सर्च करते ही Google Maps क्रैश हो रहा है.</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>क्या है समस्या?</strong><br />शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह बग केवल तब एक्टिव होता है जब यूजर पब्लिक ट्रांसपोर्ट का रूट चेक करता है. ड्राइविंग, वॉकिंग और साइक्लिंग रूट बिना किसी परेशानी के काम कर रहे हैं. लेकिन जैसे ही कोई ट्रांजिट मोड सिलेक्ट करता है, ऐप अचानक बंद होकर होम स्क्रीन पर लौट आता है. Android Police ने ऐप के वर्जन 25.30.00.78516346 पर इस बग को दोहराकर देखा और पाया कि संभवतः हालिया अपडेट ही इसका कारण है.</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>सबको नहीं हो रही परेशानी</strong><br />दिलचस्प बात ये है कि सभी यूजर्स को यह समस्या नहीं हो रही. कुछ लोग उसी वर्जन पर बिना किसी दिक्कत के ऐप का इस्तेमाल कर पा रहे हैं, जबकि Pixel, Samsung और Redmagic जैसे फोनों में लगातार क्रैश की रिपोर्टें आ रही हैं. Downdetector वेबसाइट पर Google Maps से जुड़ी शिकायतों में हल्की बढ़ोतरी देखी गई है, लेकिन अभी तक यह कोई बड़ा आउटेज नहीं बना है.</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>iPhone और CarPlay यूजर्स भी झेल रहे दिक्कतें</strong><br />यह परेशानी सिर्फ Android तक सीमित नहीं है. iPhone यूजर्स ने भी Apple CarPlay पर मैप्स में गलत दिशा-निर्देश मिलने की शिकायत की है. हालांकि ये स्पष्ट नहीं है कि iOS में आ रही समस्याएं Google Maps की इस बग से जुड़ी हैं या नहीं, लेकिन समय का मेल इसे शक के घेरे में जरूर लाता है.</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.nirpakhpost.in/media/2025-07/download-(29).jpeg" alt="download (29)" width="1200" height="800"></img></p>
<p style="text-align:justify;"><strong>अभी तक Google की तरफ से कोई जवाब नहीं</strong><br />अब तक Google की ओर से इस बग को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है. Maps के स्टेटस पेज पर भी इस गड़बड़ी का कोई ज़िक्र नहीं है जिससे यूजर्स और ज्यादा परेशान हैं क्योंकि कई लोग रोज़मर्रा की यात्रा के लिए इस ऐप पर निर्भर रहते हैं.</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>तब तक क्या करें?</strong><br />इस बीच कुछ Android यूजर्स ने बताया है कि ऐप को Incognito Mode में चलाने से क्रैश नहीं होता. इसके लिए Google Maps में अपनी प्रोफाइल आइकन पर टैप करें और “Incognito Mode चालू करें” का विकल्प चुनें. हालांकि इस मोड में आपकी लोकेशन हिस्ट्री सेव नहीं होगी, लेकिन कम से कम ऐप बंद नहीं होगा.</p>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा, आप वैकल्पिक ऐप्स जैसे Citymapper, Moovit या Apple Maps का इस्तेमाल कर सकते हैं. अफसोस की बात यह है कि Google Maps का पुराना वर्जन इंस्टॉल करने पर भी हर डिवाइस पर समाधान नहीं मिल रहा.</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>मदद के लिए कहां संपर्क करें?</strong><br />अगर आप भी इस बग से परेशान हैं तो Google के सपोर्ट फोरम पर अपने अनुभव को शेयर कर सकते हैं. अपनी डिवाइस, लोकेशन और ऐप वर्जन की जानकारी भी दें. जितनी ज्यादा शिकायतें होंगी, उतनी जल्दी Google इस पर ध्यान देगा और कोई समाधान पेश करेगा.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Tech</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 29 Jul 2025 14:42:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nirpakh News]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>उल्लू, ऑल्ट बालाजी जैसे OTT प्लेटफॉर्म्स भारत में बैन</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">भारत सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए उल्लू, ALTT, देसीफ्लिक्स, बिग शॉट्स और अन्य स्ट्रीमिंग ऐप्स पर प्रतिबंध लगा दिया है. सरकार ने ये फैसला अश्लील और सेक्सुअल कॉन्टेंट के खिलाफ नीति के तहत लिया है. ये फैसला तब लिया गया जब इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) को इन ऐप्स के खिलाफ कई नागरिकों और संगठनों से शिकायतें प्राप्त हुईं.</p>
<p style="text-align:justify;">अश्लील कॉन्टेंट की शिकायतें सामने आने के बाद मामले की जांच शुरू की गई. इस दौरान पता चला कि कामुक वेब सीरीज़ के नाम पर अश्लील कॉन्टेंट की खुले तौर पर स्ट्रीमिंग की जा रही है. सरकार ने पाया</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nirpakhpost.in/breaking-news/%E0%A4%89%E0%A4%B2%E0%A5%8D%E0%A4%B2%E0%A5%82-%E0%A4%91%E0%A4%B2%E0%A5%8D%E0%A4%9F-%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A5%80-%E0%A4%9C%E0%A5%88%E0%A4%B8%E0%A5%87-ott-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B2%E0%A5%87%E0%A4%9F%E0%A4%AB%E0%A5%89%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A5%8D%E0%A4%B8-%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%AC%E0%A5%88%E0%A4%A8/article-2748"><img src="https://www.nirpakhpost.in/media/400/2025-07/gwr1qrfxwaaij-o.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">भारत सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए उल्लू, ALTT, देसीफ्लिक्स, बिग शॉट्स और अन्य स्ट्रीमिंग ऐप्स पर प्रतिबंध लगा दिया है. सरकार ने ये फैसला अश्लील और सेक्सुअल कॉन्टेंट के खिलाफ नीति के तहत लिया है. ये फैसला तब लिया गया जब इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) को इन ऐप्स के खिलाफ कई नागरिकों और संगठनों से शिकायतें प्राप्त हुईं.</p>
<p style="text-align:justify;">अश्लील कॉन्टेंट की शिकायतें सामने आने के बाद मामले की जांच शुरू की गई. इस दौरान पता चला कि कामुक वेब सीरीज़ के नाम पर अश्लील कॉन्टेंट की खुले तौर पर स्ट्रीमिंग की जा रही है. सरकार ने पाया कि 18 प्लस वाले OTT चैनल कॉन्टेंट आईटी नियमों 2021 और भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 292/293 का उल्लंघन कर रहे थे.</p>
<p style="text-align:justify;">भारत के अश्लीलता कानून क्या कहते हैं?<br />भारतीय कानून के तहत अश्लील कॉन्टेंट को इस रूप में परिभाषित किया गया है जो सार्वजनिक नैतिकता को ठेस पहुंचाता है, खासकर तब जब वह नाबालिगों के लिए सुलभ हो. आईटी अधिनियम, धारा 67 और 67A के तहत इलेक्ट्रॉनिक रूप में अश्लील या यौन रूप से कॉन्टेंट के पब्लिकेशन और ट्रांसमिशन पर प्रतिबंध लगाया जाता है. इसके अलावा IPC की धारा 292 और 293 के तहत अश्लील चीजों और कॉन्टेंट के वितरण और प्रदर्शन पर दंडात्मक प्रावधान का नियम है. वहीं  बच्चों के यौन शोषण से संबंधित सभी डिजिटल और फिजिकल कॉन्टेंट पर POCSO Act के तहत भी सजा का प्रावधान है.</p>
<p style="text-align:justify;">स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स पर रेगुलेशन की कमी<br />हालांकि OTT प्लेटफ़ॉर्म्स को सेल्फ रेगुलेशन का अधिकार दिया गया था, लेकिन कई प्लेटफ़ॉर्म्स ने इस सुविधा का गलत इस्तेमाल किया और रेगुलेशन की सीमा को तोड़ा. इसके परिणामस्वरूप सरकार को सीधे तौर पर दखल देना पड़ा.</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.nirpakhpost.in/media/2025-07/gwr1qrfxwaaij-o.jpeg" alt="Gwr1QRfXwAAij-o" width="1200" height="800"></img></p>
<p style="text-align:justify;">कौन-कौन से ऐप्स हुए प्रभावित?<br />भारत सरकार के फैसले के बाद निम्नलिखित ऐप्स पर सरकार ने प्रतिबंध लगा दिया है, जो इस प्रकार है.<br />Ullu</p>
<p style="text-align:justify;">ALTT (पूर्व में ALTBalaji)</p>
<p style="text-align:justify;">BigShots</p>
<p style="text-align:justify;">Desiflix</p>
<p style="text-align:justify;">HotHit</p>
<p style="text-align:justify;">PrimePlay</p>
<p style="text-align:justify;">अन्य क्षेत्रीय स्ट्रीमिंग प्लेटफ़ॉर्म्स जिनकी कंटेंट मॉडरेशन नीति संदिग्ध पाई गई.</p>
<p style="text-align:justify;">MIB ने अश्लीलता फैलाने वाले 25 ऐप्स पर बैन<br />MIB ने अश्लीलता फैलाने वाले 25 ऐप्स पर प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया है. इन ऐप्स में ALTT, ULLU, बिग शॉट्स ऐप, देसिफ्लिक्स, बूमेक्स, नवरसा लाइट, गुलाब ऐप, कंगन ऐप, बुल ऐप, जलवा ऐप, वॉव एंटरटेनमेंट, लुक एंटरटेनमेंट, हिट प्राइम, फेनेओ, शोएक्स, सोल टॉकीज, अड्डा टीवी, हॉटएक्स वीआईपी, हलचल ऐप, मूडएक्स, नियोनएक्स वीआईपी, शोहिट, फुगी, मोजफ्लिक्स, ट्राइफ्लिक्स शामिल हैं। ये सभी आईटी अधिनियम और संबंधित कानूनों का उल्लंघन करते हैं.</p>
<p style="text-align:justify;">अवैध जुआ वेबसाइटों और मोबाइल ऐप्स पर प्रतिबंध<br />सरकार ने  बुधवार (23  जुलाई 2025)  को संसद में जानकारी दी कि  2022 से जून 2025 के बीच 1,524 अवैध जुआ वेबसाइटों और मोबाइल ऐप्स पर प्रतिबंध लगाने के आदेश जारी किए हैं. इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में लोकसभा को बताया कि 2022 से जून 2025 तक, सरकार ने ऑनलाइन सट्टेबाजी, जुआ और गेमिंग वेबसाइटों और मोबाइल ऐप्स से संबंधित 1,524 ब्लॉकिंग निर्देश जारी किए हैं. यह कदम उन विदेशी ऑनलाइन जुआ प्लेटफार्मों पर बढ़ती चिंता के बीच उठाया गया है, जो भारतीय कर नियमों या स्थानीय नियमों का पालन किए बिना काम करते हैं.</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Breaking News</category>
                                            <category>Tech</category>
                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 25 Jul 2025 17:19:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nirpakh News]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Tesla की मनपसंद कलर की कार खरीदनी पड़ेगी महंगी</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">एलन मस्क की इलेक्ट्रिक कार कंपनी Tesla ने आखिरकार भारत में अपनी मौजूदगी दर्ज करा दी है. कंपनी ने मुंबई में अपना पहला ऑफिशियल शोरूम खोल लिया है. फिलहाल, Tesla ने भारत में अपनी Model Y इलेक्ट्रिक कार लॉन्च की है.</p>
<p style="text-align:justify;">ये एक 4-डोर क्रॉसओवर SUV है, जो दो वेरिएंट में मिलेगी. इसकी एक्स-शोरूम कीमत 59.89 लाख रुपये से शुरू होकर 67.89 लाख रुपये तक जाती है. Model Y को कंपनी ने कई कलर ऑप्शन में पेश किया है. खास बात यह है कि हर कलर या पेंट स्कीम के हिसाब से कार की कीमत भी अलग-अलग है.</p>
<p style="text-align:justify;">Tesla Model</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nirpakhpost.in/tech/tesla-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A4%A8%E0%A4%AA%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%A6-%E0%A4%95%E0%A4%B2%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%96%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%A6%E0%A4%A8%E0%A5%80-%E0%A4%AA%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A5%87%E0%A4%97%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%80/article-2674"><img src="https://www.nirpakhpost.in/media/400/2025-07/download-(10).jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">एलन मस्क की इलेक्ट्रिक कार कंपनी Tesla ने आखिरकार भारत में अपनी मौजूदगी दर्ज करा दी है. कंपनी ने मुंबई में अपना पहला ऑफिशियल शोरूम खोल लिया है. फिलहाल, Tesla ने भारत में अपनी Model Y इलेक्ट्रिक कार लॉन्च की है.</p>
<p style="text-align:justify;">ये एक 4-डोर क्रॉसओवर SUV है, जो दो वेरिएंट में मिलेगी. इसकी एक्स-शोरूम कीमत 59.89 लाख रुपये से शुरू होकर 67.89 लाख रुपये तक जाती है. Model Y को कंपनी ने कई कलर ऑप्शन में पेश किया है. खास बात यह है कि हर कलर या पेंट स्कीम के हिसाब से कार की कीमत भी अलग-अलग है.</p>
<p style="text-align:justify;">Tesla Model Y को भारत में छह अलग-अलग एक्सटीरियर पेंट कलर ऑप्शन में लॉन्च किया गया है. इन रंगों की कीमत भी अलग-अलग रखी गई है. स्टील्थ ग्रे को स्टैंडर्ड कलर माना गया है और इसके लिए किसी भी तरह का एक्स्ट्रा चार्ज नहीं लिया जाता है, लेकिन अगर ग्राहक पर्ल व्हाइट मल्टी-कोट या डायमंड ब्लैक जैसे रंग चुनते हैं, तो उन्हें 95,000 एक्स्ट्रा देना होगा.</p>
<p style="text-align:justify;">ग्लेशियर ब्लू कलर के लिए यह चार्ज बढ़कर 1.25 लाख हो जाता है. वहीं, क्विकसिल्वर और अल्ट्रा रेड जैसे प्रीमियम शेड्स के लिए ग्राहकों को 1.85 लाख तक एक्स्ट्रा भुगतान करना होगा. जहां तक इंटीरियर की बात है, Tesla ग्राहकों को दो विकल्प (ऑल ब्लैक और ब्लैक एंड व्हाइट थीम) देती है. इन इंटीरियर विकल्पों के लिए कंपनी कोई एक्स्ट्रा चार्ज नहीं लेती.</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.nirpakhpost.in/media/2025-07/download-(10).jpeg" alt="download (10)" width="1200" height="800"></img></p>
<p style="text-align:justify;">Read Also ; <a class="post-title-lg" href="https://www.nirpakhpost.in/breaking-news/3-babbar-khalsa-members-arrested-in-punjab/article-2673">पंजाब में बब्बर खालसा के 3 सदस्य गिरफ्तार:पटियाला-हरियाणा में पुलिस चौकियों पर फेंके थे ग्रेनेड</a><br />भारत में Tesla की कीमत ज्यादा क्यों?</p>
<p style="text-align:justify;">Tesla Model Y को भारत में CBU (Completely Built Unit) के रूप में इम्पोर्ट किया गया है. इसका मतलब है कि यह कार पूरी तरह से विदेश में तैयार होकर भारत लाई जाती है. भारत सरकार CBU कारों पर करीब 70% तक का इम्पोर्ट टैक्स लगाती है. इसी टैक्स के चलते अकेले एक कार पर ही 21 लाख या उससे ज्यादा का एक्स्ट्रा चार्ज आ जाता है.</p>
<p style="text-align:justify;">उदाहरण के तौर पर, अमेरिका में यही कार करीब $44,990 (लगभग 38 लाख) में मिलती है, लेकिन भारत में इसकी कीमत 60 लाख से ऊपर जाती है. इसके पीछे तीन प्रमुख वजहें -CBU टैक्स, शंघाई से ट्रांसपोर्ट खर्च और कस्टम/हैंडलिंग चार्ज हैं. यही कारण है कि भारत में Tesla Model Y की कीमतें ग्लोबल मार्केट की तुलना में काफी ऊंची हैं, हालांकि इसमें मिलने वाले फीचर्स और तकनीक ग्लोबल मॉडल जैसी ही हैं.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Tech</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 20 Jul 2025 17:41:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nirpakh News]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>करोड़ों मोबाइल यूज़र्स के लिए आई बुरी खबर, रिचार्ज प्लान्स को महंगा करने की तैयारी में हैं टेलीकॉम कंपनियां</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">  देशभर के करोड़ों मोबाइल यूज़र्स के लिए एक बुरी खबर सामने आ रही है. टेलीकॉम कंपनियां एक बार फिर अपने रिचार्ज प्लान्स को महंगा करने की तैयारी में हैं. इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, लगातार पांचवें महीने नेट यूज़र्स की संख्या में बढ़ोतरी के बाद कंपनियां टैरिफ बढ़ाने की योजना बना रही हैं. संभावना है कि साल के अंत तक मोबाइल रिचार्ज दरों में 10 से 12 प्रतिशत तक की वृद्धि हो सकती है.</p>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि इससे पहले जुलाई 2024 में टेलीकॉम कंपनियों ने बेसिक प्लान्स में 11 से 23 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की थी. एक्सपर्ट्स</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nirpakhpost.in/tech/%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%AE%E0%A5%8B%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%87%E0%A4%B2-%E0%A4%AF%E0%A5%82%E0%A4%9C%E0%A4%BC%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B8-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%8F-%E0%A4%86%E0%A4%88-%E0%A4%AC%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%96%E0%A4%AC%E0%A4%B0-%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%9A%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%9C-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%B8/article-2543"><img src="https://www.nirpakhpost.in/media/400/2025-07/images.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"> देशभर के करोड़ों मोबाइल यूज़र्स के लिए एक बुरी खबर सामने आ रही है. टेलीकॉम कंपनियां एक बार फिर अपने रिचार्ज प्लान्स को महंगा करने की तैयारी में हैं. इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, लगातार पांचवें महीने नेट यूज़र्स की संख्या में बढ़ोतरी के बाद कंपनियां टैरिफ बढ़ाने की योजना बना रही हैं. संभावना है कि साल के अंत तक मोबाइल रिचार्ज दरों में 10 से 12 प्रतिशत तक की वृद्धि हो सकती है.</p>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि इससे पहले जुलाई 2024 में टेलीकॉम कंपनियों ने बेसिक प्लान्स में 11 से 23 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की थी. एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस बार कंपनियां टियर बेस्ड प्लान्स ला सकती हैं, जिसमें डेटा लिमिट कम कर दी जाएगी ताकि यूज़र्स अतिरिक्त डेटा पैक खरीदने को मजबूर हों.</p>
<p style="text-align:justify;">मई 2025 में मोबाइल एक्टिव यूज़र्स की संख्या 29 महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई जो लगभग 1.08 अरब रही. इस दौरान रिलायंस जियो ने सबसे बड़ा फायदा उठाया और 5.5 मिलियन नए एक्टिव यूज़र्स जोड़कर अपनी बाजार हिस्सेदारी को 150 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 53% तक पहुंचा दिया. वहीं भारती एयरटेल ने 1.3 मिलियन नए एक्टिव यूज़र्स जोड़े.</p>
<p style="text-align:justify;">अब मोबाइल प्लान्स की कीमतों को 5G सेवाओं के हिसाब से समायोजित किया जाएगा. ब्रोकरेज फर्म जेफरीज के अनुसार, जियो और एयरटेल की तेज़ ग्रोथ, और वोडाफोन आइडिया के यूज़र लॉस के चलते कंपनियों के पास टैरिफ बढ़ाने का उचित माहौल बन चुका है. आने वाले टैरिफ बदलाव डेटा खपत, इंटरनेट स्पीड और उपयोग के समय के आधार पर तय किए जा सकते हैं. विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि कंपनियां प्रीमियम और मिड-टियर ग्राहकों को खास तौर पर टारगेट करेंगी ताकि आम यूज़र्स पर इसका सीधा असर कम हो.</p>
<p style="text-align:justify;">इसी बीच हैदराबाद की भारतीय कंपनी Ananth Technologies ने एक नया कीर्तिमान रचते हुए देश की पहली निजी कंपनी बनकर स्वदेशी सैटेलाइट्स के ज़रिए सैटेलाइट ब्रॉडबैंड सेवा शुरू करने की मंजूरी हासिल कर ली है. IN-SPACe की ओर से मिली मंजूरी के तहत यह कंपनी 4 टन वज़नी GEO कम्युनिकेशन सैटेलाइट लॉन्च करेगी जो 100 Gbps तक की स्पीड देने में सक्षम होगी.</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.nirpakhpost.in/media/2025-07/images.jpeg" alt="images" width="1200" height="800"></img></p>
<p style="text-align:justify;">Read Also : <a class="post-title-lg" href="https://www.nirpakhpost.in/entertainment/%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A5%88%E0%A4%B2%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%96%E0%A5%81%E0%A4%B6-%E0%A4%A8%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%82-%E0%A4%B9%E0%A5%88%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%B0%E0%A4%A8%E0%A5%8C%E0%A4%A4/article-2542">सरकारी सैलरी से खुश नहीं हैं कंगना रनौत.. ! '50 हजार से क्या होगा?</a></p>
<p style="text-align:justify;">कंपनी इस प्रोजेक्ट में करीब 3,000 करोड़ रुपये का शुरुआती निवेश करने जा रही है. इस क्षेत्र में एलन मस्क की Starlink अभी भी भारत में अनुमति हासिल करने की प्रक्रिया में है. यह बदलाव भारतीय डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को नई ऊंचाई पर ले जाने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकते हैं.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Tech</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 11 Jul 2025 17:28:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nirpakh News]]></dc:creator>
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                <title>WhatsApp ने पेश किया नया AI फीचर, मैसेज पढ़ना हुआ और आसान</title>
                                    <description><![CDATA[<p>अगर आप भी उन लोगों में से हैं जो कई बार जरूरी मैसेज पढ़ना भूल जाते हैं या ढेर सारे मैसेज देखकर उलझन में पड़ जाते हैं, तो अब आपके लिए खुशखबरी है. WhatsApp ने एक नया AI फीचर लॉन्च किया है जो खास आपके लिए ही है. इस फीचर का नाम है AI Summarize, और इसका काम है आपके सारे अनपढ़े (अनरीड) मैसेज का छोटा और आसान सारांश बनाना.</p>
<p><strong>अब हर जरूरी मैसेज मिलेगा एक नजर में</strong></p>
<p>WhatsApp का यह नया AI फीचर ग्रुप चैट्स और पर्सनल दोनों तरह के मैसेज के लिए काम करेगा. इसका मतलब ये कि</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nirpakhpost.in/tech/whatsapp-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%AA%E0%A5%87%E0%A4%B6-%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%A8%E0%A4%AF%E0%A4%BE-ai-%E0%A4%AB%E0%A5%80%E0%A4%9A%E0%A4%B0-%E0%A4%AE%E0%A5%88%E0%A4%B8%E0%A5%87%E0%A4%9C-%E0%A4%AA%E0%A4%A2%E0%A4%BC%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%B9%E0%A5%81%E0%A4%86/article-2451"><img src="https://www.nirpakhpost.in/media/400/2025-07/whatsapp-2105015_1280.webp" alt=""></a><br /><p>अगर आप भी उन लोगों में से हैं जो कई बार जरूरी मैसेज पढ़ना भूल जाते हैं या ढेर सारे मैसेज देखकर उलझन में पड़ जाते हैं, तो अब आपके लिए खुशखबरी है. WhatsApp ने एक नया AI फीचर लॉन्च किया है जो खास आपके लिए ही है. इस फीचर का नाम है AI Summarize, और इसका काम है आपके सारे अनपढ़े (अनरीड) मैसेज का छोटा और आसान सारांश बनाना.</p>
<p><strong>अब हर जरूरी मैसेज मिलेगा एक नजर में</strong></p>
<p>WhatsApp का यह नया AI फीचर ग्रुप चैट्स और पर्सनल दोनों तरह के मैसेज के लिए काम करेगा. इसका मतलब ये कि चाहे दोस्तों की ग्रुप चैट हो या ऑफिस के जरूरी मैसेज अब आप बिना हर एक मैसेज को खोले भी जान सकेंगे कि बात क्या चल रही है.</p>
<p>AI Summarize फीचर आपको उन सभी मैसेज की झलक देगा जो आपने अब तक नहीं पढ़े. इससे आपको कोई भी जरूरी जानकारी मिस नहीं करनी पड़ेगी और आप हर समय अपडेट रहेंगे.</p>
<p><strong>प्राइवेसी पर पूरा भरोसा</strong></p>
<p>WhatsApp हमेशा से अपनी प्राइवेसी पॉलिसी को लेकर गंभीर रहा है, और इस बार भी कंपनी ने साफ कर दिया है कि यूजर्स की पर्सनल जानकारी पूरी तरह सुरक्षित रहेगी. यह नया AI फीचर Private Processing नाम की तकनीक पर काम करता है, जो यह सुनिश्चित करता है कि आपकी बातचीत केवल आपके लिए ही रहे.</p>
<p>WhatsApp का कहना है कि यह प्रोसेसिंग Trusted Execution Environment (TEE) नाम के सिक्योर इंफ्रास्ट्रक्चर पर होती है, जो डाटा को पूरी तरह से प्राइवेट और सुरक्षित बनाता है.</p>
<p><strong>AI देगा मैसेज का सार और सुझाव</strong></p>
<p>इस नए फीचर की एक और खास बात ये है कि ये न सिर्फ मैसेज का सारांश देगा, बल्कि आपको यह भी सुझाव देगा कि कौन से मैसेज जरूरी हैं और किसे पढ़ने की तुरंत जरूरत नहीं. यानी आपका समय भी बचेगा और जरूरी बात भी आप तक पहुंच जाएगी.</p>
<p><strong>कहां और कैसे मिलेगा ये फीचर?</strong></p>
<p>फिलहाल यह फीचर अमेरिका में कुछ यूजर्स के लिए उपलब्ध है और अभी सिर्फ अंग्रेजी भाषा को सपोर्ट करता है. लेकिन कंपनी की योजना है कि आने वाले समय में इसे दूसरी भाषाओं में भी लाया जाएगा, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इसका फायदा उठा सकें.</p>
<p>जब यह फीचर आपके WhatsApp में आएगा, तो आपको अपने चैट सेक्शन में ही सभी अनरीड मैसेज का सारांश लिस्ट या बुलेट फॉर्म में दिखाई देगा. इससे हर जरूरी बात पर नजर रखना और भी आसान हो जाएगा.</p>
<p>WhatsApp का यह नया AI Summarize फीचर खास उन लोगों के लिए वरदान साबित हो सकता है जो रोजाना सैकड़ों मैसेज से परेशान रहते हैं या समय की कमी के चलते सब कुछ पढ़ नहीं पाते. अब जरूरी बातों से जुड़ना पहले से कहीं ज्यादा आसान हो जाएगा वो भी बिना आपकी प्राइवेसी से कोई समझौता किए.</p>
<p>Read also : <span style="color:rgb(224,62,45);"><strong><a class="post-title" style="color:rgb(224,62,45);" href="https://www.nirpakhpost.in/tech/%E0%A4%95%E0%A5%88%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%AE%E0%A5%8B%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%9F%E0%A4%BE%E0%A4%87%E0%A4%9C-%E0%A4%B9%E0%A5%8B%E0%A4%A4%E0%A4%BE-%E0%A4%B9%E0%A5%88-youtube-%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%AB%E0%A5%89%E0%A4%B2%E0%A5%8B%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B8-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A4%A8%E0%A5%87/article-2450">कैसे मोनेटाइज होता है YouTube? जानें कितने फॉलोवर्स पर मिलने लगते हैं पैसे</a></strong></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Tech</category>
                                    

                <link>https://www.nirpakhpost.in/tech/whatsapp-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%AA%E0%A5%87%E0%A4%B6-%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%A8%E0%A4%AF%E0%A4%BE-ai-%E0%A4%AB%E0%A5%80%E0%A4%9A%E0%A4%B0-%E0%A4%AE%E0%A5%88%E0%A4%B8%E0%A5%87%E0%A4%9C-%E0%A4%AA%E0%A4%A2%E0%A4%BC%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%B9%E0%A5%81%E0%A4%86/article-2451</link>
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                <pubDate>Fri, 04 Jul 2025 11:54:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[NIRPAKH POST]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कैसे मोनेटाइज होता है YouTube? जानें कितने फॉलोवर्स पर मिलने लगते हैं पैसे</title>
                                    <description><![CDATA[<p>आज के डिजिटल युग में YouTube केवल मनोरंजन का जरिया नहीं रह गया है, बल्कि लाखों लोगों के लिए कमाई का एक सशक्त माध्यम बन चुका है. हर दिन हजारों नए क्रिएटर्स इस प्लेटफॉर्म पर वीडियो अपलोड करते हैं लेकिन हर किसी को पैसे नहीं मिलते. इसके लिए कुछ नियम और शर्तें होती हैं जिन्हें पूरा करने के बाद ही YouTube चैनल को मोनेटाइज किया जा सकता है.</p>
<p><strong>YouTube मोनेटाइजेशन के लिए जरूरी शर्तें</strong></p>
<p><br />YouTube पर पैसे कमाने के लिए सबसे पहले आपका चैनल YouTube Partner Program (YPP) में शामिल होना जरूरी है. इसके लिए आपके चैनल को कुछ मानदंडों</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nirpakhpost.in/tech/%E0%A4%95%E0%A5%88%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%AE%E0%A5%8B%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%9F%E0%A4%BE%E0%A4%87%E0%A4%9C-%E0%A4%B9%E0%A5%8B%E0%A4%A4%E0%A4%BE-%E0%A4%B9%E0%A5%88-youtube-%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%AB%E0%A5%89%E0%A4%B2%E0%A5%8B%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B8-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A4%A8%E0%A5%87/article-2450"><img src="https://www.nirpakhpost.in/media/400/2025-07/youtube_full-color_icon_(2017).svg.webp" alt=""></a><br /><p>आज के डिजिटल युग में YouTube केवल मनोरंजन का जरिया नहीं रह गया है, बल्कि लाखों लोगों के लिए कमाई का एक सशक्त माध्यम बन चुका है. हर दिन हजारों नए क्रिएटर्स इस प्लेटफॉर्म पर वीडियो अपलोड करते हैं लेकिन हर किसी को पैसे नहीं मिलते. इसके लिए कुछ नियम और शर्तें होती हैं जिन्हें पूरा करने के बाद ही YouTube चैनल को मोनेटाइज किया जा सकता है.</p>
<p><strong>YouTube मोनेटाइजेशन के लिए जरूरी शर्तें</strong></p>
<p><br />YouTube पर पैसे कमाने के लिए सबसे पहले आपका चैनल YouTube Partner Program (YPP) में शामिल होना जरूरी है. इसके लिए आपके चैनल को कुछ मानदंडों को पूरा करना होता है.</p>
<p>जब आपके चैनल पर 1000 या उससे ज्यादा सब्सक्राइबर्स हो जाते हैं तो आप मोनेटाइजेशन के लिए आवेदन कर सकते हैं.<br />पिछले 12 महीनों में आपके चैनल के वीडियो को कम से कम 4000 घंटे तक देखा गया हो.<br />आपके चैनल पर YouTube की पॉलिसी का पालन होना जरूरी है. किसी तरह की कॉपीराइट या स्पैम संबंधी समस्या नहीं होनी चाहिए.<br />वीडियो पर दिखने वाले विज्ञापनों से होने वाली कमाई आपको AdSense अकाउंट के जरिए मिलती है.<br />कैसे होते हैं पैसे कमाने के तरीके?<br />YouTube पर कमाई सिर्फ विज्ञापनों से ही नहीं होती, बल्कि इसके कई और तरीके भी हैं:</p>
<p>Ad Revenue: जब आपके वीडियो पर ऐड चलते हैं और दर्शक उन्हें देखते या क्लिक करते हैं तो उसका एक हिस्सा आपको मिलता है.</p>
<p>Channel Memberships: अगर आपके पास एक्टिव फैनबेस है, तो आप मेंबरशिप फीचर एक्टिव कर सकते हैं जिसमें दर्शक हर महीने फीस देकर एक्स्ट्रा कंटेंट का आनंद ले सकते हैं.</p>
<p>Super Chat और Super Stickers: लाइव स्ट्रीम के दौरान दर्शक पैसे भेज सकते हैं जो डायरेक्ट क्रिएटर को मिलता है.</p>
<p>ब्रांड डील्स और स्पॉन्सरशिप: जैसे-जैसे आपके फॉलोवर्स बढ़ते हैं, कंपनियां आपके वीडियो में अपने प्रोडक्ट प्रमोट करने के लिए आपको पैसे देती हैं.</p>
<p>Affiliate Marketing: आप प्रोडक्ट्स के लिंक अपने डिस्क्रिप्शन में दे सकते हैं, और उस लिंक से खरीदी पर आपको कमीशन मिलता है.</p>
<p><strong>1000 फॉलोवर्स के बाद क्या सच में शुरू हो जाती है कमाई?</strong></p>
<p>सिर्फ 1000 सब्सक्राइबर्स होने से कमाई शुरू नहीं होती जब तक कि 4000 घंटे का वॉच टाइम पूरा न हो. लेकिन यह पहला जरूरी कदम है. मोनेटाइजेशन अप्रूव होने के बाद भी, कमाई इस बात पर निर्भर करती है कि आपके वीडियो पर कितने व्यूज आ रहे हैं, ऐड कितनी बार दिख रही हैं और दर्शक किस देश से हैं. अमेरिका और यूरोपीय देशों से आए व्यूज का CPM (Cost Per Mille यानी 1000 व्यूज पर मिलने वाले पैसे) भारत की तुलना में कहीं ज्यादा होता है.</p>
<p>Read also : <span style="color:rgb(224,62,45);"><strong><a class="post-title-lg" style="color:rgb(224,62,45);" href="https://www.nirpakhpost.in/punjab/punjab-government-approves-widening-of-4-roads-in/article-2449">पंजाब सरकार ने हलका चब्बेवाल में 4 सडक़ों को 10 से 18 फीट चौड़ा करने को मंजूरी दी- डॉ. राज कुमार</a></strong></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Tech</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 04 Jul 2025 11:27:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[NIRPAKH POST]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>फोन और लैपटॉप को साइबर हमलों से बचाना है? सरकार ने सुझाए ये मुफ़्त टूल्स, अभी करें इस्तेमाल</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">आजकल ऑनलाइन धोखाधड़ी और साइबर हमलों की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं, जिससे आम लोगों को बड़ी आर्थिक हानि का सामना करना पड़ रहा है. इसी खतरे को देखते हुए भारत सरकार ने नागरिकों को जागरूक और सुरक्षित रखने के लिए एक खास पहल शुरू की है. इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) की साइबर स्वच्छता केंद्र पहल के तहत कुछ अहम साइबर सुरक्षा टूल्स की जानकारी दी गई है.</p>
<p style="text-align:justify;">ये टूल्स खास तौर पर आपके स्मार्टफोन, डेस्कटॉप और लैपटॉप को मैलवेयर, बॉट्स और दूसरे साइबर खतरों से सुरक्षित रखने में मदद करते हैं. सबसे अच्छी बात यह है</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nirpakhpost.in/tech/%E0%A4%AB%E0%A5%8B%E0%A4%A8-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%B2%E0%A5%88%E0%A4%AA%E0%A4%9F%E0%A5%89%E0%A4%AA-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%87%E0%A4%AC%E0%A4%B0-%E0%A4%B9%E0%A4%AE%E0%A4%B2%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%AC%E0%A4%9A%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%B9%E0%A5%88-%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0/article-2400"><img src="https://www.nirpakhpost.in/media/400/2025-06/download-(32).jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">आजकल ऑनलाइन धोखाधड़ी और साइबर हमलों की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं, जिससे आम लोगों को बड़ी आर्थिक हानि का सामना करना पड़ रहा है. इसी खतरे को देखते हुए भारत सरकार ने नागरिकों को जागरूक और सुरक्षित रखने के लिए एक खास पहल शुरू की है. इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) की साइबर स्वच्छता केंद्र पहल के तहत कुछ अहम साइबर सुरक्षा टूल्स की जानकारी दी गई है.</p>
<p style="text-align:justify;">ये टूल्स खास तौर पर आपके स्मार्टफोन, डेस्कटॉप और लैपटॉप को मैलवेयर, बॉट्स और दूसरे साइबर खतरों से सुरक्षित रखने में मदद करते हैं. सबसे अच्छी बात यह है कि ये सभी टूल्स विंडोज और एंड्रॉयड यूजर्स के लिए पूरी तरह मुफ्त उपलब्ध हैं.</p>
<p style="text-align:justify;">लैपटॉप के लिए ये एंटीवायरस हैं फायदेमंद<br />अगर आप अपने विंडोज लैपटॉप को वायरस और बॉट्स से बचाना चाहते हैं, तो सरकार ने तीन प्रभावी एंटीवायरस सॉफ्टवेयर सुझाए हैं.</p>
<p style="text-align:justify;">K7 Security<br />eScan Antivirus<br />Quick Heal<br />इन टूल्स की मदद से आप अपने डिवाइस को मालवेयर और अन्य साइबर खतरों से सुरक्षित रख सकते हैं.</p>
<p style="text-align:justify;">मोबाइल सुरक्षा के लिए जरूरी टूल्स<br />एंड्रॉयड फोन यूज़ कर रहे हैं? तो आपके लिए भी सरकार ने दो जरूरी ऐप्स की जानकारी दी है.</p>
<p style="text-align:justify;">Read Also : <a class="post-title-lg" href="https://www.nirpakhpost.in/sports/highest-aggregate-score-in-odi-match/article-2399">87 चौके और 26 छक्के, वनडे मैच में 872 रन, इतिहास में अमर रहेगा यह मैच</a></p>
<p style="text-align:justify;">eScan Antivirus Mobile Version: यह ऐप खतरनाक बॉट्स को पहचानकर उन्हें आपके फोन से हटाने में मदद करता है.</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.nirpakhpost.in/media/2025-06/download-(32).jpeg" alt="download (32)" width="1202" height="800"></img></p>
<p style="text-align:justify;">M-Kavach 2: यह सुरक्षा ऐप C-DAC हैदराबाद द्वारा MeitY के सहयोग से तैयार किया गया है. इसमें एंटी-थेफ्ट, ऐप ब्लॉकिंग, डेटा सिक्योरिटी और संदिग्ध लिंक से बचाव जैसे कई जरूरी फीचर्स मौजूद हैं.</p>
<p style="text-align:justify;">क्यों जरूरी है इन टूल्स का इस्तेमाल?<br />साइबर क्राइम के बढ़ते मामलों को देखते हुए अब सिर्फ पासवर्ड बदलना या एंटीवायरस इंस्टॉल करना काफी नहीं है. आपको भरोसेमंद और सरकारी स्तर पर प्रमाणित सुरक्षा टूल्स का इस्तेमाल करना होगा ताकि आपका डेटा और डिजिटल जीवन दोनों सुरक्षित रह सकें.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Tech</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 30 Jun 2025 16:52:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nirpakh News]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मच्छर जितना छोटा हथियार बदल देगा युद्ध का चेहरा! जानें किस तकनीक पर करता है काम</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">चीन ने एक ऐसा माइक्रो ड्रोन विकसित किया है जो आकार में मच्छर जैसा छोटा है और युद्ध के तरीके को पूरी तरह बदल सकता है. यह खुलासा ‘साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट’ की एक रिपोर्ट में हुआ है. यह ड्रोन चीन के हुनान प्रांत स्थित नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ डिफेंस टेक्नोलॉजी (NUDT) की एक रोबोटिक्स लैब द्वारा तैयार किया गया है. इस अत्याधुनिक माइक्रो ड्रोन को हाल ही में CCTV-7 (चीन का मिलिट्री चैनल) पर दिखाया गया. शो के दौरान NUDT के एक छात्र लिआंग हेशियांग ने इस छोटे से ड्रोन को अपने हाथ में पकड़कर बताया कि यह बायोनिक रोबोट</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nirpakhpost.in/tech/china-microdrone/article-2320"><img src="https://www.nirpakhpost.in/media/400/2025-06/gt_b36_wsaa71iz.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">चीन ने एक ऐसा माइक्रो ड्रोन विकसित किया है जो आकार में मच्छर जैसा छोटा है और युद्ध के तरीके को पूरी तरह बदल सकता है. यह खुलासा ‘साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट’ की एक रिपोर्ट में हुआ है. यह ड्रोन चीन के हुनान प्रांत स्थित नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ डिफेंस टेक्नोलॉजी (NUDT) की एक रोबोटिक्स लैब द्वारा तैयार किया गया है. इस अत्याधुनिक माइक्रो ड्रोन को हाल ही में CCTV-7 (चीन का मिलिट्री चैनल) पर दिखाया गया. शो के दौरान NUDT के एक छात्र लिआंग हेशियांग ने इस छोटे से ड्रोन को अपने हाथ में पकड़कर बताया कि यह बायोनिक रोबोट मच्छर जैसा दिखता है और खासतौर पर जासूसी और गोपनीय सैन्य अभियानों के लिए डिज़ाइन किया गया है.</p>
<p style="text-align:justify;">इस ड्रोन की बनावट में दो छोटे पंख हैं जो पत्तों जैसे दिखते हैं, साथ ही इसमें तीन बेहद पतले पैरों जैसी संरचना है. इसकी लंबाई लगभग 1.3 सेंटीमीटर है यानी यह एक सामान्य मच्छर जितना ही छोटा है. इसे स्मार्टफोन से कंट्रोल किया जा सकता है.</p>
<p style="text-align:justify;">इस तरह के माइक्रो ड्रोन खासतौर पर खुफिया अभियानों में क्रांतिकारी साबित हो सकते हैं, क्योंकि यह आकार में बहुत छोटा होने के कारण आसानी से नज़र में नहीं आता. आपदा के बाद मलबे में फंसे लोगों को खोजने में भी इसका उपयोग हो सकता है. इसमें लगे सेंसर से हवा या पानी की गुणवत्ता जैसे पर्यावरणीय आंकड़े भी एकत्र किए जा सकते हैं.</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.nirpakhpost.in/media/2025-06/gt_b36_wsaa71iz.jpeg" alt="Gt_b36_WsAA71iz" width="1200" height="800"></img></p>
<blockquote class="twitter-tweet"><a href="https://twitter.com/jeanlol67573289/status/1936508154231038267">https://twitter.com/jeanlol67573289/status/1936508154231038267</a></blockquote>
<p style="text-align:justify;">

</p>
<p style="text-align:justify;">Read Also : <a class="post-title-lg" href="https://www.nirpakhpost.in/breaking-news/union-cabinet-meeting/article-2319">यूपी, महाराष्ट्र और झारखंड को मोदी सरकार का बड़ा तोहफा</a></p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि, इस तकनीक के साथ कुछ सीमाएं भी हैं. छोटे आकार के कारण यह ड्रोन बहुत अधिक भार नहीं उठा सकता, जिससे इसमें सीमित संख्या में सेंसर या उपकरण लगाए जा सकते हैं. साथ ही, इसकी बैटरी लाइफ भी अपेक्षाकृत कम होती है. फिर भी, बैटरी टेक्नोलॉजी, सेंसरों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में तेजी से हो रहे विकास के चलते भविष्य में ऐसे ड्रोन और ज्यादा सक्षम हो सकते हैं.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Tech</category>
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                <pubDate>Wed, 25 Jun 2025 16:24:45 +0530</pubDate>
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                <title>ईरान की मिस्ट्री मिसाइल ने इज़राइल में मचा दी तबाही! जानें किस तकनीक पर करता है काम</title>
                                    <description><![CDATA[<p>ईरान और इज़राइल के बीच जारी संघर्ष अब और ज़्यादा भयावह होता जा रहा है. 19 जून की सुबह ईरान द्वारा किए गए ताज़ा मिसाइल हमले में इज़राइल के दक्षिणी शहर बेर्शेबा के सोरोका अस्पताल को निशाना बनाया गया जिससे अस्पताल में 70 से अधिक लोग घायल हो गए. कुल मिलाकर इस हमले में पूरे इज़राइल में लगभग 240 लोग घायल बताए जा रहे हैं. हमले के दौरान अस्पताल परिसर में धुएं के गुबार देखे गए और इमरजेंसी सेवाएं तुरंत मौके पर पहुंचीं. अस्पताल के कर्मचारियों ने बताया कि जैसे ही एयर रेड सायरन बजा, कुछ ही सेकंडों में जोरदार</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nirpakhpost.in/breaking-news/%E0%A4%88%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%87%E0%A4%B2-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%87%E0%A4%9C%E0%A4%BC%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%87%E0%A4%B2-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%AE%E0%A4%9A%E0%A4%BE-%E0%A4%A6%E0%A5%80-%E0%A4%A4%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%B9%E0%A5%80/article-2273"><img src="https://www.nirpakhpost.in/media/400/2025-06/1600x960_3676556-untitled-1-copy.webp" alt=""></a><br /><p>ईरान और इज़राइल के बीच जारी संघर्ष अब और ज़्यादा भयावह होता जा रहा है. 19 जून की सुबह ईरान द्वारा किए गए ताज़ा मिसाइल हमले में इज़राइल के दक्षिणी शहर बेर्शेबा के सोरोका अस्पताल को निशाना बनाया गया जिससे अस्पताल में 70 से अधिक लोग घायल हो गए. कुल मिलाकर इस हमले में पूरे इज़राइल में लगभग 240 लोग घायल बताए जा रहे हैं. हमले के दौरान अस्पताल परिसर में धुएं के गुबार देखे गए और इमरजेंसी सेवाएं तुरंत मौके पर पहुंचीं. अस्पताल के कर्मचारियों ने बताया कि जैसे ही एयर रेड सायरन बजा, कुछ ही सेकंडों में जोरदार धमाका हुआ और मिसाइल सीधे अस्पताल से टकरा गई. धमाका इतना तेज था कि पास के सुरक्षित कमरे तक इसकी आवाज़ पहुंची.</p>
<p>इजरायल कर चुका है हमला<br />इससे ठीक पहले 19 जून को ही इज़राइल ने ईरान के अराक हेवी वॉटर रिएक्टर और नटांज़ यूरेनियम संवर्धन केंद्र पर हमला किया था. इज़राइली वायुसेना ने इन दोनों परमाणु स्थलों के साथ-साथ कई अन्य सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया. हालांकि, रिपोर्ट्स के मुताबिक हमले से पहले इन केंद्रों को खाली करा लिया गया था और रेडिएशन का कोई खतरा सामने नहीं आया. इज़राइली सेना ने दावा किया कि अराक रिएक्टर पर हमला इसलिए किया गया ताकि वहां से प्लूटोनियम उत्पादन न हो सके और ईरान की परमाणु हथियार तैयार करने की योजनाओं पर रोक लगाई जा सके.</p>
<p>ईरान के बदले हमले में केवल अस्पताल ही नहीं, बल्कि तेल अवीव के पास रमात गन इलाके में जबोटिंस्की स्ट्रीट पर एक गगनचुंबी इमारत की नींव भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुई. यह जगह शहर के डायमंड एक्सचेंज से महज़ 200 मीटर की दूरी पर है. वहीं पास ही मौजूद एक पिज़्ज़ा शॉप पूरी तरह तबाह हो गई और कुछ पुराने अपार्टमेंट्स को भी नुकसान पहुंचा.</p>
<p>एक स्थानीय निवासी, 69 वर्षीय अशर अदीव ने बताया, “यह ऐसा था जैसे कोई परमाणु बम फटा हो या भूकंप आया हो.” अशर की मां ईरानी यहूदी थीं और वह खुद फारसी बोलते हुए बड़े हुए हैं. उन्होंने भविष्य को लेकर काफी कड़ी प्रतिक्रिया दी.</p>
<p>ईरान की कई सिरों वाली मिसाइल<br />खबरों के मुताबिक, ईरान ने इस हमले में संभवतः मल्टीपल वॉरहेड्स (कई सिरों वाली मिसाइल) का इस्तेमाल किया, जिससे इज़राइल की वायु सुरक्षा प्रणाली, विशेषकर आयरन डोम के लिए उसे ट्रैक करना बेहद कठिन हो गया. हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि अब तक नहीं हो पाई है. लेकिन ईरान पहले भी इस तरह की मिसाइल तकनीक को विकसित करने के संकेत दे चुका है.</p>
<p>हमले के बाद इज़राइल के रक्षा मंत्री इसराइल काट्ज़ ने सख्त चेतावनी जारी करते हुए ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को निशाने पर लिया और कहा कि "अगर हमें अपने सभी लक्ष्य पूरे करने हैं, तो यह व्यक्ति अब और जीवित नहीं रहना चाहिए."</p>
<p>इस घटनाक्रम ने साबित कर दिया है कि ईरान और इज़राइल के बीच का तनाव अब एक खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है, जहां दोनों पक्षों की कार्रवाइयां केवल जवाबी हमलों तक सीमित नहीं रह गई हैं, बल्कि रणनीतिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया जा रहा है.</p>
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                <pubDate>Sat, 21 Jun 2025 15:17:48 +0530</pubDate>
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